महाराष्ट्र: 1.25 लाख मजदूरों को उनके गांव भेजेगी सरकार, बांद्रा में जुटी भीड़ से सबक

लॉकडाउन के चलते लोग जहां हैं, वहीं फंसे हैं। सबसे बुरा हाल दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wage Worker's) का है। इन्हें न तो काम मिल रहा है और न ही पैसे हैं। सरकार ने रहने-खाने के इंतजाम का वादा तो किया है, लेकिन राशन नहीं मिलने की शिकायतें शहरी ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से भी मिल रही हैं। इसीलिए मजदूर तबके के लोग अपने गांव, घर-परिवार में जाना चाहते हैं। कैबिनेट मंत्री जयंत पाटील (Jayant Patil) के अनुसार चीनी उद्योग (Sugar Industry) में काम करने वाले 1.25 लाख मजदूर फंसे हैं, जिन्हें गांंव जाने की छूट मिल

By: Basant Mourya

Published: 18 Apr 2020, 02:18 PM IST

मुंबई. कोरोना की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन (lockdown) के चलते सभी तरह के काम-धंधे बंद हैं। इस कारण देश भर में लोग जहां-तहां फंसे हैं। सबसे ज्यादा परेशान दिहाड़ी मजदूर हैं, जिन्हें काम नहीं मिल रहा है। उनके पास रुपए भी नहीं हैं। यह लोग अपने गांव घर-परिवार में लौटना चाहते हैं। गांव जाने की जिद में मजदूर दिल्ली (Delhi), गुजरात (Gujarat) के साथ ही मुंबई (Mumbai) में भी सड़़क पर उतर चुके हैं। लॉकडाउन तोडऩे के लिए इनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए हैं। मायानगरी के बांद्रा (Bandra) में मंगलवार को जुटी डेढ़ हजार लोगों की भीड़ पर गौर किया जा सकता है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने अहम फैसला किया है। राज्य के चीनी उद्योग में काम करने वाले 1.25 लाख मजदूरों को उनके गांव भेजने की तैयारी सरकार कर रही है। ट्वीट के जरिए यह जानकारी कैबिनेट मंत्री जयंत पाटील ने दी है।

सूत्रों के अनुसार मुंबई ही सहित राज्य के कई शहरों में मजदूर गांव जाने की मांग कर रहे हैं। भिवंडी (Bhiwandi), कल्याण (Kalyan) आदि जगहों पर भी मजदूर लॉकडाउन तोड़ चुके हैं। चीनी उद्योग में काम करने वाले मजदूर सड़क पर उतरे तो उन्हें संभालना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इसीलिए चीनी उद्योग के मजदूरों को गांव जाने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की मांग पर पाटील ने कुछ भी नहीं कहा है।

लॉकडाउन से मजदूर तबके के लोगों की परेशाना स्वाभाविक है। सत्ताधारी महाविकास आघाडी सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thakeray) ने मजदूरों के रहने-खाने के इंतजाम का भरोसा दिया है। सरकार का दावा भी है कि वह हर दिन 7.50 लोगों को भोजन मुहैया करा रही है। लेकिन, सरकार के वादे के विपरीत खाना-राशन नहीं मिलने की शिकायतें पूरे राज्य से मिल रही हैं। इससे सरकार की बदनामी हो रही है। उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ( Ajit Pawar) ने सभी जिलों को पालक मंत्रियों को चिट्ठी लिख कर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी गरीबों को बिना भेदभाव के अनाज मिलना चाहिए।

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