धार्मिक आस्था से लोक सेवा और संस्कार की सुगंध फैलाने में जुटे

सीकर के जीण ग्राम में स्थित श्री जीणमाता का मंदिर आस्था का बड़ा केन्द्र

By: Devkumar Singodiya

Updated: 04 Apr 2019, 05:48 PM IST

मीरा भायंदर. प्रवासी समाज में श्री जीणमाता के प्रति अटूट आस्था ने मुंबई में माता के श्रद्धालुओंको बड़ा संगठन तैयार कर दिया। फिर शुरू हो गया लोक सेवा और संस्कार की सुगंध फैलाने का दौर। जरूरतमंदों के काम आने से लेकर नई पीढ़ी को सुसंकारित करने का बीड़ा उठाया जो भली-भांति पूरा कर रहे हैं।
मुंबई मायानगरी में सेवा भावना और राजस्थानी संस्कार की गंगा बहाने के कार्य को श्री जीणमाता प्रचार मंडल बखूबी अंजाम दे रहा है। वर्ष 2010 में मुंबई मायानगरी में रह रहे प्रवासियों को एकमंच पर लाने और रीतिरिवाज में बांधे रखने के लिए श्री जीणमाता प्रचार मंडल की स्थापना की गई और आज यह मंडल मुंबई शहर में आदर्श मंडल बना हुआ है। जीणमाता और राजस्थानियों का नाता ऐसा है जैसा बेटे का अपनी मां के साथ होता है। जीणमाता राजस्थान की कुल देवी हैं, इनको सभी पूजते हैं। राजस्थान के सीकर में जीण ग्राम में स्थित श्री जीणमाता मंदिर के प्रति राजस्थानी समुदाय के लोगों में अगाध आस्था है इसी आस्था को मुंबई मायानगरी में बढ़ाने का कार्य जीणमाता प्रचार मंडल कर रहा है।

मन्नतों को पूरा करने वाली हैं जीणमाता

जीणमाता मन्नतों को पूरा करने वाली देवी मानी जाती हैं, इसलिए राजस्थान में इनकी पूजा का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि में राजस्थान के सभी जीणमाता मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यह बड़े मेले का स्वरूप ले लेता है। मंडल के ट्रस्टी एवं अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता के अनुसार जीणभक्तों को कुल देवी के दर्शन मुंबई में ही मिल सके, माता श्री जीणमाता की महिमा का प्रचार -प्रसार यहां हो, इसी दृढ संकल्पों के साथ यहां मंदिर के निर्माण की योजना बनाई गई। इसके लिए उन्होंने विजय डोकानियां और नंदू अग्रवाल के साथ मिलकर इस पावन कार्य से समाज के लोगों को एकजुट करने की मंशा कर वर्ष 2010 के जनवरी में श्री जीणमाता प्रचार मंडल-मुंबई (पंजीकृत) संस्था का गठन किया। संस्था के अस्तित्व में आने के साथ ही समाज के लोगों का भी सहयोग मिलना शुरू हो गया। जून, वर्ष 2011 में साई दर्शन परिसर, एसवी रोड, मालाड पश्चिम में श्री जीणमाता मंदिर की विधिवत स्थापना की संकल्पना पूरी हो गई। ज्योतिषाचार्य पं. डॉ केदार शर्मा के सानिध्य में समारोहपूर्वक मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

मलाड में है माता का मंदिर

मलाड में बना जीणमाता का मंदिर आज राजस्थानी समाज की आस्था के केन्द्र है। यहां दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या में इजाफा होते जा रहा है। मंदिर अब पूरी तरह चांदी जडि़त हो चुका है। चैत्र नवरात्र में नौ दिन यहां भक्तों का मेला लगा रहता है और पूरे नौ दिन सतत अखंड श्री जीणचरित मंगल पाठ, अखंड ज्योत, प्रसाद वितरण और 108 कन्या पूजन किया जाता है। महिला सदस्यों ने मंगला पुरोहित के नेतृत्व में श्री जीणचरित मंगल पाठ की कमान संभाल रखी है, इस मंदिर में हर महीने के शुक्लपक्ष की अष्टमी को मंदिर में मंगल पाठ, अखंड ज्योत, भजनों और प्रसाद वितरण का आयोजन होते रहता है। इसके अलावा भायंदर सप्तेश्वर सालासर बालाजी मंदिर प्रांगण में जीणमाता का मंदिर अभी हाल ही में बना है यहां भी भक्तों का तांता लगा रहता है।

चैत्र नवरात्रि की धूम

चैत्र की नवरात्रि में संस्था का वार्षिकोत्सव और जून महीने में मंदिर का स्थापना दिवस धूमधामपूर्वक मनाया जाता है। 31 दिसंबर को नववर्ष की पूर्व संध्या पर मंदिर में वर्षानुरूप फलों का शृंगार और भजन संध्या का आयोजन कर भारतीय संस्कृति का अनुकरण किया जाता है, 31 दिसंबर को मुंबईया युवा पश्चिमी संस्कृति में बहता है जिसे संस्था गलत मानती है। यह देश और समाज दोनों के लिए सही नहीं है, संस्था के सदस्य 31 दिसंबर को मंदिर में सपरिवार आते हैं, ताकि युवा पीढ़ी रीतिरिवाज और संस्कार सीख सके।

Devkumar Singodiya Desk
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