Maharashtra Politics : राजस्थान में सियासी उठापटक का महाराष्ट्र तक असर

  • -अलर्ट पर सरकार, मुख्यमंत्री से मिले पवार और थोरात
  • -मुखपत्र के जरिए शिवसेना ने भाजपा को कोसा
  • -तीनों दलों मे से कोई फूटने वाला नही

By: Binod Pandey

Published: 15 Jul 2020, 09:15 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. राजस्थान की सियासी नूराकुश्ती को देखते हुए शिवसेना नीत महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार अलर्ट हो गई है। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल तीनों दलों के नेता अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार रात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। इससे पहले महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात से भी मुख्यमंत्री की बातचीत हुई। तीनों दलों के नेताओं ने मुलाकात और बातचीत के जरिए यह संदेश दिया गया कि हम साथ-साथ हैं। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। खींचतान के बावजूद सरकार स्थिर है। दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा ने भी इस तरह की अटकलों से इनकार की वह राज्य में महाविकासआघाडी सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है ।

यह जगजाहिर है कि भाजपा नेताओं के दिमाग में सत्ता की टीस रह-रह कर उभरती रहती है। पहले कर्नाटक फिर मध्यप्रदेश और अब राजस्थान राजनीतिक उठापठक के चलते महाराष्ट्र सरकार में गठबंधन में शामिल नेता मान रहे कि चौंकन्ना रहने में ही भलाई है।

सामना ने भाजपा को कोसा
राजस्थान के घटनाक्रम के बहाने शिवसेना ने मंगलवार को पार्टी मुखपत्र सामना में भाजपा को जम कर कोसा । सामना में छपे लेख में भाजपा पर सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरने का आरोप लगाया है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी की भूमि है ऐसे कृत्य बर्दाश्त नही करेगी।

जयंत पाटील की चेतावनी
इस बीच एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष व जलसंसाधन मंत्री जयंत पाटील ने कहा कि महाविकास आघाडी सरकार के तीनों दलों में जबरदस्त एकता है।यदि किसी दल के विधायक ने बगावत की भी तो उसके खिलाफ तीनो दल एक साथ खड़े होंगे। वह दुबारा किसी कीमत पर चुनाव नही जीत पायेगा। पाटील ने स्पष्ट कहा कि तीनों दलों मे से कोई फूटने वाला नही है। महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति राजस्थान से भिन्न है।

पवार को भय
उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रकान्त पाटील ने कहा कि महाविकास आघाडी की सरकार खुद दलदल में हैं। पवार साहब के बयानों से ही साफ हो रहा है कि उन्हें महाविकास गठबंधन को लेकर भय है। सामना को दिए साक्षात्कार में पवार गठबंधन की एकता पर जोर दे रहे हैं। उसी से साफ हो रहा है कि पवार का ध्यान कहां हैं।

मुख्यमंत्री गाड़ी हांक रहे रहे हैं
महाविकास आघाडी सरकार में खींचतान कोई नई नहीं है। जब से सरकार बनी है, तकरार-मान-मनुहार जारी है। सबसे पहले मलाईदार विभागों को लेकर तकरार हुई। इसमें एनसीपी और कांग्रेस फायदे में रहीं जबकि शिवसेना को समझौता करना पड़ा। कभी कांग्रेस ने उपेक्षा का आरोप लगाया तो कभी एनसीपी के मंत्रियों ने खुद को हाशिये पर डालने का दुखड़ा रोया। अफसरों के तबादले को लेकर भी तलवारें खिंचीं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सबको समझा-बुझा कर गाड़ी हांक रहे हैं। जब आपसी खटास बढ़ जाती है तब एनसीपी मुखिया रिश्तों में मिठास घोलने का प्रयास करते हैं।

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