गणतंत्र दिवस पर इस बार Maharashtra की झांकी क्यों नहीं, जानिए कारण ?

गणतंत्र दिवस ( Republic Day ) के जश्न को लेकर विवाद ( Dispute ), 26 जनवरी ( 26 January ) को नहीं दिखेगी महाराष्ट्र ( Maharashtra ) की झांकी ( Tableau ), राजधानी दिल्ली ( Delhi ) में नहीं होगी सालाना परेड ( Parade ), राजनीतिक बवाल शुरू

By: Rohit Tiwari

Updated: 03 Jan 2020, 02:55 PM IST

मुंबई. गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियां जहां हर ओर शुरू हो गई हैं। वहीं 26 जनवरी को देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर सालाना परेड होगी, जिसमें भारतीय सेना का दम दुनिया देखेगी। इस परेड में भारत की सैन्य शक्ति के अलावा संस्कृति को भी दिखाया जाता है, जिसमें राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां दिखती हैं। इस बार पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की झांकी इस परेड में नहीं दिखेगी, जिसपर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। बता दें कि गणतंत्र दिवस की परेड की पूरी जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के पास होती है। जो इसकी तैयारियां, सुरक्षा, परेड, झांकी आदि की व्यवस्था को देखते हैं। चूंकि, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देश के राष्ट्रपति होते हैं, जो कि तीनों सेनाओं के प्रमुख भी हैं। इसलिए सारी जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय अपने पास रखता है।

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मांगे गए थे सुझाव
गणतंत्र दिवस की परेड में झांकियों की प्रदर्शनी के लिए सभी राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से सुझाव मांगे जाते हैं। जिसके बाद एक चयन प्रक्रिया के तहत एक कमेटी फाइनल लिस्ट तैयार करती है। रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जो जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार साल 2020 की परेड के लिए इस आधार पर सुझाव मांगे गए थे।
- राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ा कोई ऐतिहासिक किस्सा
- राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े कोई त्योहार
- आम लोगों के जीवन से जुड़ा कोई किस्सा या संदेश
- पर्यावरण
- भविष्य का विज़न

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इस तरह होती है एंट्री?
जो भी प्रस्ताव राज्यों या मंत्रालयों की तरफ से आते हैं, उनके आधार पर एक एक्सपर्ट कमेटी कई दौर की बैठक के बाद उनका चयन करती है। इस कमेटी में कल्चर, पेंटिंग, संगीत, कृषि, कोरियोग्राफी, कला समेत अन्य क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल होते हैं, जो कई एंगल से प्रपोजल का रिव्यू करते हैं। जब एक बार पहला स्केच/डिजाइन मंजूर हो जाता है, तो चयनित सदस्यों से तीन तरह के डाइमेंशनल मॉडल लाने के लिए कहा जाता है। जब प्रस्तावकों की ओर से मॉडल पेश किए जाते हैं, तो उसपर बात होती है। उसके बाद कुछ मीटिंग होती हैं, हालांकि अगर कोई प्रस्तावक मीटिंग में नहीं आता है तो उसके प्रस्ताव को खारिज माना जाता है।

 

इसके अलावा कुछ बड़ी बातें...
- रक्षा मंत्रालय की तरफ से किसी मॉडल बनाने वाली कंपनी का प्रस्ताव नहीं दिया जाता है।
- डिजाइन पर सिर्फ राज्यों के नाम अंग्रेजी/हिंदी में लिखे जा सकते हैं, इसके अलावा कुछ और नहीं लिखा जाएगा।
- प्रस्तावकों की तरफ से अपने डिजाइन के तीन मॉडल पेश किए जाते हैं, जिनमें से एक का सिलेक्शन कमेटी करती है।
- झांकी के लिए एक ट्रैक्टर, 10 कलाकार, स्थानीय वेशभूषा, लोकगीत आदि की जिम्मेदारी प्रस्तावकों की होती है।

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