शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर, राज्य सरकारें ले सकती हैं ये फैसला

शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर, राज्य सरकारें ले सकती हैं ये फैसला

Dimple Alawadhi | Publish: Jan, 04 2019 10:57:34 AM (IST) म्‍युचुअल फंड

बीते कई वर्षों से कृषि कर्जमाफी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जंग छिड़ी हुई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इसकी कीमत शराब कंपनियों को चुकानी पड़ सकती है क्योंकि कर्जमाफी की वजह से पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकारें शराब पर टैक्स बढ़ाने की ताक में हैं।

नई दिल्ली। कृषि संकट को कम करना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। किसानों की कर्जमाफी राजनीतिक दलों के एजेंडे में हैं और देश के सबसे अहम मुद्दों में से एक है। बीते कई वर्षों से कृषि कर्जमाफी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जंग छिड़ी हुई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके परिणाम क्या होंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इसकी कीमत शराब कंपनियों को चुकानी पड़ सकती है क्योंकि कर्जमाफी की वजह से पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकारें शराब पर टैक्स बढ़ाने की ताक में हैं।


शराब पर बढ़ सकता है टैक्स

इस संदर्भ में एडलविस सिक्यॉरिटीज लिमिटेड का कहना है कि कृषि कर्जमाफी के बाद वित्तीय सुराख को भरने के लिए सरकारों को रेवेन्यू की जरूरत है और सरकारें इसके लिए टैक्स बढ़ाने की कोशिश में हैं। टैक्स में वृद्धि का शराब की मांग पर असर होगा, क्योंकि कंपनियां अतिरिक्त लेवी ग्राहकों से वसूलेंगी। इसका मतलब होगा कि कृषि कर्जमाफी के बाद शराब महंगी हो सकती है।


शराब पर टैक्स बढ़ाना है संभावित विकल्प

एडलविस सिक्यॉरिटीज के विश्लेषक अबनीश रॉय और आलोक शाह ने 1 जनवरी को एक इन्वेस्टर नोट में लिखा था कि शराब पर टैक्स बढ़ाना (जिससे करीब 25 फीसदी राजस्व आता है) सर्वाधिक संभावित विकल्प है, क्योंकि राज्य सरकारें कर्ज लेकर अपना जीडीपी-कर्ज अनुपात नहीं बिगाड़ना चाहेंगी। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा होता रहा है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुए चुनावों में कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था। कहा जा रहा है कि इसी वादे के चलते कांग्रेस इन राज्यों में सत्ता में आई।

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