mumbai news : जल में किया योग

योग न तो कोई पंथ है ना कोई परंपरा यह तो विशुद्ध रूप से जीवन जीने की कला है । अधिक स्वस्थए अधिक स्फूर्त एवं अधिक ऊर्जावान जीवन जीने के लिए योग कीमियां टॉनिक है। नियमित योग करने से न केवल रोग करते हैं ।

By: Binod Pandey

Published: 22 Jun 2020, 02:47 PM IST

पुणे. योग न तो कोई पंथ है ना कोई परंपरा यह तो विशुद्ध रूप से जीवन जीने की कला है ।अधिक स्वस्थ, अधिक स्फूर्त एवं अधिक ऊर्जावान जीवन जीने के लिए योग कीमियां टॉनिक है। नियमित योग करने से न केवल रोग करते हैं बल्कि उन पर काफी हद तक नियंत्रण हो जाता है। जो व्यक्ति प्रतिदिन 20 मिनट योगासन, 10 मिनट प्राणायाम ,20 मिनट ध्यान और 10 मिनट प्रार्थना करता है वह तन मन और आत्मा तीनों से सदा दुरुस्त और तंदुरुस्त रहता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर लोनावला की एक तलैया पर एकत्र लोगो के बीच यह विचार व्यक्त किए । योगाचार्य रमेशसिंह व्यास ने इस अवसर पर जल योग की विभिन्न मुद्राओं से हर किसी को आकर्षित किया। उन्होंने सहजता के साथ पानी में कइ योगासन किये। उन्हें जल योग करते देखकर लोग भी हैरान रह गये। उनका दावा है कि वह लगातार कई घंटों जल में कई प्रकार से योगासन कर सकते हैं ।उन्होंने विश्व योग दिवस पर जल योग कर लोगों को योग के प्रति जागरूक किया ओर 1 घंटे तक अपने दोनों हाथों एवं अपने माथे की ललाट पर जलते हुए दिए लेकर जल योग किया।

जल योग एक तपस्या
व्यास बताते हैं जल योग एक तपस्या है। इसे सीखने के लिए योग और तेरना दोनों आना बहुत जरूरी है। वे अपनी इस विधा से अब तक कई लोगों को पानी में डूबने से भी बचा चुके हैं ।पानी में रिकॉर्ड अवधि तक शीर्षासन भी कर लेते हैं। जल योग करने के पश्चात व्यास ने योग के विभिन्न प्रयोग करवाते हुए तालवादन, तलवा घिसना, खूब खुलकर हंसने की तीन अलग-अलग थेरेपी सिखाई और कहा कि जो 1 मिनट तक पूरी ताकत से ताली बजाता है उसके पूरे शरीर का एक्यूप्रेशर हो जाता है। दोनों तलवों को 30-30 बार रगडऩे से ऊर्जा जागृत होती है, एवं चेहरे पर चमक आ जाती है। एक मिनट तक खुलकर हंसते मुस्कुराने से दिमाग की सारी चिंताएं और तनाव दूर हो जाते हैं।

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