ठाणे में धूमधाम से चल रही है गणगौर की पूजा

अमावस्या के दिन होगी ईशरजी और गणगौर की विदाई

By: Chandra Prakash sain

Published: 04 Apr 2019, 10:20 PM IST


ठाणे.

होली के दूसरे दिन से गणगौर पूजन की शुरूआत हो जाती है। मिट्टी से सुंदर गणगौर अपने हाथों से बनाकर श्रद्धा पूर्वक महिलाएं लगातार 15 दिन तक पूजा अर्चना करती है। यह परंपरा सालों से राजस्थान से शुरू हुई और आज समूचे देश भर में जहां राजस्थानी समाज के लोग रहते है वहां एकत्रित होकर इस धार्मिक अनुष्ठान के रस्म को धूमधाम से मनाते हैं। ठाणे शहर के कोलशेत परिसर में 1963 से गणगौर के पूजन की शुरुआत हुई और 1979 से शारदा शर्मा के अगुवाई में यह बड़े पैमाने पर पूजा अर्चना की शुरुआत हो गई। इसमें महिलाएं पहले दिन और अंतिम दिन उपवास रखती है। ईशर जी और गणगौर की विदाई अमावस्या के दिन नदी या तालाबों में की जाती है। इस दौरान महिलाएं जिस तरह अपनी लड़की की विदाई के दौरान रो पड़ती है उसी तरह गणगौर की विदाई में भी रोने लगती है।
हर दिन तीजणियां बनौरा का आयोजन करती है और यह बारी-बारी से सबके यहां किया जाता है। तीजणियों के लिए होशियार शर्मा के घर पर धूमधाम से स्वादिष्ट व्यंजन की तैयारी की गई थी, वहां सभी तीजणियां एकत्रित होकर नाच गाकर पूजा अर्चना की। इसमें किरण वर्मा, शारदा, प्रेमा, संतोष सैनी, सुनीता, संगीता आदि उपस्थित रहीं।

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