डॉक्टर की कोशिश रंग लाई, बदला आदिवासियों का जीवन

राजस्थान के फिल्म महोत्सव में पुरस्कृत हैं

By: Devkumar Singodiya

Updated: 03 Mar 2019, 10:06 PM IST

मुंबई. मुंबई शहर के चकाचौंध से 63 किमी की दूरी पर पालघर जिले के तलासरी गांव में अधिकतर लोग अब ताड़ी से तौबा कर चुके हैं। इस गांव के हर घर का बच्चा अब रोज स्कूल जाने लगा है। बेरोजगार पुरुष व महिलाएं अब स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। तलासरी गांव में यह बदलाव डॉ. जतिन वालिया के अथक प्रयास को जाता है।


डॉ. वालिया एक दिन जुहू स्थित इस्कान मंदिर में दर्शन के लिए गए थे, किसी ने पास में आकर आदिवासियों के लिए चल रहे सामाजिक उपक्रम में सहायता करने की बात कही, उन्होंने अपनी तरफ से दवाएं उपलब्ध करा दी। कुछ दिन वे खुद तलासरी गांव गए, वहां के हालात देखकर उन्होंने तलासरी गांव को गोद ले लिया। मार्च 2012 में उनकी सामाजिक संस्था नंदलाल वालिया रिसर्च एंड चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से इस गांव में काम शुरू हुआ। डॉ. वालिया ने 30 हजार रोगियों का इलाज किया और 40 लाख रुपए से अधिक की सर्जरी नि:शुल्क करवाए।

ट्रस्ट में सक्रिय हैं यह
नंदलाल वालिया रिसर्च एंड चैरिटेबल ट्रस्ट में जयश्री वालिया, लोवा वालिया, कृष्णकांत चितलिया, सिद्धार्थ कौशिक, विशाल शर्मा, पूर्व हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै बतौर ट्रस्टी इस सामाजिक कार्य को गति प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. जतिन वालिया के इस सामाजिक कार्य पर अनंत महादेवन निर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्म विलेज ऑफ़ ए लेजर गॉड को जनवरी 2019 में राजस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र पुरस्कार मिल चुका है।

Devkumar Singodiya Desk
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