मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा, रस्साकशी जारी है

मंत्रियों ( Ministers ) को विभागों ( Departments ) के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा, रस्साकसी जारी है, कृषि ( Agriculture ) और उद्योग ( Industry ) या परिवहन ( Transportation ) मंत्रालय की मांग ने उलझाया, घंटों चल रही हैं बैठकें

By: Rohit Tiwari

Updated: 03 Jan 2020, 05:00 PM IST

मुंबई. उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्रियों के विभाग लगभग तय हो गए हैं। इसके बाद भी विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। कांग्रेस नेता व उद्धव सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण से लेकर एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार तक दावा कर रहे हैं कि मंत्रालय के विभागों को लेकर सारी समस्या हल कर ली गई है। इसके बाद भी जिले के प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर पेच फंसा हुआ है, जिसकी वजह से गाड़ी अटकी हुई है। उद्धव सरकार में शामिल कांग्रेस ने कृषि और उद्योग या परिवहन मंत्रालय की मांग रखकर मामले को उलझा दिया था। विभागों के बंटवारे पर मारामारी अभी थमी भी नहीं थी कि कांग्रेस ने विभिन्न जिलों केे बनाए जा रहे प्रभारी मंत्रियों को लेकर अपनी मांगे रख मामले में टांग अड़ा दी है। कांग्रेस चाहती है कि उसके मजबूत गढ़ में उसके ही कोटे को मंत्रियों को जिला प्रभारी मंत्री बनाया जाए। इसे लेकर शिवेसना, कांग्रेस और एनसीपी नेताओं की गुरुवार को बैठक भी हुई है, जिसमें कई समस्या को सुलझा लेने का दावा किया गया है। एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी नेताओं की बैठक हुई है, इसमें गार्डियन मिनिस्टर ( जिला प्रभारी मंत्रियों) और विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चा हुई। हम 95 फीसदी मामलों पर एकमत है और हमने मुख्यमंत्री के ऊपर फैसला छोड़ दिया है. शुक्रवार को मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की घोषणा कर दी जाएगी। कांग्रेस नेता और मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि सभी मुद्दे हल कर लिए गए है, हमने कांग्रेस के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेज दिया है. इश्यू मंत्रियों के विभागों का था और जिले के प्रभारी मंत्रियो का था. इन विषयों का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा है, जिस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे. हालांकि साथ ही उन्होंने दावा किया है कि हमारे नाराज नेताओ को हम मना लेंगे. महाराष्ट्र में अब तीन दलों की सरकार है और हम मिलकर सारी समस्या का समाधान तलाश लेंगे। कांग्रेस के कोटे से कुल 12 मंत्री बनाए गए हैं, जिनमें पार्टी के चार वरिष्ठ नेता मंत्री बने हैं. कांग्रेस को विभाग बंटवारे में तीन ही महत्वपूर्ण विभाग मिल रहे हैं. पूर्व सीएम अशोक चव्हाण और बालासाहेब थोरात दोनों ने राजस्व विभाग के लिए दावा कर रहे हैं तो नितिन राउत ने लोक निर्माण विभाग पर अपना दावा ठोक दिया है।

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अजित और अशोक के बीच तू-तू मैं-मैं
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के दौरान अजित पवार और अशोक चव्हाण के बीच दो मंत्रालय-कृषि और ग्रामविकास को लेकर बहस हुई। अशोक चव्हाण ने इस मीटिंग में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कांग्रेस को दो मंत्रालय कृषि और ग्रामविकास को देने की मांग की. इस पर अजित पवार ने पृथ्वीराज चव्हाण का जिक्र किया. उनका नाम सुनते ही अशोक चव्हाण नाराज हो गए. अशोक चव्हाण ने कहा कथित तौर पर कहा कि मैं मंत्रीमंडल का हिस्सा हूं, राज्य का पूर्व मुख्यमंत्री रह चुका हूं और कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष भी था. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जो यहां मौजूद हैं। उनके बारे में और उनके साथ ही बातचीत करें। अशोक चव्हाण के इस जवाब पर अजित पवार ने कहा आप लोग पहले बाहर जाकर ये तय करें कि आपका नेता कौन हैं। अजित पवार ने कहा कि जिसका नाम आप बताएंगे उन्हीं से हम लोग बात करेंगे, लेकिन एक बात है कि पृथ्वीराज चव्हाण बड़े संयमी नेता है. अजित पवार की ये बात सुनकर अशोक चव्हाण बैठक से ग़ुस्से में निकल गए. इस प्रकार मंत्रालय बंटवारे को लेकर हुई ये बैठक बेनतीजा रही। बालासाहेब थोरात को पहले ही रेवेन्यू देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण भी इस मंत्रालय के लिए ज़ोरदार लॉबिंग कर रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच का ये संघर्ष कांग्रेस आलाकमान के लिए सिरदर्द बन गया है. अब कहा ये जा रहा है कि इस बात को सुलझाने के लिए कांग्रेस-शिवसेना से कृषि मंत्रालय मांगने जा रही है ताकि अशोक चव्हाण को कृषि मंत्रालय दिया जाए. लेकिन शिवसेना ये देने के लिए राज़ी नहीं है।

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26 जनवरी को महाराष्ट्र की झांकी की इजाजत नहीं
एनसीपी और शिवसेना ने मोदी सरकार पर गणतंत्र दिवस परेड के लिए महाराष्ट्र की झांकी की अनुमति नहीं देने के लिए निशाना साधा जहां एनसीपी ने इसे राज्य की जनता का अपमान बताया। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने दावा किया कि केंद्र ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए गैर-बीजेपी शासित महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उनकी झांकियों को अनुमति नहीं देना लोगों का 'अपमानÓ जैसा है। सुले ने ट्वीट किया, केंद्र ने गणतंत्र दिवस पर परेड के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है। यह देश का पर्व है और केंद्र से सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की उम्मीद है लेकिन सरकार पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार कर रही है और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों से सौतेला व्यवहार कर रही है। बारामती से सांसद सुले ने एक समाचार भी साझा किया जिसमें दावा किया गया है कि रक्षा मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस परेड (26 जनवरी) के लिए पश्चिम बंगाल की झांकी को अस्वीकार कर दिया है। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने एक चैनल से कहा, आपको बताना होगा कि दो राज्यों की झांकियों को मंजूरी क्यों नहीं दी गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को मामले की जांच करानी चाहिए। पता लगाना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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