प्रतिभा ने दिखाई सबसे ज्यादा ‘मर्सी’

प्रतिभा ने दिखाई सबसे ज्यादा ‘मर्सी’
दया याचिकाओं से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का मामला

Nitin Bhal | Publish: May, 20 2019 06:24:41 PM (IST) Mumbai, Mumbai, Maharashtra, India

आरटीआइ: दया याचिकाओं से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का मामला, राष्ट्रपति कोविंद ने ठुकराई एकमात्र याचिका

 

मुुंबई

सुप्रीम कोर्ट की ओर से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, राष्ट्रपति के पास दायर की गई दया याचिका यानी मर्सी पीटिशन में सबसे ज्यादा फांसी की सजा को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल के दौरान उम्र कैद में बदला गया है। आरटीआइ से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1981 से लेकर अभी तक सबसे ज्यादा दया याचिकाओं को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल 2007 से लेकर साल 2012 तक के बीच में उम्र कैद में बदल दिया गया। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने अपने कार्यकाल के दौरान कुल 22 दया याचिकाओं पर फैसला लिया। 22 दया याचिकाओं में से उन्होंने 19 दया याचिकाओं को उम्र कैद में बदल दिया और तीन दया याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभी तक के कार्यकाल के दौरान एक ही दया याचिका पर फैसला लिया है और उन्होंने उस याचिका को खारिज कर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान 2012 से 2017 तक 35 दया याचिकाओं पर फैसला लिया। इनमें से उन्होंने 31 दया याचिकाओं को खारिज कर दिया और 4 दया याचिका को उम्र कैद में बदल दिया। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने कार्यकाल के दौरान 2002 से 2007 के बीच सिर्फ दो दया याचिकाओं पर फैसला लिया। जिनमें से उन्होंने एक को रिजेक्ट कर दिया और एक की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान 1982 से 1987 तक में 22 दया याचिकाओं पर फैसला लिया, इसमें 19 दया याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया और तीन की फांसी को उम्र कैद में बदल दिया।

शर्मा ने नकारी सभी याचिकाएं

पूर्व राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकेटरमन ने अपने कार्यकाल के दौरान 1987 से लेकर 1992 तक कुल 39 याचिकाओं पर फैसला लिया। जिनमें से उन्होंने 6 याचिकाओं को उम्रकैद में बदल दिया तो वहीं, 33 याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया। पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान 1992 से लेकर 1997 तक कुल 12 याचिकाओं पर फैसला लिया और सभी को उन्होंने रिजेक्ट कर दिया।


खारिज हुईं थी याकूब और अफजल की याचिकाएं

1993 में मुंबई में हुए बम ब्लास्ट का आरोपी याकूब मेनन ने दो बार दया याचिका दायर की थी। 2 जनवरी 2014 और 26 जुलाई 2015 को याकूब मेनन ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दी थी। दोनों ही बार राष्ट्रपति ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। याकूब मेनन की दूसरी दया याचिका पर सबसे जल्दी यानी की सिर्फ 3 दिन में ही फैसला लिया गया, 26 जुलाई 2015 को उसे अपनी दूसरी दया याचिका राष्ट्रपति के सामने दी और 29 जुलाई को राष्ट्रपति ने उसे रिजेक्ट कर दिया। संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु ने 3 अक्टूबर 2006 के दिन राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की थी जिसका फैसला 3 फरवरी 2013 को लिया गया और उसकी फांसी की सजा को जारी रखा गया।

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