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Maharashtra Politics: बीएमसी चुनाव में होगी शिंदे की असली परीक्षा, क्या उद्धव ठाकरे को दे पाएंगे शिकस्त?

महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संग्राम में आखिरकार शिवसेना के बागी गुट की जीत हुई और अब महाराष्ट्र की कमान एकनाथ शिंदे के हाथ में आ गई है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र में जिस तरह से उद्धव सरकार सत्ता से बाहर हुई उसके बाद शिवसेना के सामने अगली सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अस्तित्व को बचाने के साथ बीएमसी चुनाव में जीत दर्ज करने की है।

मुंबई

Updated: July 02, 2022 01:19:14 pm

महाराष्ट्र में जिस तरह उद्धव सरकार सत्ता से बाहर हुई उसके बाद शिवसेना के सामने अगली सबसे बड़ी चुनौती बीएमसी चुनाव में जीत दर्ज करने की है। शिवसेना के बागी विधायकों की चुनौती से जूझ रही शिवसेना के लिए बीएमसी चुनाव काफी अहम होगा। बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का सीएम बनाकर सुविचारित कदम उठाया है, क्योंकि शिवसेना की पकड़ बीएमसी मजबूत है और पार्टी ने इसे दशकों तक नियंत्रित भी किया है।
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Uddhav Thackeray and Eknath Shinde
साल 1971 के बाद से लेकर अब तक शिवसेना ने मुंबई को 21 मेयर दिए हैं। हालांकि, साल 1985 में शिवसेना बीएमसी में सत्ता में आई थी, इसके बाद शिवसेना ने 1996 तक नागरिक निकाय को अपना गढ़ बना लिया। विशेषज्ञों की माने तो मुंबई में शिवसेना की अधिकांश राजनीतिक लड़ाई आमतौर पर देश के सबसे अमीर नागरिक निकाय पर उसके कब्जे से मजबूत होती है।
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एकनाथ शिंदे के बाद मुंबई नगर निकाय पर अपना कब्जा बनाए रखना शिवसेना के लिए मुश्किल नजर आ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण विधायकों की बगावत है। आंकड़ों की बात करें तो 1996 से अब तक शिवसेना का बीएमसी पूरा नियंत्रण रहा है। शिवसेना ने साल 1997 (103 सीटें), 2002 (97 सीटें), 2007 (84 सीटें), 2012 (75 सीटें) और फिर 2017 (84 सीटें) में लगातार बीएमसी चुनाव में शानदार जीत दर्ज की हैं। हाल के परिसीमन और आरक्षण की कवायद में, शिवसेना के चुनावी वार्ड 237 से 236 हो गए।
मुंबई के एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर अविनाश कोल्हे के मुताबिक बीएमसी के बिना उद्धव ठाकरे की शिवसेना पानी से बाहर मछली की तरह है और बीजेपी इसको अच्छी तरह समझती है। एकनाथ शिंदे शिवसेना के पुराने सिपाही रहे हैं। वह पार्टी तंत्र के नट और बोल्ट को अच्छी तरह जानते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि सीएम की गद्दी पर शिवसेना के एक आदमी के साथ…मुझे यकीन है कि उन्हें बताया गया होगा कि उन्हें यह पद इस उम्मीद में दिया जा रहा है, कि वह बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के लिए बीएमसी चुनावों में बेहतर करेंगे।
बीएमसी पर बीजेपी की नजर

महाराष्ट्र में सत्ता बदलने के बाद बीजेपी ने सोशल मीडिया पर साफ कर दिया था कि उसका अगला लक्ष्य बीएमसी चुनाव हैं। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये तो झांकी है, मुंबई महानगर पालिका अभी बाकी है। बीजेपी राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही शिवसेना में बड़ी फूट डालने में सफल हुई और अब उसका अगला लक्ष्य बीएमसी पर कब्जा करना है। ठाणे और डोंबिवली में शिवसेना की काफी मजबूत पकड़ है। पिछले चुनाव में एनसीपी ने नवी मुंबई में जीत दर्ज की थी। ऐसे में शिवसेना के विकल्प के तौर पर बीजेपी लोगों तक पहुंचेगी।
पिछले बीएमसी चुनाव के आंकड़े

साल 2017 में बीएमसी की लड़ाई में शिवसेना ने 84 और बीजेपी 82 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों ने एक-दूसरे को कांटे की टक्कर दी थी। शिवसेना के एक वरिष्ठ स्थानीय नेता ने कहा कि शिंदे की बाजीगरी का मुकाबला करने के लिए ठाकरे को जमीनी स्तर पर अधिक समय देना होगा। उद्धव ठाकरे को उन लोगों का विश्वास दोबारा हासिल करना होगा, जिन्होंने अब तक उनके पिता और उनके नेतृत्व में शिवसेना को वोट दिया था। उद्धव ठाकरे को मुंबई के शिवसैनिकों के दिल में उतरना होगा।
बता दें कि बीएमसी देश की सबसे ज्यादा बजट वाली नगर पालिका है। बीएमसी का कुल बजट 46 हजार करोड़ रुपए का है। शिक्षा का बजट बीएमसी अलग से पेश करती है। इस साल बीएमसी के बजट में 17 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। जिस तरह से एकनाथ शिंदे को बीजेपी ने महाराष्ट्र का नया मुख्यमंत्री बनाया है उसके पीछे बीएमसी और 2024 लोकसभा चुनाव को काफी अहम बताया जा रहा है।

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