जलाशयों में ईसर-गौर प्रतिमाओं का विधिविधान से विसर्जन किया गया

Navneet Sharma

Publish: Apr, 09 2019 06:26:03 PM (IST)

Mumbai, Mumbai, Maharashtra, India

सिलवासा. गणगौर उत्सव ईसर-गौर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ समापन हो गया है। सोमवार को दमणगंगा के किनारे व जलाशयों में ईसर-गौर प्रतिमाओं का विधिविधान से विसर्जन किया गया। घरों में महिलाओं ने सवेरे ईसर-गौर की पूजा आराधना करके प्रसाद का भोग लगाया एवं सिंदूर, रोली, चंदन, टीका, काजल आदि चढ़ाकर अचल सुहाग की मन्नत मांगी। नवविवाहिताओं ने गणगौर का उद्यापन किया व कथा सुनी।

गणगौर विसर्जन के लिए शहर की सोसायटियों में अलग-अलग यात्राएं निकली। टोकरखाड़ा, आमली, लवाछा में विसर्जन यात्रा के दौरान महिलाओं ने समूह में गणगौर के गीत गाए। गायत्री मैदान व लवाछा अंबिका पार्क में शाही अंदाज में ईसर-गौर की गाजे-बाजे के साथ गणगौर सवारी निकली, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के धर्मप्रेमी शामिल हुए। विसर्जन यात्रा के दौरान गाजे-बाजे, ढप व चंग की थाप पर महिला व पुरुषों ने लोकनृत्य किया। महिला व बालिकाओं ने आभूषण व नए कपड़ो में सज धजकर घूमर किया।

ईसर-गौर की सवारी के संग चल रही महिलाओं ने ईसर-गौर के गीत गाए। रानियारे माथे मोर, सुणण्यां सुगण मना सुहाग साथै, हरी हरी दूब हाथा में पूज रही गणगौर, फूल पांखडिय़ा दूब पाठा माली ल्यादै तोड़, ये तो पाठा नै चिटकाती बीरा बेल बंधावे ओर गोरड्यिा आदि गीतों से राजस्थानी संस्कृति की याद दिला दी। लवाछा में पुरुषों ने गणगौर रंग की पौशाक पहनकर शाही ठाठ में सवारी निकाली। यहां पिछले १३ वर्षो से गणगौर की सवारी निकाली जाती है।

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