खुले आसमान के नीचे रखा करोड़ों का धान भीगने से खराब होने की नौबत

बेमौसम बारिश से बढ़ी परेशानी

By: Amil Shrivas

Published: 18 Dec 2018, 11:24 AM IST

लोरमी. क्षेत्र में इन दिनों समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। किसान अपनी खून मेहनत की कमाई का धान बेच रहे हैं। किसानों के धान मंडियो में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है, जो सोमवार को हुई बेमौसम बारिश से भीग गया। दिन भर और रात भर लगी रही झड़ी से लाखो क्विंटल धान भीगकर सडऩे के कगार पर पहुंच चुका है। धान को बचाने के लिए न तो कैप कवर की व्यवस्था किया गया है और न ही भूसे में रखा गया लिहाजा समिति में रखा धान बारिश से भीगा। वहीं फड़ों में पानी भर जाने से ज्यादा नुकसान होने की आशंका जतायी जा रही है। इसकी परवाह न तो शासन को है और न ही प्रशासन को।
लोरमी क्षेत्र में 15 केन्द्र सहित 23 उपार्जन केन्द्रों में धान की खरीदी की जा रही है। किसान मिसाई कर खलिहानों से सीधे समिति मंडी में पहुंच रहे है। समितियों में आवक रफ्तार पकड़ चुकी है। प्रतिदिन हजारो क्विंटल धान की तौलाई हो रही है। समितियों से धान की उठाव भी नहीं के बराबर किया जा रहा है, जिससे समिति में बड़ी तादात में धान रखे हुये हंै। बोरियों की छल्ली में रखे धान एक-एक समिति में लगभग हजार से 2 हजार क्विंटल तक धान रखे हुये हंै। वहीं अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हंै।
खलिहानों में रखा धान भीगने से किसान मायूस
सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए प्रकृति का मार ऐसे पड़ रही है कि अब उनकी खून मेहनत की कमाई हुई फसल पर बेमौसम बारिश कहर बनकर टूट रही है। खलिहानों में धान की कटाई कर रखे धान बारिश से भीग रहे हैं। एक तो सूखे से धान कम हुआ है तो दूसरी ओर अब बेमौसम बारिश उनकी कमर तोड़ रही है। इस तरह से किसानों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

कैप कवर के लिए मिलते हैं लाखों, फिर भी नहीं होती है पूर्ति
समितियों में धान को भीगने से बचाने के लिए लाखों रुपए समिति को फंड दिया जाता है, लेकिन प्रतिवर्ष खरीदने वाले कवर कहां जाते हैं समझ से परे है। ऐसा नहीं है कि इस वर्ष ही बारिश हुई, प्रतिवर्ष कहीं न कहीं बारिश आ जाती है, जो धान को भीगाकर सड़ा देती है। समिति में लाखों रुपए का कैप कवर खरीदने का बिल लगा दिया जाता है, लेकिन समझ में यह नहीं आता कि आखिर में लाख रुपए के खरीदने वाले कैप कवर में आखिर कैसे धान भीग जाती है।
धान भीगने से होता है अधिकारी को फायदा
शुष्क मौसम मे अगर बेमौसम बारिश आ जाती है। अधिकारी धान को भीगने से बचाने के अपेक्षा भीगने पर ही ज्यादा ध्यान देते हंै। क्योंकि अगर जितनी मात्रा में धान भीगेगा, उतनी ही मात्रा में अधिकारियों का जेब गर्म होगा। शासन को मॉनीटरिंग कर यह बता दिया जाता है कि धान भीग कर सड़ गये हंै। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि लोरमी कॉलेज ग्राउण्ड में साल-दर साल सड़ा हुआ धान जमा होता है, जो हजारो क्विंटल में होगा। ऐसे में अधिकारी धान को सड़ा हुआ बताकर लंबी चौड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।
कई समितियों ने बिना भूसे धान कर दिए डंप
क्षेत्र में धान खरीदी चल रही है। धान को नुकसान से बचाने के लिए शासन स्तर पर भूसे के ऊपर धान रखने की बात कहती हैं, लेकिन कई समिति ऐसी हैं, जो खुद धान को सडऩे के लिए मजबूर कर देती हंै। जानकारी मिली है कि शासन स्तर पर करोड़ों रुपए के भूसे दिया जाता है। इसमें किसानों के खरीदे हुये धान को रखने का प्रावधान है, लेकिन धान भूसे में रखकर कच्ची जमीन पर रख दिया जाता है, जो खराब हो जाते हैं। इससे प्रतिवर्ष न जाने कितने करोड़ों रुपए के धान सड़ जाते हैं और शासन को राजस्व की क्षति उठानी पड़ती है।
धान की आवक बढ़ी, 1 लाख क्विंटल से ज्यादा हो चुकी खरीदी
क्षेत्र के उपार्जन केन्द्रों में बड़ी तादाद में धान की आवक हो रही है। किसान सीधे समितियों में पहुंच रहे हैं। क्षेत्र की उपार्जन केन्द्रों की बात करें तो 23 उपार्जन केन्द्र के माध्यम से 1 लाख क्विंटल से भी अधिक की खरीदी हो चुकी है। दिसबंर माह के दूसरे सप्ताह में लगातार धान की आवक बनी हुई है। वहीं सोमवार को हुए बेमौसम बारिश से किसान अब मंडी तरफ कम ही पहुंचेंगे, क्योकि अगर किसान अपनी धान को लेकर मंडी पहुंचते है तो उनका धान भीग सकता है। ऐसे में किसान सावधानी भी बरत रही है।
क्रय केन्द्र पर किसानों का भी धान भीगा
बेमौसम बारिश से जहां समितियों में तौलाई किए हुये धान ही नहीं भीगे हैं, बल्कि धान बेचने के लिए पहुंचे किसानों के धान भी भीगे हैं। उनके धान खुले आसमान में रखे हुये हैं, जो तौलाई नहीं हो पाये हैं। अब ऐसे में अगर रात या फिर बारिश ज्यादा हो जाती है तो पूरा धान भीग जायेगा जिसको किसान नहीं बेच पायेंगे। ऐसे हालत में किसानों की स्थिति दोनों तरफ से नुकसान दिख रहा है। अगर किसानों की धान भीग जाते हैं तो न तो वे मंडी मेंं बेच पायेंगे और न ही कोचिया उनके धान खरीदेगे।

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