आयकर नियमों में बदलाव, जाने कहां निवेश करने से होगी टैक्स बचत

आयकर नियमों में बदलाव, जाने कहां निवेश करने से होगी टैक्स बचत

Ashutosh Kumar Verma | Updated: 29 Apr 2018, 01:06:00 PM (IST) म्‍युचुअल फंड

नए वित्त वर्ष में टैक्स स्लैब में तो कोर्इ बदलाव नहीं हुआ लेकिन कुछ टैक्स नियमों में कुद बदलाव किया गया है।

नई दिल्ली। नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है और इस साल से सरकार ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं। हालांकि इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ कटौतियां किसी व्यक्ति की टैक्स लगने योग्य कमाई पर प्रभाव डालेगी। इसलिए, नए वित्त वर्ष में निवेश की सही योजना अभी से ही बना लेनी चाहिए, क्योंकि अगर सही तरीके से निवेश किया जाएगा तो कम इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा। एेसे में हम आपको बताते हैं कि आयकर नियमों में बदलाव के बाद आपके लिए कहां निवेश करना बेहतर होगा।


आयकर नियमों में ये हुएं हैं बदलाव

स्टैंडर्ड डिडक्शन को दोबारा लागू करना: वित्त मंत्रालय ने सैलरी इनकम से 40 हजार रुपये की मानक कटौती को फिर से लागू किया है। नौकरीपेशा वर्ग के अलावा पेंशनरों को भी इस कटौती का लाभ उठाने की इजाजत होगी।

ट्रांसपोर्ट भत्तों और मेडिकल बिलों के भुगतान पर टैक्स लगेगा: ट्रांसपोर्ट के भत्तों और मेडिकल बिलों पर अब तक उपलब्ध टैक्स के लाभ को वापस ले लिया गया है। इस समय 19,200 रुपये का ट्रांसपोर्ट भत्ता और मेडिकल बिलों के सालाना 15 हजार रुपये के भुगतान पर कोई टैक्स नहीं लगता। 1 अप्रैल 2018 के बाद इन्हीं भत्तों पर इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स लगाया जाएगा।

सेस 4 फीसदी तक बढ़ेगा : कर दायित्व पर लगाया गया उपकर मौजूदा 3 फीसदी से एक फीसदी बढ़ा दिया गया है। अब यह 4 फीसदी हो गया है। यह सेस 'स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर' कहा जाएगा।

Tax Savings

यहां करेंगे निवेश तो होगी टैक्स बचत

अगर किसी व्यक्ति की मासिक आय 30 हजार रुपये हैं और वह ईएलएसएस में 50 हजार रुपये का निवेश करता है और अपने लिए और अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा लेता है और सालाना 20 हजार रुपये का प्रीमियम अदा करता है तो उसकी पूरी सैलरी इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता। वहीं अगर किसी व्यक्ति की मासिक आय 50 हजार रुपये है और वह यू/एस 80 सी में 1.5 लाख रुपये का निवेश करता है, जिसमें ईएलएसएस, जीवन बीमा, एनएससी, पीपीएफ शामिल है। इसके साथ ही यू/एस 80 डी के तहत स्वास्थ्यबीमा में 50 हजार रुपये का निवेश (25,000 अपने और अपने परिवार के लिए और 25,000 अपने पर आश्रित अभिभावकों के लिए) और एनपीएस में 50 हजार रुपये का निवेश करता है तो उसे सिर्फ 6250 रुपये का इनकम टैक्स देना पड़ेगा। यह सबसे ज्यादा छूट है, जो कोई व्यक्ति निवेश के माध्यम से हासिल कर सकता है।


हालांकि सामान्य तौर पर ज्यादातर निवेशक आयकर में छूट लेने के लिए दूसरे मिश्रित विकल्पों, जैसे एचआरए, एलटीए, किराए की आय का नुकसान अगर कोई है, ट्यूशन फीस, दूसरे भुगतान और भत्तों का चयन करते है। इसमें से हर विकल्प अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग होता है। इस तरह के विकल्प नियोक्ता की मुआवजे का ढांचा तय करने वाली नीति पर भी निर्भर होते हैं।


वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स स्लैब रेट

इनकम टैक्स स्लैब टैक्स की दर
ढाई लाख रुपये तक आय टैक्स नहीं
2,50,000 से 5,00,000 रुपये तक आय 5 फीसदी
5,00,000 से 10,00,000 रुपये तक आय 20 फीसदी
10,00,000 रुपये से ज्यादा इनकम 30 फीसदी
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