डॉक्टर तुम्हें सलाम, तुम्हारे काम को नमन

  • डॉक्टरों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था अस्पताल में ही की गई है
  • लाचार लोगों को देख 24 घंटे जुटे हैं डॉक्टर

पत्रिका टीम
मुंबई. कहते हैं कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, इन दिनों मुंबई में भगवान अपने भक्तों की सेवा में 24 घंटे जुटे नजर आ रहे हैं। वे इस काम में इस कदर मग्न हैं कि न उन्हें अपने खान-पान का ख्याल है, न परिवार का और न ही अपने जीवन पर संभावित खतरे का। मुंबई सहित पूरे राज्य में कोरोना वायरस को लेकर लोगों में भय का माहौल है। भय के इस माहौल में लोग जिसकी तरफ आशा से देख रहे हैं, वे हैं डॉक्टर। पत्रिका टीम ने लोगों की सेवा में लीन डॉक्टरों के जीवन में झांकने का प्रयास किया...

डॉक्टरों के कठिन जीवन और दिन चर्या के बारे में पत्रिका ने मनपा की उप स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.दशा शाह से बातचीत की। शाह ने बताया कि कोरोना के कारण डॉक्टरों का काम बढ़ गया है। पहले वे टाइम-टाइम से मरीजों को देखते थे। अगर कोई सीरियस मरीज होता था, तो उस पर ध्यान देते थे।

 

डॉक्टर तुम्हें सलाम, तुम्हारे काम को नमन

वह भी बिना किसी परेशानी के। पर कोरोना के मरीज के कारण डॉक्टरों को हरदम अलर्ट रहना पड़ रहा है। इनका तो जीवन ही बदल गया है। यह सच है कि डॉक्टरों को कोई परेशानी नहीं है, पर लाचार लोगों को देख डॉक्टर सब कुछ भूले हुए हैं। उन्हें लोगों को ठीक करने की धुन है।

बढ़ रहे मरीजों के कारण काम का दवाब अधिक है। मरीजों की स्थिति पर हमेशा नजर रखनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भी आम इंसान हैं, उनके घर परिवार का माहौल भी हमारे आपके घर परिवार के जैसा ही है। पर संक्रमण को देखते हुए अधिकतर डॉक्टरों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था अस्पताल में ही की गई है।

दक्षा शाह ने बताया की कोरोना पीड़ित व्यक्ति का इलाज करना एक चुनौती है। मरीज इस बात को समझ रहे हैं और डॉक्टरों को पूरा सहयोग दे रहें हैं। मुंबई के अस्पतालों में इलाज के लिए संसाधन की कमी नहीं है। मनपा के साथ साथ कई निजी अस्पतालों और लैब में जांच और बेड की सुविधा है।

सरकार की ओर से सभी सहायता तेजी से मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमारे पास डॉक्टरों की कमी नहीं है। इस समय डॉक्टर घंटे नहीं देख रहे हैं। सूत्रों की माने तो डॉक्टर 14 से 15 घंटे काम कर रहे हैं। इसके लिए उन पर कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है, पर वे खुद लोगों की मदद करना चाहते हैं।

डॉक्टर्स संभाल रहे है मोर्चा, परिवार को गर्व

डॉक्टर तुम्हें सलाम, तुम्हारे काम को नमन

मुंबई. सायन अस्पताल की सेवानिवृत्त वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर पत्रिका को बताया कि कोविड़19 के पीड़ितों के इलाज में डॉक्टर्स मोर्चा संभाले हुए हैं। उनके सेवा कार्य से डॉक्टरर्स के परिवार को गर्व है, लेकिन साथ ही चिंता भी है। उन्होंने बताया कि मेरे बहुत से परिचित डॉक्टर इस सेवा कार्य में लगे हुए हैं।

डॉक्टर्स को इन दिनों ट्रैवल करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ड्यूटी के दौरान कई डॉक्टर्स ठाणे, बेलापुर और कई डॉक्टर मुंबई के बाहर से ट्रेवल कर पहुंचते हैं। वर्क लोड बढने से मानसिक दबाव भी बढ़ा है। डॉक्टर्स अपने परिवार को बिल्कुल भी समय नहीं दे पा रहे हैं। परिवार उनकी मजबूरी समझता है, पर डर तो सभी को लगता है। डॉक्टर अपने परिवार से भी अलग रह रहे हैं। बहुत से डॉक्टर अस्पताल में ही रह रहे हैं। मरीजों के इलाज के दौरान संक्रमण फैलने का डर भी रहता है।

डॉक्टर्स को स्वयं के लिए डर नहीं है, लेकिन घर में रह रहे बच्चों और परिजनों में उनकी वजह से संक्रमण न फैले इसकी चिंता रहती है। कुछ क्वारेंटाइन संदिग्धों ने डॉक्टर्स के आदेशों को उलंघन किया, लेकिन पीड़ित इलाज में सहयोग कर रहे है।

विषम परिस्थितियों में भी वरिष्ठ चिकित्सक यह ध्यान रखते हैं कि काम का प्रेशर ना हो लेकिन फिर भी हालात के अनुसार काम करना ही होता है। डॉक्टर्स अपने बढ़े हुए काम से बिल्कुल परेशान नहीं हैं, इस जंग में कोरोना को हराना ही उनका मकसद है।

अस्पताल में आ रहे स्टॉफ को परेशानी
ठाणे। जिला शल्य चिकित्सक डॉ.कैलाश पवार ने पत्रिका को बताया कि 21 दिनों के बंद के कारण अस्पताल के चिकित्सक, नर्स और कर्मचारियों को आने जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में बदलापुर, अंबरनाथ, शाहपुर, भिवंडी से नर्स के परिजन छोड़कर जाते हैं, तो उन्हें आईडी प्रूफ न होने के कारण पुलिस के डंडे खाने पड़ते हैं।

इस समय हम लोगों का जीवन बार्डर पर युद्ध करने वाले सैनिकों सा हो गया है। घर से निकलते समय परिवार के लोग मना करते हैं लेकिन हमारा फर्ज है सेवा करना। इस समय डॉक्टर, नर्स और कर्मचारियों की टीम 24 घंटे अस्पताल में उपलब्ध है। इस समय आर. एमओ डॉ. अशोक कांबले, डॉ मुलिक, डॉ देशमुख, डॉ रोकड़े, डॉ माधवी, डॉ अर्चना पवार, मेडिकल फार्मासिस सुभाष पवार, सीमा इंदुलकर अस्पताल में आने वाले मरीजों की देख-रेख कर रहे हैं।

संकट की घड़ी में हम कर भी क्या सकते हैं
उल्हासनगर. इस बारे में उल्हासनगर मनपा के नवनियुक्त स्वास्थ्य अधिकारी सुहास मोहनलकर से बात की तो उन्होंने कहा कि हम डॉक्टरों का हर तरह से ख्याल रख रहे हैं। हमारे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ पूरी लगन से कार्य कर रहे हैं। उल्हासनगर मनपा के सेवानिवृत्त डॉक्टर स्वास्थ्य अधिकारी राजा रिजवानी ने कहा कि हम 24 घंटे महानगर पालिका में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जो हमारे केंद्र है उनसे भी लोगों को सुविधा मुहैया कराई जा रही है ताकि लोगों को किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े। यह संकट की घड़ी है जीवन थोड़ा कठिन तो हो ही जाता है।

मुंबई. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे कहा कि यह संकट की घड़ी है। हमारे डॉक्टर, नर्स और पुलिस प्रशासन आदि पूरे जी जान से जुटे हुए हैं। अस्पताल में डॉक्टरों का काम सराहनीय है। हम उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने सिस्टम बनाकर काम शुरू किया है। यह सच है कि काम बढ़ने से डॉक्टरों पर काफी दबाव भी है, लेकिन यह युद्ध है और आज वे सभी देश की सेवा में जंग के मैदान में हैं। जनता के लिए वे सदैव भगवान रहे हैं आज भी हैं।

किसी को घर नहीं जाना
पुणे. पुणे के नायडू सरकारी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत डॉ शिवप्रसाद नायडू ने पत्रिका को बताया कि हमारे अस्पताल में सर्वप्रथम विदेश से लौटे पुणे के एक दंपति संक्रमित पाए गए थे। उन्हें यहां विशेष व्यवस्था से रखा गया उसके बाद अन्य मरीजों का तांता लग गया।

कुछ संक्रमित रोगी प्रारंभ में बुहुत डरे हुए थे। हमारे डॉक्टरों ने उन्हें पॉजिटिव रहने की सीख दी, जिसका परिणाम अच्छा आया। उन्होंने बताया कि शुरू में तो उनके परिजन भी उनसे परहेज करने लगे, लेकिन अब अस्पताल सभी सुविधाओं से परिपूर्ण हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान हमारे डॉक्टरों ने सारी बातें बगल में रखकर मरीजों के इलाज में खुद को झोंक दिया। कहीं किसी को कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी हर किसी ने अपनी जिम्मेदारी से ज्यादा काम करना शुरू किया। किसी को घर जाने की भोजन की परवाह नहीं है। हमारे लोग न केवल कोरोना से लड़ रहे हैं, बल्कि हमें लोगों में ब्याप्त करोना के भय से भी लड़ना पड़ रहा है।

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Arun lal Yadav Reporting
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