ग्राम बंगला भाठा के लिए नहीं पक्की सड़क, पुलिया की मांग भी अधर में

विडंबना: आजादी के ७२ वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव

By: BRIJESH YADAV

Published: 04 Apr 2019, 11:16 AM IST

खैरा. जिला मुख्यालय से महज 45 किमी दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य ग्राम बंगला भाठा में शासन की मुलभूत सुविधा संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। पंचायत की उपेक्षा से ग्रामीणों में रोष है। कच्ची सड़क और पुलिया नहीं होने से बरसात के मौसम में अंचल अलग थलग पड़ जाता है। कई लोक सुराज अभियानों व जनदर्शनों में पुलिया निर्माण की मांग उठाने के बावजूद निराकरण नहीं किया गया है। ग्रामीण आश्रित ग्राम होने का दंश झेलने को मजबूर हैं। 
कोटा विकासखंड अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत पुडू का आश्रित ग्राम बंगला भाठा, जो पहाड़ और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। यहां पहुंचते ही शासन की सभी दावे खोखले नजर आते हैं। मूलभूत सुविधाएं कागजों में ही पूरे कर दिए गए हैं। क्योंकि गांव तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क बनी है और न ही गांव में पक्का मार्ग अबतक मिला है। गांव तक पहुंचने के लिए नाला पार कर जाना पड़ता है, जिसपर आज तक पुलिया निर्माण नहीं हो सका है। कच्ची सड़क तथा जंगली रास्ता होने के कारण शाम ढलने के बाद लोग जानवरों के डर से इस मार्ग पर जाने से कतराते हैं। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाता है। किसी ग्रामीण का स्वास्थ्य खराब हो जाए तो पैदल चलकर या तो साइकिल की मदद से पहुंचाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं में जान का खतरा हमेशा बना रहता है।
वर्तमान सरपंच सगुन सिंह पैकरा सबसे निष्क्रिय सरपंच है, जिनके कार्यकाल में मूलभूत सुविधाओं का लाभ पहुंचाने व योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों में रोष है।
पुल नहीं होने से परेशानी
पुलिया निर्माण नहीं होने से बरसात के दिनों में आवागमन में बाधा होती है। गांव पहुंचते ही बस्ती से ठीक पहले एक बड़ा नाला है, जिसमें पानी गिरते ही पानी का तेज बहाव शुरू हो जाता है। बारिश अधिक होने पर ग्रामीण जरूरी काम के लिए भी नहीं जा पाते। बच्चों की पढ़ाई व्यवस्था ठप हो जाती है। पानी के तेज बहाव से दुर्घटना का डर बना रहता है। आजादी के बाद से लेकर आज तक आश्रित ग्राम बंगला भाठा राजनेताओं के लिए केवल वोट बैंक ही बन कर रह गया है।
पंचायत चुनावए विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव में केंद्र की सरकार बनाने के लिए नई उम्मीद और आशा की किरण के साथ जिम्मेदारी के साथ ग्रामीण मतदान कर अपनी सहभागिता निभाते हैं।और चुनाव संपन्न होते ही ग्रामीणों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता है। समस्या निराकरण तो दूर उनकी पुछ परख ही नही किया जाता है।

&ग्राम विकास के लिए राशि शासन स्तर पर आने के बाद ग्राम पंतायत में कार्य किया जाता है। पंचायत के द्वारा प्रस्ताव भेजा गया होगा।
राजेन्द्र पांडेय, सीईओ कोटा
&गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोकसुराज शिविर, पंचायत स्तर पर पानी की समस्या और नाला निर्माण की मांग कई वर्षों से करते आ रहे है। लेकिन आज तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ है।
राजेश्वर टोप्पो, ग्रामीण

BRIJESH YADAV Desk
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