खुडिय़ा के जंगल में जानवर हो गए असुरक्षित, अवैध लकड़ी का धंधा युद्धस्तर पर

Amil Shrivas

Publish: Sep, 17 2017 11:23:06 (IST)

Mungeli, Chhattisgarh, India
खुडिय़ा के जंगल में जानवर हो गए असुरक्षित, अवैध लकड़ी का धंधा युद्धस्तर पर

करंट लगाकर किया जा रहा जंगली जानवरों का शिकार

लोरमी. खुडिय़ा के जंगल अब जानवरों के लिए असुरक्षित हो गया है। यहां जंगली जानवरों के शिकार की लगातार शिकायतें सामने आ रही है। अभी हाल ही में दुल्लापुर में एक चीतल को मारकर अज्ञात आरोपियों द्वारा मांस को निकाला जा रहा था। वही इन जंगलो में अवैध लकड़ी कटाई का धंधा भी युद्धस्तर पर चल रहा है। चचेड़ी व खुडिय़ा व कारीडोंगरी के जंगल में लगे सागौन के पेड़ अब ठूठ में बदल चुके है। तस्करो के द्वारा बड़ी तेजी से हरे भरे सागौन के पेड़ के काटे जा रहे है। खुडिय़ा वनपरिक्षेत्र का जंगल भगवान भरोसे चल रहा है परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जंगलों में आये दिन शिकार के मामले सामने आ रहे हैं। बीट क्रमांक 426, 436 सहित अन्य बीटों में प्लांटेशन हुए सागौन के वृक्ष अब मात्र ठूठ ही नजर आ रहे है। यहां पर तस्करों के द्वारा बड़ी आसानी से चचेड़ी होते हुए लकड़ी को रातों रात बेच दिया जा रहा है। इस बात की पुष्टि 15 दिन पहले एक किसान के बाड़ी में लाखों रुपए के इमारती लकड़ी जब्ती से हुई थी। लेकिन इसके आरोपी आज तक पकड़ से बाहर है। 

शिकारियों के लिए गढ़ बना खुडिय़ा का जंगल: लोरमी. पिछले 5 वर्षों की बात करें तो आये दिन इन जंगलो में शिकार के मामले सामने आए हंै। चाहे वह चीतल का हो गया फिर किसी अन्य जंगली जानवर का। एक बार जमुनाही में एक तेंदूआ का शिकार कर उसके शव को पेड़ पर लटका दिया गया था। वही बहाउड़ में ही वर्ष 2015 में करंट से तीन चीतल की मौत हो गई थी। वर्ष 2014 में चचेड़ी बीट में भी करंट के चपेट में आने से 1 चीतल की मौत हुई थी। 2016 में एक चीतल ग्राम बोड़तरा कला पहुंच गई थी। उक्त हिरण को शिकार कर कार में भर कर लाया गया था और कार का दरवाजा खुलते ही हिरण भाग निकला था। वहीं 2016 में ही कारीडोंगरी में एक चीतल को वनविभाग के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से दफना दिया था। यद्यपि उक्त चीतल की मौत करंट लगने से हुई थी। मामले को दबाने के लिए जबरिया कुत्ते के काटने से उक्त चीतल की मौत होना बता दिया गया था। गौरतलब है कि खुडिय़ा परिक्षेत्र में जितने भी शिकार के मामले सामने आए हैं उनमें अधिकांश मामले में जंगली जानवरों की मौत करंट लगने से हुई है। इस प्रकार शिकारी विद्युत तरंगित तार उनके लिए ब्रम्हास्त्र का काम कर रहा है। इन वि़द्युत तरंिगत तार से सिर्फ जानवरों को ही नुकसान नहीं हुआ है। मानव भी इसके जद में आकर अपनी जान गवां चुके है।

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