Maha Corona: महाराष्ट्र में भूखे रहने के कगार पर लाखों बच्चे और महिलाएं...

बजट ( Budget ) में मंजूर 304 करोड़ की राशि अभी तक वित्त विभाग ( Finance Department ) की ओर से वितरित नहीं की गई, बजट में महत्वपूर्ण रूप से 304 करोड़ ( 304 crore ) रुपये का प्रावधान स्वीकृत है

By: Rohit Tiwari

Updated: 10 Apr 2020, 12:51 PM IST

रोहित के. तिवारी
मुंबई. महिला और बाल विकास विभाग की ओर से अगर कोई पोषण आहार नहीं दिया जाता है, तो आंगनवाड़ियों में लगभग 73 लाख बच्चों और चार लाख से अधिक स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती को अप्रैल में भूखे रहने की स्थितियों से गुजरना पड़ेगा। चौंकाने वाला मामला यह सामने आया है कि सरकार आंगनवाड़ी में बच्चों और महिलाओं को खाद्यान्न की व्यवस्था के लिए पिछले तीन महीनों से 304 करोड़ रुपए बचत समूह की आपूर्ति करने के लिए तैयार नहीं है। बजट में महत्वपूर्ण रूप से 304 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वीकृत है। वहीं वित्तीय वर्ष के 31 मार्च को समाप्त होने के बावजूद वित्त विभाग द्वारा अभी तक राशि वितरित नहीं की गई है। इससे अब यह सवाल उठ रहा है कि महिला और बाल विकास विभाग लाखों बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार कैसे दिया जाएगा।

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आंगनबाड़ियों में जांच सेवा...
राज्य में 97 हजार आंगनबाड़ी और 13 हजार मिनी आंगनबाड़ी हैं। इसमें छह साल तक के लगभग 73 लाख बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों की स्वास्थ्य जांच से लेकर पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक कई गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसके अलावा कई लाख गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की जांच आंगनबाड़ियों में की जाती है। इन बच्चों के साथ-साथ महिलाओं को महिला और बाल विकास विभाग के माध्यम से पोषण आहार भी दिया जाता है। उन्हें गेहूं का आटा, चावल, दालें, नमक, मिर्च पाउडर समेत तैयार भोजन के पैकेट दिए जाते हैं।

मंजूर की जा चुकी है वित्तीय राशि...
इसके अलावा तीन महीने से तीन साल तक के बच्चों को घर का बना खाना दिया जाता है। सरकार ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर लॉक डाउन की घोषणा की। राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए हैं। अब तक बचत समूह के माध्यम से आंगनवाड़ी में जनवरी, फरवरी और मार्च के खाद्यान्न बच्चों और महिलाओं को प्रदान किए गए हैं। राज्य में 40 हजार बचत समूहों के माध्यम से खाद्यान्न की आपूर्ति की जा रही है और इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 304 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। जबकि अभी हाल ही में विधिमंडल के बजट सत्र के दौरान यह वित्तीय राशि मंजूर भी की जा चुकी है।

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मंत्री का मुख्य सचिव को पत्र...
हालांकि वित्त विभाग से बार-बार मांग करने के बाद भी अभी तक धन उपलब्ध नहीं कराया गया। वहीं स्वीकृत 304 करोड़ रुपये में से 200 करोड़ रुपये वित्त विभाग द्वारा फाइल पर दिए गए हैं। हालांकि जारी राशि की अनुपलब्धता के कारण महिला और बाल विकास मंत्री यशोमति ठाकुर ने राज्य के मुख्य सचिव अजय मेहता को पत्र लिखकर धन के तत्काल भुगतान करने की मांग की। इस वर्ष वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त होने के साथ ही 304 करोड़ रुपये की तत्काल संवितरण की मांग की गई है।

तो रहना पड़ेगा भूखा...
यदि यह धनराशि प्राप्त नहीं होती है तो अप्रैल और मई में खाद्य आपूर्ति के लिए हमें धन कहां से मिलेगा, ऐसा सवाल बचत समूहों के प्रतिनिधियों द्वारा नाम न छापने की शर्त पर उठाया जा रहा है। महिला और बाल विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी आशंका व्यक्त की है कि आंगनवाड़ी में 73 लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इस मामले में पोषण आहार की कमी के लिए भूखा रहना पड़ेगा।

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जल्द करेंगे भुगतान...
अभी प्राथमिकता कोरोना वायरस की पृष्ठभूमि पर कुछ खर्च करने की है। वित्त विभाग के पास कई मुद्दे हैं। हालांकि हम जल्द ही आंगनवाड़ी में बच्चों के पोषण के लिए भुगतान करेंगे।
- मनोज सौनिक, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त

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