मानसून विदा होने को और अभी नहीं छलक पाए क्षेत्र के बांध

मानसून विदा होने को और अभी नहीं छलक पाए क्षेत्र के बांध

Anil Kumar Srivas | Publish: Sep, 10 2018 06:17:51 PM (IST) Mungeli, Chhattisgarh, India

किसानों को तेज बारिश का इंतजार

लोरमी. देश में शत् प्रतिशत बारिश की अनुमान लगाने वाले मौसम विभाग का आकलन लोरमी क्षेत्र के लिए झूठा साबित हो रहा है। क्षेत्र में अभी तक 500 मिली तक भी बारिश नहीं हो पायी है। यही कारण है कि क्षेत्र के दर्जनों बांध व तालाब नहीं भर पाये है। वहीं बारिश के लिए किसान इंतजार कर रहे हंै कि तेज बारिश हो और वे राहत की सांस लें।
एक ओर जहां देश के अन्य स्थानो में बाढ़ का कहर जारी है तो वहीं लोरमी क्षेत्र में नदी नालों में घुटनों तक भी पानी नहीं चला है। पूरा बरसात का सीजन जाने को है, लेकिन नदी में एक बार भी बाढ़ नहीं आयी है। हल्की-फुल्की बारिश में ही किसान अपनी खेती किसानी का काम किए हैं, लेकिन अभी तक किसानों को तेज व मूसलाधार बारिश की आस लगी हुई है। हालॉकि अब धीरे-धीरे मानसून की विदाई भी होने को है। ऐसे में अगर सितबंर के महीने में अच्छी बारिश नहीं हो पाती है तो एक बार फिर से किसानों के सामने पानी को लेकर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
ज्ञात हो कि किसान पिछले लगातार 3 वर्षों से पड़ रहे अकाल से उनके हाथ पैर टूट चुके हैं। इस बार बारिश शुरू से ही अच्छी हुई, मगर उतनी नही हुई जितना अन्य संभाग व जिले में हुई है।
मुंगेली जिले में तीन विकासखण्ड आते है जिसमें पथरिया लगभग 1000 मिली, बारिश और मुंगेली 8 मिली बारिश रिकार्ड की गई है, लेकिन लोरमी विकास में मात्र 500 मिली के आसपास ही बारिश हो पायी है। जबकि लोरमी सबसे बड़े विकासखण्ड के साथ साथ सबसे बड़े धान उत्पादक ब्लॉक है। ऐसे में लगातार घटता उत्पादन किसानों को चितिंत तो कर रहा है। साथ में सरकार को भी सकते में डाल दिया है। क्योंकि लोरमी एक ऐसा जगह है, जहां किसान सिर्फ धान की मुख्य फसल लेते है। क्षेत्र में धान की फसल के लिए उपजाउ मिट्टी उपयुक्त है। वहीं अन्य फसल उतने अच्छे से नहीं होती, क्योंकि क्षेत्र मटासी जमीन ज्यादा है। ऐसे में किसान को सिर्फ और सिर्फ धान की फसल पर ही निर्भर होना पड़ता है।
आधा अधूरे ही भर पाये बांध, मानसून अब धीरे-धीरे ले रहा विदाई का रूप: क्षेत्र में पिछले पखवाड़े भर से अच्छी बारिश नहीं हो पायी है। किसान थोड़ी बहुत बारिश से ही अपना काम चला रहे हैं। अगर ऐन वक्त पर अगर बारिश थम जाती है तो एक बार फिर से क्षेत्र अकाल पडऩे की प्रबल संभावना हो जायेगी। वहीं क्षेत्र के 9 से ज्यादा बड़े से छोटे बांध है जो आधा अधूरा ही भर पाया है। खुडिय़ा जलाशय 50 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिचिंत करता है। लेकिन मानसूनी बारिश से बांध में 70 प्रतिशत ही जलभराव हो पाया था। किसानों की मांग पर बांध से पानी छोड़ा जा रहा है जो अब घटकर 65 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं अन्य बांध की स्थिती उतनी अच्छी नहीं है। अगर किसानों के लिए पानी लगातार छोड़ दिया जाता है तो बांध खाली हो जायेगा।

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