मॉब लिंचिंग विरोधी कानून दो वर्ष से प्रलंबित क्यों है-सचिन सावंत

सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की खंडपीठ के कहने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से पिछले दो वर्षों से मॉब लिंचिंग के खिलाफ क़ानून नहीं बनाया गया है। जुलाई 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने मॉब लिचिंग का विरोध करते हुए केंद्र सरकार को इसके खिलाफ कानून बनाने का निर्देश दिया था।

By: Dheeraj Singh

Updated: 23 Apr 2020, 09:59 PM IST

 

मुंबई.सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की खंडपीठ के कहने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से पिछले दो वर्षों से मॉब लिंचिंग के खिलाफ क़ानून नहीं बनाया गया है। जुलाई 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने मॉब लिचिंग का विरोध करते हुए केंद्र सरकार को इसके खिलाफ कानून बनाने का निर्देश दिया था। साथ ही 11 दिशा निर्देश भी दिए थे। उसके बाद जुलाई 2019 में तत्कालीन मुख्य न्याधीश रंजन गोगोई की खंडपीठ ने मॉब लिचिंग मामले में केंद्र सरकार को नोटिस देकर पहले के निर्दशों के बारे में पूछा था। परंतु अभी तक केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया। इसलिए जल्द से जल्द मॉब लिंचिंग कानून बनाया जाए। यह मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रवक्ता सचिन सावंत ने कही।

सचिन सावंत ने कहा कि पालघर घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत की,पर दो वर्षों से केंद्र में सरकार होने के बावजूद मॉब लिचिंग के खिलाफ कानून क्यों नहीं बनाया गया? मॉब लिंचिंग की घटना अन्य राज्यों में हुई,वह घटनाएं निंदनीय थी। पर उस समय भाजपा के किसी नेता ने इतनी तत्परता नहीं दिखाई। बल्कि भाजपा ने ऐसी घटना से जुड़े लोगों का सत्कार किया। इससे उनकी मानसिकता पता चलती है।

सावंत ने कहा कि जिस गडचिंचले गांव में तीन लोगों की हत्या हुई है,उस गांव में 10 वर्ष से भाजपा की सत्ता है। चित्रा चौधरी वहां की सरपंच हैं। बहुसंख्य आरोपी भाजपा के हैं। इससे संबंधित कागजात और फोटो उपलब्ध कराया गया है। भाजपा डहाणू मंडल के अधिकृत फेसबुक प्रोफ़ाइल पर गडचिंचले गांव के बूथ पदाधिकारियों की सूची दी गई है। उसमें से पहले दो पदाधिकारी ईश्वर निकोले और भाऊ साठे गृहमंत्री अनिल देशमुख की ओर से घोषित पालघर के आरोपियों की लिस्ट में 61 और 65 क्रमांक के आरोपी हैं।

गडचिंचले गांव में तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाने का काम सुराज्य पर्व कार्यक्रम के माध्यम से किया गया था। उस कार्यक्रम में भाजपा की सरपंच चित्रा चौधरी, भाजपा मंडल अध्यक्षा संगिता कोटेला, हडाणू पंचायत समिति के तत्कालीन सभापति रामा ठाकरे भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में जिसका सत्कार किया गया था वह ईश्वर निकोले भी पालघर मामले के आरोपियों की सूची में है। इसके अलावा भाजपा के अनेक सदस्यों का नाम पालघर में साधुओं की हत्या करने वाले आरोपियों की सूची में है। इन सभी के खिलाफ सरकार तो अवश्य कठोर कार्रवाई करेगी,पर भाजपा ने अब तक उनके खिलाफ क्यों कार्रवाई नही की।

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