खेती-किसानी: किसानों की आय बढ़ाने के लिए विश्व बैंक की पहल

60 तहसीलों में स्मार्ट कॉटन परियोजना, गुणवत्ता में सुधार-ज्यादा उपज का लक्ष्य
राजस्थान-गुजरात के मुकाबले महाराष्ट्र में प्रति हेक्टेयर कम उत्पादन

By: Chandra Prakash sain

Published: 05 Jun 2021, 08:39 PM IST

ओमसिंह राजपुरोहित/पुणे. महाराष्ट्र में कपास की सबसे ज्यादा खेती होती है, मगर प्रति हेक्टेयर कम उपज के चलते किसानों को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं होती है। किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए महाराष्ट्र सहकारी कपास उत्पादक संघ विश्व बैंक की सहायता से राज्य के 20 जिलों की 60 तहसीलों में स्मार्ट कॉटन परियोजना शुरू कर रहा है। इसका मकसद उत्पादन बढ़ाने के साथ कपास की गुणवत्ता में सुधार करना है। इससे किसानों को कपास की अच्छी कीमत मिल सकेगी। उपज बढऩे से किसानों की आय बढ़ेगी। योजना के तहत सालाना 10 लाख गांठ कपास उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
देश में कपास की सबसे ज्यादा खेती महाराष्ट्र में होती है। कुल उत्पादन में राज्य का योगदान 30 प्रतिशत है। गुणवत्ता कमजोर होने के चलते किसानों को वांछित कीमत नहीं मिल पाती। राज्य में प्रति हेक्टेयर कपास की उपज आठ से नौ क्विंटल होती है। यह राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना के मुकाबले बहुत कम है। राष्ट्रीय औसत 14 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। दुनिया के कई देशों में प्रति हेक्टेयर कपास उपज का औसत 24 से 25 क्विंटल है। अमरीकी किसान प्रति हेक्टेयर 55 क्विंटल कपास की उपज हासिल करते हैं।
महाराष्ट्र सहकारी कपास उत्पादक संघ के पदाधिकारी जयेश महाजन ने कहा कि हम बेहतर किस्म के कपास की खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों की हालत में सुधार करना चाहते हैं। किसानों को उन्नत बीज मुहैया कराए जाएंगे। साथ ही कपास उत्पादन की आधुनिक तकनीक भी उन्हें बताई जाएगी। अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की विश्व बाजार में मांग है। इसकी ऊंची कीमत मिलेगी। इससे निश्चित तौर पर किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

Patrika
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