हजारों किलोमीटर सफर तय करके करावे गांव के पास खाड़ी में डाला बसेरा

हजारों किलोमीटर सफर तय करके करावे गांव के पास खाड़ी में डाला बसेरा

Binod Pandey | Updated: 14 Jun 2019, 01:44:41 PM (IST) Mumbai, Mumbai, Maharashtra, India

विदेशी मेहमान पहुंचे नवी मुंबई

विदेशी परिंदों का शिकार करने पर पाबंदी है

भारतीय उपमहाद्वीप पक्षियों के लिए बहुत अच्छी जगह है

नवी मुंबई. हजारों किलोमीटर का सफर तय करके प्रवासी पक्षियों ने नवी मुंबई की जमीं
को अपना बसेरा बना लिया है। परिंदे सरहद के मोहताज नहीं होते, उन्हें तो सिर्फ उडऩा आता है। सरहद की लकीरें और सियासी बंदिशों से दूर ए आजाद पंछी कहीं भी किसी भी मुल्क को अपना आशियाना बना लेते हैं। नवी मुंबई के करावे गांव के समीप टी.एस. चाणक्य के पीछे समुद्री खाड़ी में हजारों मील की यात्रा कर एशियाई देशों के खासकर साइबेरिया के साइबेरियन पक्षी हर साल की तरह इस बार भी पहुंचने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह से इन विदेशी मेहमानों का आगमन होते देखा जा रहा है। नेरुल स्थित करावे गांव के समीप टी. एस.चाणक्य के पिछे खाड़ी को अपना पसंदीदा स्थान मानकर अपना बसेरा डाल दिया है। इन पक्षियों के आगमन से जहां सुंदरता में चार चांद लग जाता है वहीं पक्षी प्रेमियों के लिए भी आकर्षक का केंद्र बने रहते हैं। जिस भी परिधी में जाते हैं वहाँ के लोग इन्हें निहारते रहते हैं। हजारों किलोमीटर का फासला तय करके महाराष्ट्र के नवी मुंबई शहर को अपना बसेरा बनाया, इनके पास ना कोई रोड मैप है ना तो यह गूगल पर सर्च कर सकते हैं, लेकिन उनकी अपनी समझ अपनी ज्ञान है कि वह प्रति वर्ष अपने मनचाहे स्थान पर बगैर किसी रोकटोक के पहुंच जाते हैं, और कुछ माह तक रुककर फिर अपने वतन लौट जाते हैं। इन विदेशी परिंदों का शिकार करने पर शख्त पाबंदी है। इन्हें मेहमान की तरह रखा जाता है और प्रशासन की तरफ से इनकी मेजबानी भी की जाती है।

प्रतिकूल मौसम में दाना-पानी और आश्रय की तलाश इन पंछियों को दूसरी जगह जाने को मजबूर कर देती हैं। भारतीय उपमहाद्वीप पक्षियों के लिए बहुत अच्छी जगह है। यहां खाने-पीने की कमी नहीं है। अपने इलाके को लेकर यह पक्षी संवेदनशील होते हैं। कहा जाता है कि भले ही वे करीब छ माह तक बाहर बिताते हैं, परंतु जब ये अपने वतन लौटते हैं तो वहीं पर अंडे देते हैं।
मनपा के पशु वैद्यकीय अधिकारी डॉ. वैभव झुंझारे ने बताया कि विदेशी पक्षियों को लेकर महानगर पालिका की तरफ से कोई प्रावधान नही बनाया गया है, फिर भी शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में खाड़ी के किनारे विदेशी पक्षियों की सुरक्षा एवं उनके लिए निर्देश बोर्ड के माध्यम से दिए गए हैं। जबकि खाड़ी का किनारा मैंग्रोव क्षेत्र सीआरजेड की हद में आता है, फिर भी अगर विदेशी पक्षी घायल या उनके बिमारी की सूचना हमे मिलती है तो हमारा कर्तव्य है कि हम उसका ट्रीटमेंट करके फॉरेस्ट विभाग को सौंप देते हैं। वैसे भी इनके लिए भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 और प्रवासी प्रजाति समझौते के तहत संरक्षित घोषित किया गया है।

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