गणेश उत्सव मनाने तैयारियां शुरू, मूर्तियों के रंगरोगन में जुटे मूर्तिकार

गणेश उत्सव मनाने तैयारियां शुरू, मूर्तियों के रंगरोगन में जुटे मूर्तिकार

Anil Kumar Srivas | Publish: Sep, 11 2018 04:30:12 PM (IST) Mungeli, Chhattisgarh, India

गणेश उत्सव १३ सितम्बर को,प्रशासन ने भी शुरू की विघ्नहर्ता के उत्सव को विघ्नरहित सम्पन्न कराने की तैयारी

मुंगेली. गणेशोत्सव 13 सितंबर से शुरू होगा। स्थापना में अभी समय है, लेकिन प्रशासन ने इस बार भी शहर में पुल के पास नदी में मूर्तियां विसर्जित न करके सूरीघाट के तालाब में हो, इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
यह विडम्बना ही है कि मुंगेली में शंकर मंदिर के पास स्थित इकलौते तालाब का ही अस्तित्व बचा हुआ है। कुछ साल पहले तक यह तालाब निस्तारी के काम आता था। यहीं पर गणेश और दुर्गा की छोटी-बड़ी मूर्तियों का भी विसर्जन होता था। मगर अब नालियों के पानी के भराव के कारण यहां का पानी पूरी तरह गंदा व प्रदूषित हो चुका है। निस्तारी तो दूर मूर्तियों का विसर्जन भी यहां बंद हो गया है। विगत कुछ सालों में प्लास्टर आफ पेरिस की बनी हुई मूर्तियों की स्थापना का चलन हो गया है। ये मूर्तियां भले ही अधिक आकर्षक दिखती हैं। मगर पानी में घुलनशील नहीं होने के कारण विसर्जन स्थल पर कचरा बनकर पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। इसके कारण कुछ सालों से पीओपी की बनी मूर्तियों की स्थापना न करने के लिए अभियान चल रहा है। इस जागरूकता अभियान का असर अब गणेशोत्सव पर साफ दिखने लगा है। प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसे नुकसानदेह चीजों की जगह मिट्टी की मूर्तियां ही यहां पर बन रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी पीओपी की बनी मूर्तियों की अपेक्षा मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने और के लिए प्रेरित करता है।
जिला मुख्यालय में गणेशोत्सव के लिए प्रतिमा तैयार कर रहे हीरालाल का पूरा परिवार कुम्हारी काम में लगा है। ये बचपन से ही विघ्नहर्ता की प्रतिमाएं गढऩे के काम में लग गये थे। इनका पूरा परिवार हर साल 400 से 500 तक मूर्तियों को बनाते हैं। इन्होंने कभी भी प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसी चीजों के इस्तेमाल नहीं किया। कुछ साल पहले प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ लोगों ने समय की बचत और ज्यादा फिनिशिंग के नाम पर प्लास्टर से मूर्ति बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इंकार कर दिया था। इसके कारण 2-3 साल तक मिट्टी की मूर्ति की पूछपरख कम होने से नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन अब मिट्टी की मूर्तियों की ही पूछ परख होती है, लिहाजा काम की कोई कमी नहीं है। नए कलाकारों को भी मिट्टी से ही मूर्ति बनाने की समझाईश देते हैं। इस सीजन में भी मिट्टी के गजानन ही गढ़ रहे हैं। हीरालाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्तियों बनाने पर प्रतिबंध की सूचना उन्हें दी गई थी, जिसका वे पालन करते हैं। हीरालाल के पास 100 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक की मूर्तियों का आर्डर है। लोग उसके निवास से ही आकर अपनी पसंद की र्मूिर्तयां ले जाते हैं।
मजदूर संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
मुंगेलीञ्चपत्रिका. भारतीय मजदूर संघ जिला मुंगेली ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष प्रभात पाण्डेय व जिला मंत्री रवि सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में नियत अवधि के रोजगार सम्बन्धी अध्यादेश वापस लेने, समान काम समान वेतन के प्रावधान को केंद्रीय नियमों के स्थान पर अधिनियम में शामिल करना, ठेका श्रमिकों के न्यूनतम बोनस, कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन ग्रेज्युटी के परिलाभ सुनिश्चित करना, राज्य ठेका श्रम सलाहकार मंडलों के गठन की कानूनी प्रावधान का पालन सुनिश्चित किया जाना व नियमित प्रवित्ति के कार्य पर नियोजित ठेका श्रमिकों को सेवा में नियमित करना आदि मांग शामिल है। मांगों पर शीघ्र कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। इस दौरान राजेशपुरी गोस्वामी, रविन्द्र यादव, ठाकुर सिंह, गुड्डू ठाकुर, लक्ष्मी बंजारे, मोहित सिंह, लक्ष्मी पांडेय, टोकेश्वर नाथ योगी, कौशल साहू, रवि यादव, श्याम यादव, हरि साहू, भोला यादव , शोभा यादव आदि मौजूद रहे।

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