पड़ताल : ये सच क्यों भुला दिया? वर्ष 1638 में भी आरे जंगल में रहते थे 66 लोग !

  • आजादी के पहले के दस्तावेज दे रहे गवाही
  • अंग्रेजों के जमाने से जंगली इलाका था आरे
  • वकील गॉडफ्रे पिमेंटा ने किया दावा, 1638 में भी आरे में रहते थे 66 लोग

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मुंबई. मेट्रो रेल का कारशेड बनाने के लिए आरे कॉलोनी सुर्खियों में है। राज्य सरकार का दावा है कि आरे वन क्षेत्र नहीं हैं। इस आधार पर पेड़ों की कटाई की जा सकती है। सरकार के इसी तर्क को मानते हुए बांबे हाईकोर्ट ने पेड़ काटने के खिलाफ दायर याचिकाएं शुक्रवार और शनिवार को खारिज कर दीं। कारशेड के लिए पेड़ों की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। दूसरी तरफ मेट्रो रेल का कारशेड बनाने के लिए आरे कॉलोनी के पेड़ों पर आरी नहीं चलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आरे में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है। साथ ही अब तक काटे गए पेड़ों बाबत जानकारी भी शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से तलब की है। सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच के समक्ष 21 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि वह पूरे मामले की समीक्षा के बाद अपना फैसला सुनाएगी। साथ ही पेड़ काटने के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार लोगों को रिहा करने का आदेश भी शीर्ष अदालत ने दिया।


आरे कॉलोनी को आज सरकार भले ही जंगल मनाने से इंकार कर दे, लेकिन पुराने दस्तावेजों और इतिहास को देखें तो आरे जंगल ही है। आरे संजय गंाधी नेशनल पार्क का हिस्सा है। पुर्तगालियों और अंग्रेजों ने भी आरे को जंगल घोषित किया था। यह दावा वरिष्ठ वकील गोडफ्रे पिमेंटा ने किया है। इधर, दिल्ली के लॉ कॉलेज में पढ़ रहे पर्यावरण प्रेमी छात्र ऋषभ रंजन ने पर्यावरण संतुलन बिगडऩे की आशंका जताते हुए एक पत्र सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा था। चीफ जस्टिस ने रंजन की पत्र को जनहित याचिका में बदल दिया।

मामले की सुनवाई के लिए विशेष बेंच गठित की, जिसके समक्ष सोमवार को सुनवाई हुई। सरकार की तरफ से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिया कि आरे में अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि मामले में गिरफ्तार लोगों को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आरे 3000 एकड़ में फैला है, जिसमें से 2 प्रतिशत जगह पर कारशेड बनाया जाएगा।


शहस्ती के नाम से जानते थे लोग


आरे में पेड़ काटे जाने को लेकर गरमाए माहौल पर पिमेंटा ने एक लेख लिखा है। इसमें बताया गया है कि 1638 में जब मुंबई अस्तित्व में आ रहा था, तब यहां कुल 66 गांव वाले रहते थे। सलेसेट नाम से मशहूर आरे को शहस्ती इलाका के नाम से भी जाना जाता था।


पुर्तगालियों ने किया था कब्जा


पिमेंटा के मुताबिक जब पुर्तगालियों ने आरे को कब्जे में लिया, तब इन गावों में बड़ी संख्या में लोग रहते थे। लेकिन उसके बाद मोहमदन राजा ने इसका और विभाजन किया। राजा ने आरे को 114 गाव में तब्दील किया। आज जिसे हम मलाड और मरोल के नाम से जानते हैं तब आरे के गांव में ही आता था।


सात टापुओं में आरे का पहाड़


उन्होंने बताया कि शुरुआत में मुंबई विभाग में कुल 7 टापू थे। इनमें आरे के पहाड़ भी थे। इस पर मछुआरे, शिकारी और रईसों का कब्जा था। यहां पर शेर, बाघ, चीता जैसे कई खूंखार जानवर भी रहते थे। पिमेंटा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि यहां के रहने वाले आजादी की जंग में शामिल थे। पिमेंटा ने कहा कि पश्चिम मुंबई का हिस्सा आरे को मुंबई शहर बनने के बाद धीरे-धीरे बगल होने लगा। संजय गांधी नेशनल पार्क और आरे दो भागों में बंट गया। कुछ जंगल तो झील बनाने में ही काट दिए गए। तुलसी, विहार जैसी झील जिससे मुंबई के लोगों को पानी मिलता है। इन झीलों के विकास के लिए पेड़ काटे गए हैं।

पूरा हो चुका है काम


उल्लेखनीय है कि कुछ संस्थाओं की ओर से बांबे हाईकोर्ट में आरे कॉलोनी को जंगल घोषित कर पेड़ काटने पर रोक लगाने की मांग के साथ याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह सभी याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसके बाद शाम से ही पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। मिली जानकारी अनुसार मेट्रो कारशेड की प्रस्तावित जगह पर पेड़ों की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है।

मेट्रो ने लगाए 24 हजार पौधे


कारशेड के लिए आरे में 2,700 पेड़ काटने से जुड़े विवाद के बीच मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन (एमएमआरसीएल) ने बताया है कि उसने 24 हजार पौधे लगाए हैं। कंपनी की प्रबंध निदेशक अश्विनी भिडे ने ट्विटर पर लिखा, आरे कॉलोनी और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की खाली पड़ी जगहों पर दो साल पहले बेहाड़ा, कदंब, करंज आदि प्रजाति के पौधे लगाए हैं, जिनका तना छह से 12 इंच मोटा और ऊंचाई 12 से 15 फीट के बीच है। मेट्रो कारशेड बनाने के लिए आरे में पेड़ काटना हमारी मजबूरी है।

Show More
Rajesh Kumar Kasera
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned