4 शिक्षकों की लगन ने बंजर जमीन में कर दी बागवानी

बॉटनिकल गार्डन से जहां बच्चों को मिल रही शिक्षा, वहीं उगायी जा रही फल और सब्जियां

By: Amil Shrivas

Published: 07 Jun 2018, 12:46 PM IST

पेंड्रा. विकासखंड के मुरमुर गांव में स्थित मिडिल स्कूल परिसर की 40 डिसमिल भूमि बंजर थी। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को कृषि वैज्ञानिक बनाने के लिए चार शिक्षकों ने मिलकर मुरमुर स्कूल परिसर की इस 40 डिसमिल जमीन पर मेहनत और लगन से बॉटनिकल गार्डन बनाया है।

शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला में कक्षा 6वीं से 8वीं तक कुल 170 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं। इसमें आदिवासी छात्रों की संख्या 70 फीसदी है। शिक्षक बताते हैं कि विद्यार्थियों को कृषि वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से स्कूल परिसर के चारों तरफ गार्डन बनाकर पेड़-पौैधे लगाए हैं। विद्यार्थियों को उन्नत किस्म की खेती करने के बारे में जानकारी दी जाती है। स्कूल के सभी बच्चों को गुरुवार व शनिवार को गार्डन में ले जाकर कृषि संबंधी प्रैक्टिकल कराया जाता है। इसी मेहनत और लगन की बदौलत जमीन पर फलदार पेड़ लगाए। वहीं सब्जियां भी उगाई जा रही है। यहां आदिवासी बच्चे पढ़ाई के साथ बागवानी भी कर रहे हैं। शिक्षकों और छात्रों ने यहां फलदार वृक्ष के अलावा अलग-अलग किस्म के पेड़ पौधों से लेकर सब्जियां लगाई गई हैं। शिक्षकों की यह मुहिम बीते दो साल से चल रही है। स्कूल के गार्डन में आम, अंगूर, कटहल, लीची, मुनगा, पपीता, आंवला, केला व अनार आदि के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा गोभी, लाल भाजी, प्याज, बैगन, आलू, लहसुन, मिर्च व धनिया की भी खेती की जा रही है। इसके साथ ही स्कूल में पुस्तकालय की स्थापना की गई है। स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाए जाने वाले विषयों की किताबों के अलावा सामान्य ज्ञान तथा उपन्यास से संबंधित पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। विद्यार्थी खाली समय में पुस्तकालय से पुस्तक निकालकर गार्डन में बैठकर पढ़ाई करते हैं।

पौधों का संरक्षण हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए: डॉ.जैन
बिल्हा. शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ एनके जैन की अध्यक्षता में पर्यावरण दिवस का आयोजन किया गया। इसमें महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा सहभागिता निभाते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए नन्हे नन्हे पौधे रोपित किए और अपने पौधों को संरक्षित करने का संकल्प भी लिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य जैन ने कहा कि हमारे जीवन के लिए पर्यावरण संरक्षण अतिआवश्यक है। अगर हम अपने जीवन व भविष्य को संरक्षित रखना है तो हमारी पहली प्राथमिकता इन्हें बचाना होना चाहिए। नहीं तो वह दिन दूर नहीं कि हमें ऑक्सीजन भी खरीदने को मजबूर होना पड़ेे। अभी से जागरूक होकर अपने साथ अपने आस पास के लोगों को भी जागरूक करना शुरू कर दें। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के डॉ एके शर्मा, डॉ प्राची सिंह, डॉ एएल सांडे, डॉ आरसी अग्रवाल, डा दुर्बा चटर्जी, डॉ एके गिरि, डॉ सुनीला एक्का, डॉ आशा सिंह, एके मिश्रा, प्रोफेसर संजय अग्रवाल, प्रोफेसर शुभा वर्मा, प्रोफेसर सीएल पाटले, राजनीति विभाग, हिन्दी विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवम बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने सहभागिता निभाई।

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