scriptEvery third child is addicted to online gaming, every sixth child addi | हर तीसरा बच्चा ऑनलाइन गेमिंग की जद में, हर छठा बच्चा एडिक्ट | Patrika News

हर तीसरा बच्चा ऑनलाइन गेमिंग की जद में, हर छठा बच्चा एडिक्ट

अंधेरे में भविष्य: पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान नहीं, माता-पिता परेशान
खेल-कूद से दूर होने के चलते सेहत खराब

मुंबई

Updated: April 17, 2022 07:46:47 pm

ओमसिंह राजपुरोहित/पुणे. कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बहुत से बच्चे मोबाइल गेमिंग के चक्कर में फंस गए हैं। देश का हर तीसरा बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है। हर छठां बच्चा एडिक्ट हो चुका है। गेमिंग की लत में डूबे बच्चों का न पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान है और न ही सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। खेल-कूद से दूर होने के कारण शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा। बच्चों की खराब सेहत को लेकर परिजन ही नहीं डॉक्टर भी चिंतित हैं। देश के विभिन्न शहरों में मनोचिकित्सकों की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में यह नतीजा निकला है। दो समूहों में किए गए सर्वे में पांच से 12 साल और 13 से 20 साल के बच्चे शामिल हैं। सर्वे में पता चला कि 10 से 15 प्रतिशत बच्चों को मोबाइल, टीवी, लैपटॉप, कंप्यूटर, आईपैड पर गेमिंग की लत है जबकि 35 से 40 प्रतिशत बच्चे गेमिंग में जकड़े हैं।

हर तीसरा बच्चा ऑनलाइन गेमिंग की जद में, हर छठा बच्चा एडिक्ट
हर तीसरा बच्चा ऑनलाइन गेमिंग की जद में, हर छठा बच्चा एडिक्ट

परिजन ही थमाते हैं मोबाइल
रोते हुए छोटे बच्चों को चुप कराने के लिए परिजन अक्सर मोबाइल पकड़ा देते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार यह ठीक नहीं हैं। मासूमों को गैजेट्स की आदत लग जाती है। आगे उन्हें इससे बाहर निकालना मुश्किल होता है। उनका सुझाव है कि बच्चों के सामने माता-पिता को फोन पर लंबी बातचीत नहीं करनी चाहिए।

बढ़ रहे केस
मनोरोग चिकित्सक डॉ. स्वप्निल एस. देशमुख ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग का बच्चों के दिलो-दिमाग पर गहरा असर पड़ रहा है। खेल-कूद से दूर होने के कारण मोटापे की समस्या बढ़ रही है। कुछ बच्चे याददाश्त कमजोर होने तो कुछ आंख से जुड़ी समस्या से परेशान हैं। गेमिंग से दूरी बनाए बिना ऐसे बच्चों की सेहत ठीक नहीं होगी। आदत सुधारने के लिए हम बच्चों की काउंसिलिंग करते हैं।

ख्वाबों में खोए
डॉ. रोशिता खरे ने कहा कि बच्चे गेमिंग कैरेक्टर (चरित्र) को वास्तविक मानते हैं। वास्तविक दुनिया से परे वे ख्वाबों में खाए रहते हैं। दोस्तों, परिवार, नात-रिश्तेदारों से वे कट जाते हैं। इस कारण कई बच्चे चिंता-अवसाद ग्रस्त हैं। उनके लिए यह ज्यादा खतरनाक है। माता-पिता को संयम से काम लेने की जरूरत है।

संभालने की जरूरत
जागृति पुनवर्सन केंद्र के डॉ. अमर शिंदे ने कहा कि बच्चों को गेमिंग की लत से बाहर निकालने की जरूरत है। कुछ बच्चे तो खुदकुशी भी कर चुके हैं। झल्लाने-चिल्लाने के बजाय माता-पिता को संयम से काम लेना चाहिए। समय रहते हम नहीं संभले तो नतीजे गंभीर हो सकते हैं।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

हैदराबाद : बीजेपी की बैठक का आज दूसरा दिन, पीएम मोदी करेंगे संबोधितNIA की टीम ने केमिस्ट की हत्या की जांच के लिए महाराष्ट्र के अमरावती का किया दौराभाजपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 'अर्थव्यवस्था' और 'गरीब कल्याण' पर प्रस्ताव किया पारित, साथ ही की 'अग्निपथ योजना' की सराहनाUdaipur murder case: गुस्साए वकीलों ने कन्हैया के हत्यारों के जड़े थप्पड़, देखें वीडियोAmravati Murder Case: उमेश कोल्हे की हत्या का मास्टरमाइंड नागपुर से गिरफ्तार, अब तक 7 आरोपी दबोचे गए, NIA ने भी दर्ज किया केसमोहम्‍मद जुबैर की जमानत याचिका हुई खारिज,दिल्ली की अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजाSharad Pawar Controversial Post: अभिनेत्री केतकी चितले ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- हिरासत के दौरान मेरे सीने पर मारा गया, छेड़खानी की गईIndian of the World: देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस को यूके पार्लियामेंट में मिला यह पुरस्कार, पीएम मोदी को सराहा
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.