Mumbai News : पुणे की हिन्दू महिला के नाम से बनी मस्जिद-ए-मुबारक बेगम !

  • मुबारक बेगम मस्जिद का गुंबद गिरा तो इतिहास की कई परतें खुलकर सामने आ गईं
  • मुगलों और अंग्रेजों दोनों के बीच बनाई अपनी पहचान
  • महिला की याद मे निर्माण दुर्लभ

By: Binod Pandey

Published: 24 Jul 2020, 12:55 PM IST

ओमसिंह राजपुरोहित

पुणे. दिल्ली में बीते सप्ताह मुबारक बेगम मस्जिद का गुंबद गिरा तो इतिहास की कई परतें खुलकर सामने आ गईं। महाराष्ट्र के पुणे से इसकी जड़ें जुड़ीं और सामने आया कि मस्जिद जिनके नाम से बनी, वे मराठा महिला थीं। हिन्दू महिला के नाम से मस्जिद का इतिहास भले चौंकाने वाला है, पर दिल्ली के चावड़ी बाज़ार की संकरी गलियों में इसके सारे प्रमाण मौजूद हैं।

अब तक स्पष्ट नहीं

वर्ष 1823 में बनी मस्जिद के बारे में यह स्पष्ट नहीं है कि इसे मुबारक़ बेग़म ने बनवाया था या उनकी याद में मस्जिद का निर्माण हुआ था। हालांकि मस्जिद के मौलवी जफर मसान ने दावा किया कि मस्जिद खुद मुबारक़ बेग़म ने बनवाई थीं और वे अच्छी इंसान थीं।


लाल ईटों से निर्माण

उल्लेखनीय है कि गत दिनों दिल्ली में हुई भारी बारिश के बाद इस मस्जिद का गुंबद ढह गया । लाल ईंटों से बनीं यह मस्जिद हौज़ काज़ी चौक में स्थित है और 19वीं सदी तक इसे प्रोस्टीट्यूट की मस्जिद के नाम से भी जाना जाता था। इतिहास को जानने-समझने वालों को ही इसके बारे में जानकारी है, बाकी सब मुबारक़ बेग़म की मस्जिद के नाम से जानते हैं।

हस्तियों को मिलता था अवसर

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अनिरुद्ध देशपांडे ने बताया कि ऐसा दुर्लभ होता है कि महिला की याद में मस्जिद बनवाई गई हो। उस वक्त बादशाह, उनकी बेगमों या राजसी घराने के लोग ही मस्जिदों को निर्माण करवाते थे।इससे स्पष्ट है कि मुबारक बेगम भी उस समय हस्ती रही होंगी। भले उनका नाम मुबारक़ था, लेकिन मूल रूप से हिंदू थीं और पुणे के मराठी परिवार से संबंध रखती थीं।

इतिहास के पन्नों में


लेखक जिया उस सलाम ने अपनी किताब 'विमिन इन मस्जिद' में मुबारक बेगम के बारे में लिखा। उन्होंने बताया कि पुणे से एक लड़की दिल्ली आई और मुगलों के बीच अपनी पहचान बनाई। मुबारक़ का पूरा नाम बीबी महरातुन मुबारक़-उल-निसा-बेग़म था। उनकी शादी पहले ब्रिटिश रेजिडेंट जनरल डेविड ऑक्टरलॉनी के साथ हुई। कुछ इतिहासकारों की मानें तो वे डेविड की कई पत्नियों में एक थीं। दिल्ली का सबसे बड़ा और अंतिम मुशायरा भी मुबारक़ बेग़म के महल में आयोजित हुआ था। मुशायरे में 40 शाइर शरीक हुए थे और जिनमें मिर्ज़ा ग़ालिब तक शामिल थे।

मस्जिद निर्माण के दो सौ साल

मौलवी जफर मसान ने बताया कि मस्जिद के गेट पर मुबारक़ बेग़म की प्लेट लगी है। मस्जिद दो मंजिला है। पहली मंजिल पर नमाज के लिए हॉल है। कुल तीन गुंबद हैं, इनमें से एक हाल में गिर गया। बाकी निर्माण बेहद सशक्त है। अगले कुछ सालों में इसे बने हुए 200 साल हो जाएंगे।

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