Mumbai News : मुंबई की ओर बढ़ रहा पीएम मोदी के सपनों का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट!

  • प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल चुकी है महाविकास आघाडी सरकार
  • उद्धव ठाकरे बता चुके हैं सफेद हाथी
  • प्रभावितों के पुनवर्सन और जमीन अधिग्रहण की तैयारी

By: Binod Pandey

Published: 24 Jul 2020, 01:39 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. सत्ताधारी महाविकास आघााडी सरकार के रेड सिग्नल के बावजूद अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आर्थिक राजधानी मुंबई की तरफ बढ़ता दिख रहा है। गुजरात से सटे पालघर जिला प्रशासन की तैयारियों से तो कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण और मार्ग में आने वाले घरों के पुनवर्सन की प्रक्रिया शुरू की गई है। सूत्रों ने बताया कि जिला प्रशासन की पहल हाई-स्पीड रेल कॉरीडोर के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी है।

महाविकास आघाडी में शामिल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं। पिछले साल नवंबर में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को सफेद हाथी करार दे चुके हैं। विदित हो कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना है। कुल 530 किमी लंबे बुलेट ट्रेन के मार्ग का 155.76 किमी हिस्सा महाराष्ट्र में है। 1.10 लाख करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य में कुल 1,400 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत है। पालघर के डहाणू-तलासरी क्षेत्र में 273.79 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जानी है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भी हाई स्पीड रेल कॉरीडोर का हिस्सा है। पालघर में 2,177 परिवार इस प्रोजेक्ट से प्रभावित होंगे। जिला प्रशासन ने इन परिवारों के पुनर्वसन का मसौदा तैयार कर लिया है। पिछले साल अगस्त में जमीन अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। साल भर के भीतर पुनवर्सन और सेटलमेंट का मसौदा तैयार करना जरूरी था, जो लगभग पूरा हो गया है। जिला प्रशासन ने कहा कि प्रोजेक्ट पर कोई रोक नहीं है। हम नियमानुसार काम कर रहे हैं।

सांसद-विधायकों ने जताया विरोध
जमीन अधिग्रहण, प्रोजेक्ट प्रभावितों के पुनवर्सन और रीसेटलमेंट का जिम्मा जिलाधिकारी के नेतृत्व वाली समिति संभाल रही है। इसमें सांसद, पांच विधायक और प्रभावित गांवों के 33 सरपंच शामिल हैं। पांच जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। सूत्रों के अनुसार 13 जुलाई को जनप्रतिनिधियों से जिलाधिकारी ने वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की। कोरोना संकट का हवाला देते हुए सांसद और विधायकों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध किया।
...तो जमीन नहीं बचेगी
शिवसेना सांसद राजेंद्र गावित ने कहा कि हाइवे, रेलवे, बुलेट ट्रेन सहित कई प्रोजेक्ट पालघर से गुजर रहे हैं। किसान भ्रमित हैं कि इन प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण के बाद उनके लिए जमीन बचेगी या नहीं। इसीलिए स्थानीय लोग प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं। हम जनता के साथ खड़े हैं।

2,177 परिवार होंगे प्रभावित
प्रशासन ने पुनर्वास और रीसेटलमेंट का जो मसौदा तैयार किया है, उसके मुताबिक जिले में 2,177 परिवार प्रभावित होंगे। इनमें 453 परिवारों के पास अपना मकान है। 1724 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास अपना घर नहीं है। इनमें 1,876 परिवार वसई तहसील, 169 पालघर, 87 डहाणू और 45 तलासरी में हैं।

प्रभावितों को दो विकल्प
मसौदे के मुताबिक प्रभावित परिवारों को दो विकल्प मिलेंगे। जो भी घर प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे, उन्हें उसकी दोगुना और जमीन के भाव की पांच गुना कीमत मिलेगी। तैयार संपत्ति के बदले भी लोगों को वाजिब मुआवजा मिलेगा।

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