Maha Interview: अपनी परवाह किए बगैर ही 24 घंटे सेवा में समर्पित हैं डॉक्टर्स...

लॉकडाउन ( LockDown ) की विषम परिस्थितियों ( Odd Circumstances ) में भी सफेद कोट ( White Cote ) में तैनात भगवान के समान डॉक्टर ( Doctor ) दिन-रात कर रहे देखभाल, अपनी परवाह किए बगैर ही 24 घंटे ( 24 Hours ) सेवा में समर्पित हैं डॉक्टर्स

By: Rohit Tiwari

Published: 27 Mar 2020, 04:48 PM IST

रोहित के. तिवारी
मुंबई. देश भर में जहां कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं इसके दिन पर दिन बढ़ रहे मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए जहां देश भर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन भी घोषित किया गया है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी सफेद कोट में तैनात भगवान के समान हमारे डॉक्टर दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटे हुए हैं। हालांकि इस महामारी के वायरस से बचाव के लिए जहां राज्य भर के डॉक्टर, चिकित्सा कर्मचारी समेत अन्य पैरामेडिकल स्टाफ जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। वहीं हम बात करें मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल की तो यहां डॉक्टर अपनी परवाह किए बगैर ही लोगों की सेवा में 24 घंटे समर्पित है। इस पर कस्तूरबा अस्पताल के सुप्रिंटेनडेंट डॉक्टर चंद्रकांत पवार से "पत्रिका" की विशेष बातचीत :

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- इन दिनों डॉक्टरों का जीवन कैसा चल रहा है?
आवश्यकता के अनुसार पीपीई किट समेत एन-95 मस्क के अलावा उनके आने-जाने की सारी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से ठीक किया गया है। वहीं उनके खान-पान समेत अन्य मूलभूत सहूलियतों की राज्य सरकार के अलावा मुंबई महानगरपालिका की ओर से सारी व्यवस्थाएं करा दी गई हैं। हमारे सारे डॉक्टर जी-जान और पूरी लगन से अपने कार्यों को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। पहले की तुलना में आजकल डॉक्टरों का जीवन भी काफी व्यस्त हो गया है और प्रत्येक डॉक्टर की यही प्राथमिकता है कि वह जल्द से जल्द कोरोना वायरस से पीडित लोगों को निजात दिला सकें।

- क्या-क्या दिक्कतें आ रही हैं?
हालांकि शुरुआती दौर में अचानक बढ़ते प्रकोप में जहां कुछ एक समस्याएं सामने आई थीं, वहीं अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका के कमिश्नर और राज्य सरकार की ओर से हर तरह की दिक्कतों को दूर कर दिया गया है। वहीं आने वाले समय में होने वाली कुछ परेशानियों को लेकर भी हमने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि लोगों को जल्द से जल्द और समय रहते उपचार मिल सके। इस लिहाज से शासन-प्रशासन की ओर से डॉक्टरों की जो भी सहायता की जा सकती है उसे शत-प्रतिशत पूरा कर दिया गया है।

- डॉक्टरों के घर, परिवार का माहौल?
विषम परिस्थितियों में अधिकतर डॉक्टर तो घर भी नहीं जा रहे हैं, जबकि जो डॉक्टर घर पहुंच भी रहे हैं। वे काफी एहतियात बरत रहे हैं और अपने घरवालों की सुरक्षा का ध्यान में रखते हुए वह खुद को सैनिटाइज करने के बाद ही परिवार में किसी अन्य लोगों से संपर्क में आते हैं, जबकि डॉक्टरों के घरों में भी कोरोना वायरस को लेकर काफी चिंता की जा रही है। वहीं जिन डॉक्टरों के घर में सीनियर सिटीजन हैं, वह उनसे फ़िलहाल दूरी ही बनाए हुए हैं। इसके विपरीत इमरजेंसी सेवाओं में कार्यरत डॉक्टरों के परिवार अलग ही रहते हैं, जिसके चलते परिवार वालों को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही वे बगैर किसी भय के हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहते हैं, जबकि ऊपर वाले की दया से अभी तक ऐसी कोई अनहोनी भी सामने नहीं आई है।

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- इलाज में मरीज सहयोग देते हैं या नहीं?
शुरुआती दिनों की तुलना में अब मरीजों की ओर से अच्छा सहयोग मिल रहा है। यहां तक कि मरीज अब अपनी ही तरफ से वीडियो, फेसबुक, व्हाट्सएप समेत अन्य सोशल माध्यमों से किसी भी समस्या को लेकर तुरंत संपर्क भी कर रहे है, जबकि सभी खुश और संतुष्ट भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इसके लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी और ज्यादा चुस्त-दुरुस्त की गई है। इसके अलावा हमारी तरफ से सायन, नायर, केईएम, कूपर अस्पतालों में फीवर को लेकर ओपीडी चालू किया गया है, ताकि पेशेंट वहां जाएं और जरा भी वायरस को लेकर होने वाली आशंका के बाद उन्हें तुरंत कस्तूरबा या केईएम अस्पताल में पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा प्राइवेट लैब में भी यह व्यवस्था शुरू हो गई है।

- इलाज के लिए संसाधन पूरे है या नहीं?
अभी तक तो ऐसी कोई समस्या सामने नहीं आई है, लेकिन अगर इसी तरह दिन-प्रतिदिन मरीज बढ़ते रहे तो आगे समस्या हो सकती है। इसके लिए भी हमने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि इस महामारी से निपटने के लिए किसी भी तरह के संसाधनों की कमी न पड़े इसके तहत हम आइसोलेशन वार्ड की भी संख्या बढ़ा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में आइसोलेटेड बेड उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही महानगरपालिका के अस्पतालों के अलावा भी अन्य डॉक्टरों से हमने मदद लेना भी शुरू कर दी है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आगे भी कोई दिक्कत होने वाली नहीं है।

- सरकार की ओर से कितनी मदद है?
सरकार की ओर से भी हर संभव मदद की जा रही है, क्योंकि उन्हें पूरे राज्य को देखना है, जबकि महानगरपालिका की ओर से भी इस महामारी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर मदद की जा रही है। लॉकडाउन होने के बावजूद डॉक्टरों की 95 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह रोगियों की प्रति कितनी संजीदगी से कार्य कर रहे हैं।

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- अभी डॉक्टर कितने घंटे काम कर रहे हैं?
पिछले दिनों की तुलना में आजकल डॉक्टर 10 से 12 घंटे काम कर रहे हैं, जबकि हमारी तरफ से एयरपोर्ट हो या सेवन हिल्स हॉस्पिटल की ड्यूटी भी की गई है। इसके विपरीत नियमित ड्यूटी भी डॉक्टर कर रहे हैं।

- डॉक्टर महामारी से कैसे बचाव कर रहे है?
एन-95 मस्क, एचआईवी किड्स के अलावा पर्सनल सिक्योरिटी इक्विपमेंट का भी प्रयोग किया जा रहा है, ताकि रोगियों के संपर्क में आने के बाद डॉक्टरों में यह महामारी प्रवेश न करे।

- डॉक्टरों की इन दिनों दिनचर्या क्या है?
आजकल डॉक्टरों की कोई दिनचर्या नहीं रह गई है, जबकि सभी डॉक्टर्स मिलकर सिर्फ कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की सेवा में ही कार्य कर रहे हैं।

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- इस महामारी में कितने दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं?
कोरोना वायरस बहुत ही अलग टाइप की बीमारी है। इस महामारी के लक्षण किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मात्र में आने से के बाद या अगले 14 दिनों तक उसमें लक्षण दिखाई देने की उम्मीद रहती है।

- शुरुआती समय में लक्षण किस तरह के दिखते हैं?
खांसी, सर्दी, जुखाम, बुखार जैसे शुरुआती लक्षण होते हैं, जबकि सामान्य तौर पर दवा के बाद भी इस वायरस से संक्रमित लोगों में फीवर बना ही रहता हैं।

- इस समय कस्तूरबा अस्पताल में लगभग कितने डॉक्टर काम कर रहे हैं?
करीब 30 डॉक्टरों समेत 40 पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा बड़ी संख्या में लोग मरीजों की सेवा में समर्पित हैं। साथ ही मौजूदा समय में बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों के अन्य डॉक्टर भी इसी व्यवस्था में जुटे हुए हैं। वहीं बीएमसी के पांच बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टरों समेत 18 पेरीफेरल हॉस्पिटल, पांच स्पेशलाइजेशन हॉस्पिटल के अलावा 174 हेल्थ पोस्ट समेत हजारों की संख्या में डॉक्टर अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

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