कवाल कांड: दंगे के मुकदमे में छह आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

Highlights

- 8 सितंबर 2013 को शामली में सांप्रदायिक हिंसा का मामला

- एडीजे-6 की अदालत ने छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में किया बरी

- सिंभालका गांव के रहने वाले कसीमुद्दीन के घर आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटना हुई थी

By: lokesh verma

Published: 28 Mar 2021, 10:54 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुजफ्फरनगर. 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे में उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और विधायक संगीत सोम समेत 51 लोगों पर दर्ज मुकदमे जहां वापस ले लिए गए हैं। वहीं, एडीजे-6 की अदालत ने छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी दिया है। बता दें कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान सिंभालका गांव में घर में घुसकर आगजनी और लूटपाट के मामले में दंगा पीड़ित कसीमुद्दीन ने कोतवाली शामली में यह केस दर्ज कराया था। इस मामले में छह लोगों के खिलाफ एसआईटी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।

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दरअसल, कवाल कांड के बाद 7 सितंबर 2013 नंगला मंदौड़ में एक महापंचायत का आयोजन किया गया था। उस महापंचायत के बाद मुजफ्फरनगर में दंगा भड़क गया था। वहीं, अगले दिन 8 सितंबर 2013 को शामली जिले में भी हिंसा हुई थी। सिंभालका गांव के रहने वाले कसीमुद्दीन के घर आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटना हुई थी। उसके बाद कसीमुद्दीन का परिवार दंगा पीड़ित कैंप चला गया था। एक सप्ताह बाद 15 सितंबर को कसीमुद्दीन ने गांव के ही छह लोगों को आरोपी बताते हुए नामजद केस दर्ज कराया था। देवेंद्र, पिंटू, उमेश, अरविंद, विनोद और ललित के खिलाफ धारा 147, 153ए, 392 और 436 के तहत अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

अब तक 82 मुकदमों की वापसी की अनुमति

बता दें कि मुजफ्फरनगर दंगों के दर्ज 92 केस में से योगी सरकार 82 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दे चुकी है। इसके साथ ही अदालत में 12 मुकदमों की वापसी के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत प्रार्थनापत्र दिया गया है। उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह और साध्वी प्राची समेत 51 लोगों पर दर्ज मुकदमों के वापसी की अनुमति कोर्ट से मिल चुकी है।

हम अपने केस की पैरवी नहीं करेंगे: डॉ. संजीव बालियान

वहीं, 31 अगस्त 2013 को भी नंगला मंदौड़ पंचायत हुई थी, जिसमें केद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक आदि के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में चार सितंबर को दोनों को जेल भेजा गया था। अब जब सभी नेताओं के केस वापस हो रहे हैं तो इस संबंध में डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि वह पहले जनता के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों वापस कराएंगे। अपने मामले की वह खुद पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि मंत्री सुरेश राणा और विधायक संगीत सोम ने अपने मामले की खुद पैरवी की है।

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