scriptपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में बरी किए गए दोषी संथन की मौत, अस्पताल में ली अंतिम सांस | acquitted convict santhan passes away in chennai former prime minister rajiv gandhi assassination case | Patrika News

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में बरी किए गए दोषी संथन की मौत, अस्पताल में ली अंतिम सांस

locationनई दिल्लीPublished: Feb 28, 2024 09:47:31 am

Submitted by:

Paritosh Shahi

Rajiv Gandhi Assassination News: चेन्नई के राजीव गांधी अस्पताल में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में बरी किए गए दोषी एमटी संथन उर्फ टी सुथेंथिरराज का निधन हो गया।

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Rajiv Gandhi Assassination News: तमिलनाडु के चेन्नई स्थित राजीव गांधी जनरल अस्पताल में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में बरी किए गए दोषी संथन का निधन हो गया। एमटी संथन उर्फ टी सुथेंथिरराज जो श्रीलंकाई नागरिक था उसको पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। संथन ने 2022 में रिहाई के आदेश के बाद घर वापसी की अपील करते हुए एक पत्र लिखा था।


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दरअसल, सर्वोच्च न्यायलय ने 2022 में 11 नवंबर को पूर्व पीएम राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 6 दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था। आदेश जारी होने के अगले दिन हत्याकांड में दोषी पाए गए नलिनी, श्रीहरन, संथन, रॉबर्ड पायस, जयकुमार और रविचंद्रन को 32 साल बाद जेल से रिहा किया गया था।


सभी रिहा तो हो गए लेकिन एक पेंच फंस गया। नलिनी और रविचंद्रन को अपने परिवार के पास मिलने की अनुमति दी गई लेकिन बाकी चार को त्रीची सेंट्रल जेल के स्पेशल कैंप में रख दिया गया। इस निर्णय के पीछे कारण यह था कि ये चारों ( श्रीहरन, संथन, रॉबर्ड पायस, जयकुमार ) श्रीलंकाई नागरिक थे।


कुछ दिन पहले ही संथन ने त्रीची जेल के स्पेशल कैंप में मौजूद अपने सेल से खुला पत्र लिखा था। संथन ने इस पत्र में कहा था कि वह धूप तक नहीं देख पाता है। उसने इस पत्र के जरिए दुनिया भर के तमिलों से आवाज उठाने की अपील की ताकि वह अपने देश लौट सके।

 

राजीव हत्या मामले के दोषियों को मौत की सज़ा दी गई थी, लेकिन बाद में इसे उम्रकैद में बदल दिया गया। इसके बाद बाद लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शीर्ष अदालत ने इन सभी को रिहा कर दिया था। संथन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से उबरने के बाद त्रिचि शरणार्थी शिविर में रह रहा था और अपनी मां से मिलने के लिए श्रीलंका जाने की योजना बना रहा था और वहां की सरकार ने भी उसे यात्रा के लिए मंजूरी दे दी थी। लेकिन, उसकी यह इच्छा अधूरी रह गई।

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