गलन ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

गलन ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

By: Amil Shrivas

Published: 30 Dec 2018, 12:27 PM IST

लोरमी. क्षेत्र में इन दिनों गलन भरी ठंड पड़ रही है। लोगो का सिर्फ गर्म कपड़े और अलाव ही सहारा बन चुके हंै। सुबह शाम रात और दिन हर समय ठंडी हवा के थपेड़े और शीतलहर ने लोगंो को घरो में दुबके रहने के लिए मजबूर कर दिया है। वहीं अनेक जगहों पर सुबह-सुबह ओस क परत जम रहे हैं। ग्राम खपरीकला में नंदकुमार यादव के पैरावट में ओस की बंूदे जमी दिखीं। इधर शाम होते ही ठंड के बढ़ जाने से सडक़ों पर सन्नाटा पसर रहा है तो वहीं चौक चौराहों में अलाव जलाकर व्यापारी अपना व्यापार व्यवसाय कर रहे हैं। तापमान में लगातार कमी आ रही है। शनिवार को ठंड एकाएक बढ़ गई। शनिवार का दिन और रात बहुत ही ज्यादा ठंड का एहसास दिलाते रहे।
लोरमी का यह भूभाग 90 प्रतिशत वनाच्छित है। अचानकमार टाइगर रिजर्व से सटे व जंगल के किनारे बसे होने के चलते शीतलहर मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है। यही कारण है कि पूरा क्षेत्र गलन भरी ठंड से गुजर रही है। सुबह-सुबह ओस की परते भी जमना शुरू हो गये है। क्षेत्र में लगातार प्रवेश कर रही ठंडी-ठंडी हवायें लोगों कंपा रही है। लगातार पड़ रही है ठंड ने लोगों को घरो में ही दुबके रहने पर मजबूर कर दिया है। नगर में देर रात तक लोग जागकर अपना काम करते थे वे ठंड की वजह से 6 बजते ही दुकान बंद करने की बात कहने लगते हंै। वही शाम को 7 बजते ही सडक़ो पर सन्नाटा पसरने लगता है। क्षेत्र में एक सप्ताह पहले तेज बारिश हुई थी, तभी से लगातार ठंड बढ़ती गई है, जो आज भी लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है। जानकारों के मुताबिक ठंड लगभग 15 जनवरी तक ऐसे ही बने रहने के आसार हैं। मकर राशि के गोचर करने के बाद ठंड में कमी होने की बात कही जा रही है। उधर एटीआर क्षेत्र में खून जमा देने वाली ठंड पड़ रही है। वनवासियों के साथ साथ, जंगली जानवर भी प्रभावित हैं। एटीआर में 35 गांव आते हैं जो सूदूर वनांचल में हैं। अचानकमार में इन दिनो खून जमा देने की वाली ठंड पड़ रही है रात और सुबह का पारा वहां पर मात्र 4 से 5 डिग्री तक पहुंच रहा है। वहां रहने वाले लोगों को न तो दिन का चैन है और न ही रात की सुकून है। बैगा आदिवासी बड़े-बड़े अंगेठी व अलाव का सहारा लेकर जीवन काट रहे हंै। कई ऐसे गांव हैं जहां पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच रहा है। वहा पर सबसे ज्यादा समस्या बैगाओ को हो रही है। क्षेत्र में इन दिनो पड़ रही तेज ठंड से बड़े बुजुर्ग तो प्रभावित हैं ही, साथ में छोटे-छोटे बच्चे भी प्रभावित हैं। यही कारण है कि सुबह की पाली में लगने वाले बच्चो की दर्ज संख्या में कमी देखी जा रही है। वनों में लगने वाले स्कूलों में ठंड की वजह से बच्चे स्कूल नही पहुच रहे है।
पारा दिन १२ तो रात में ५ डिग्री पहुंचा
मुंगेली. जिले में कडक़ड़ाती ठंड फिर से पलटकर वापस आ गयी है। बादलों के छंटते ही सर्द हवाओं ने ठंड से पलटवार किया। रात को गिरी ओस की नन्हीं-नन्हीं बूंदें कम तापमान और सूरज की तेज किरणों के अभाव में सुबह देर तक मोतियों की तरह चमकती रहीं। रात में करीब 4 बजे तापमान 5 डिग्री पर उतर आया था उसके बाद सारा दिन 12 डिग्री पर तापमान अटका रहा। शनिवार को सुबह करीब 11 बजे तक चल रही शीतलहर के मारे लोग कंपकंपाते रहे और सूरज देवता भी दोपहर के बाद से सारा दिन ही ओझल रहे। ठंड से लोगों का हाल बेहाल है। सडक़ों पर थोडी बहुत चहल पहल दिखी भी तो दोपहर को। ठंड ने शहर से लेकर गांव तक के रहवासियों को परेशान कर दिया। सबसे ज्यादा हलाकान सुबह की पाली में पढऩे वाले नन्हे छात्र-छात्रा हुए जिनको इस ठंड में स्कूल जाना ही पड़ा। दिसम्बर से शुरू हुई ठंड अब खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। पूरा क्षेत्र पिछले 10 दिनों से ठंड से कंपकंपा रहा है।

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