Exit poll में अजित सिंह के लिए आई बड़ी खबर, झूम उठे समर्थक

Exit poll में अजित सिंह के लिए आई बड़ी खबर, झूम उठे समर्थक

Iftekhar Ahmed | Publish: May, 20 2019 01:17:02 PM (IST) Muzaffarnagar, Muzaffernagar, Uttar Pradesh, India

  • जाट नेता और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के मुखिया अजित सिंह की पक्की मानी जा रही है जीत
  • जाट लैंड में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे थे अजित सिंह
  • गठबंधन की वजह से रालोद मुख्या को मिल सकती है बड़ी जात

नोएडा. जाटों की राजनीति करने वाले राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया के लिए 2019 लोकसभा चुनाव के एक्जिट पोल में अच्छी खबर आती दिख रही है। यानी अपनी वजूद की लड़ाई लड़ रहे रालोद मुखिया एक बार फिर संसद पहुंच सकते हैं। हालांकि, उनके पुत्र के लिए एक्जिट पोल में बुरी खबर है। जहां मुजफ्फरनगर से अजित सिंह खुद भाजपा के वर्तमान सांसद संजीव बालिया के खिलाफ चुनाव जीत रहे हैं। वहीं, उनके बेटे जयंत चऔधरी अपने गृह जनपद से हारते नजर आ रहे हैं। उन्हें मोदी सरकार में मंत्री सत्यपाल सिंह अपने काम और मोदी लहर की वजह उन्हें हराते दिख रहे हैं। गौरतलब है कि गठबंधन की ओर से रालोद के खाते में मुजफ्फरनगर, बागपत और मथुरा की तीन सीटे आई थी। इनमें से मात्र एक सीट पर ही रालोद को जीत मिलती दिख रही है। यानी बागपत और मथुरा की सीट रालोद हार सकती है।

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बागपत में भाजपा के सत्यपाल सिंह रालोद के राजुकमार जयंत चौधरी को मात देते नजर आ रहे हैं। मोदी फैक्टर और विकास कार्य का सत्यपाल सिंह को फायदा मिलता दिख रहा है।

वहीं, मुजफ्फरनगर में रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह गन्ना बकाया और भाजपा सांसद संजीव बालयान का इलाके में रोध के साथ ही मुस्लिम-जाट-दलित गठजोड़ की वजह से जीत दर्ज करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, आखिरी चरण का चुनाव संपन्न होने के साथ ही एक्जिट पोल के आंकड़े सामने आचुके हैं। लगभग सभी एक्जिट पोल में एनडीए को बड़ी जीत मिलती दिख रही है। यानी नरेन्द्र मोदी एक फिर से देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। लेकिन, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के भाज जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्लीन स्वीप किया था। वहां, इस बार भाजपा की डूबती नजर आ रही है। पेश है पत्रिका संवाददाताओं की ग्राउंड रिपोर्ट। आप भी पढ़े कि कौन कहां खिल रहा है कमल और कहां साइकिल और हाथी का साथ दिखाएगा कमाल।

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1. गौतमबुद्धनगर से भाजपा महेश शर्मा के जीतने के आसार हैं। इसकी वजह है भाजपा का शहरी वोटों पर पकड़ और ग्रामीण वोटों का ध्रुवीकरण।

2. गाजियाबाद से भी भाजपा के प्रत्याशी जनरल वीके सिंह जीत रह है। उनकी जीत की वजह है शहरी और सवर्ण वोटों पर भाजपा की पकड़ और गठबंधन का प्रत्याशी बदलने की वजह से अंदरूनी कलह इसके साथ ही इस सीट पर कांग्रेस का पूरे दमखम के साथ लड़ना भी गटबंधन का नुकसान पहुंचा सकता है।

3. मेरठ-हापुड़ से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह है यहां बसपा के टिकट पर हाजी याकूब कुरैशी का उम्मीदवार होना है। बसपा प्रत्याशी को मुस्लिम-दलित गठजोड़ का फायदा मिल सकता है।

4.बुलंदशहर से भाजपा प्रत्याशी डॉ. भोला सिंह जीत सकते हैं। इसकी वजह है भाजपा के प्रत्याशी का स्थानी और गठबंधन प्रत्याशी का बाहरी होना। इसके अलावा मोदी फैक्टर से भी भाजपा को फायदा हो सकता है।

5.नगीना सीट भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। यहां से बसपा के गिरीश चंद भारी मतो जीत दर्ज करसकते हैं। माना जा रहा है कि यहां तत्कालीन सांसद का विरोध और मुस्लिम-दलित गठजोड़ का गठबंधन प्रत्याशी को फायदा होगा।

6. बिजनौर सीट से भी बसपा के मलूक नागर के जीतने के प्रबल आसार हैं। यहां से तत्कालीन कुंवर भारतेद्र का विरोध और दलित, मुस्लिम और गुर्जर वोट बैंक के गठजोड़ का फायदा गठबंधन को मिल सकता है।

7. संभल से सपा के डॉ. शफिकुर्रहमान बर्क जीत सकते हैं। यहां से भी भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। सपा को मुस्लिम-दलित गठजोड़ का फायदा मिलने के आसार हैं। गौर तलब है कि इस सीट पर 51 प्रतिशत से भी ज्यादा मुस्लिम वोट है।

8. अमरोहा से सीट से बसपा के दानिश अली जीत सकते हैं। मुस्लिम-दलित गठजोड़ से गठबंधन को फायदा मिलने के आसार हैं।


9. सहारनपुर साट से बसपा के हाजी फजुलर्रहमान भाजपा के राघव लखनपाल शर्मा को करारी शिकस्त देते नजर आ रहे हैं। यहां बसपा को मुस्लिम-दलित-जाट गठजोड़ का फायदा मिलने के आसार हैं।

10. मुरादाबाद से सपा के एसटी हसन भाजपा प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज कर सकते हैं। यहां भी मुस्लिम-दलित गठजोड़ से गठबंधन को बढ़त मिलने के आसार हैं।

11. रामपुर में सपा के दिग्गज नेता आजम खान भाजपा नेत्री जया प्रदा को मात देते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह है, जया प्रदा का हाबरी होना साथ ही मुस्लिम-दलित गठजोड़ और आजम खान का स्थानीय मतदाताओं पर अच्छी पकड़ का फायदा मिल सकता है।

12. कैराना से सपा की तब्बसुम हसन जीत दर्ज कर सकती है। इसकी वजह से कांग्रेस से हरेन्द्र मलिक का चुनाव मैदान में होना। इससे भाजपा के जाट वोट बंटने के आसार है। इसके अलावा हुकुम सिंह की पुत्री मृंगाका सिंह का टिकट कटने से भाजपा की आपसी कलह और मुस्लिम-दलित-जाट गुर्जर गठजोड़ से गठबंधन को फायदा हो सकता है।

 

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