बड़ा खुलासा : सहकारी शुगर मिल के गोदाम में सड़ गई करोड़ों रुपये की चीनी

उत्तर प्रदेश में भले ही गन्ना भुगतान को लेकर किसान आंदोलन पर उतारू हों और सरकार रिकॉर्ड गन्ना भुगतान करने का दावा कर रही हों। लेकिन, इसी बीच भाकियू के पदाधिकारियों ने थाना भोपा क्षेत्र की मोरना स्थित द गंगा सहकारी शुगर मिल का गोदाम खुलवाकर करोड़ों रुपए की चीनी खराब और सड़ने का खुलासा किया है।

By: lokesh verma

Published: 06 Oct 2021, 06:04 PM IST

मुजफ्फरनगर. उत्तर प्रदेश में भले ही गन्ना भुगतान को लेकर किसान आंदोलन पर उतारू हों और सरकार रिकॉर्ड गन्ना भुगतान करने का दावा कर रही हों। लेकिन, इसी बीच भाकियू के पदाधिकारियों ने थाना भोपा क्षेत्र की मोरना स्थित द गंगा सहकारी शुगर मिल का गोदाम खुलवाकर करोड़ों रुपए की चीनी खराब और सड़ने का खुलासा किया है। भले ही चीनी मिल के अधिकारी अब अपनी सफाई पेश कर रहे हों, लेकिन सवाल यह उठता है जब इस तरह मिल में चीनी पड़े-पड़े सड़ जाएगी तो किसानों के बकाया गन्ने भुगतान कैसे होगा।

गौरतलब है कि मोरना शुगर मिल पर किसानों का करोड़ों रुपया गन्ना भुगतान बकाया है। वहीं, चीनी मिल के गोदाम में करोड़ों रुपए की चीनी 2018 से लेकर 2021 तक भरी पड़ी है, मगर सरकार इसे बेचने को तैयार नहीं है। मुजफ्फरनगर में बजाज शुगर मिल को छोड़कर अन्य कई फैक्ट्रियां अपना भुगतान कर चुकी हैं, जिसमें मोरना शुगर मिल पर भी किसानों का करोड़ों रुपए बकाया है। यहां प्राइवेट फैक्ट्रियां चीनी बेचकर किसानों का भुगतान कर रही हैं तो वहीं द गंगा सहकारी शुगर मिल मोरना के अधिकारी गोदाम में लगी चीनी को बेचने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में जाहिर है कि गन्ना भुगतान की समस्या तो आएगी ही। मिल पर भाकियू नेताओं की कार्यवाही से शुगर मिल मोरना के दावों की पोल खुल गई है। किसान सदमे में आ गए हैं कि स्टॉक में मौजूद चीनी या तो खराब हो गई या कुछ चीनी एक्सपायर होने के नजदीक है। जिसके चलते उसकी कीमत बाजार में खत्म हो चुकी है। चीनी मिल के इस नजारे को देखते हुए किसान आक्रोशित हैं और उन्होंने चीनी मिल के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है।

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इस तरह हुआ चीनी सड़ने का खुलासा

बता दें कि द गंगा किसान चीनी मिल मोरना पर किसानों का करोड़ों रुपए बकाया चल रहा है, जिसके चलते किसान यूनियन के कुछ पदाधिकारी व कार्यकर्ता मोरना मिल के जीएम कमल रस्तोगी से मिले और उन्होंने किसानों के गन्ना भुगतान के बारे में बात की। इस पर जीएम ने कहा कि अभी मिल में चीनी काफी मात्रा में लगी हुई है। चीनी बिकने के बाद किसानों का भुगतान कर दिया जाएगा। इस पर किसान यूनियन कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और चीनी मिल के गोदामों में रखे गए चीनी के स्टॉक को चेक करने की मांग करने लगे। मिल प्रबंधन ने काफी ना-नुकुर करने के बाद भी कार्यकर्ता स्टॉक चेक करने से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में मिल प्रबंधन ने कर्मचारी भेजकर किसानों को चीनी का स्टॉक चेक कराया। इस दौरान गोदाम नंबर सात में 376 कुंतल चीनी जिसका निर्माण 2017-18 में किया गया था। वह बुरी तरह सड़ रही थी और उसमें कीड़े रेंग रहे थे। यह देख कार्यकर्ता मिल प्रबंधन पर भड़क उठे और मौके पर ही जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद जब अन्य गोदाम का निरीक्षण किया गया तो 94 हजार कुंतल चीनी जिसका निर्माण वर्ष 2019- 20 में किया गया था। वह खराब होने की स्थिति में पाई गई। जहां किसान भुगतान के लिए मारा मारा घूम रहा है, वहीं मोरना मिल के गोदामों में 184 करोड़ रुपये की चीनी मौजूद है और उसमें भी करोड़ों की चीनी या तो खराब हो चुकी है या खराब होने की कगार पर है।

मोरना चीनी मिल के किसानों का भविष्य अंधकार में

मोरना चीनी मिल के गोदामों में इतने बड़े स्टॉक को देखकर किसान असमंजस में हैं। चीनी की हालत देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर है। भाकियू नेता विकास चौधरी ने बताया कि फिलहाल चीनी मिल मोरना पर करोड़ों रुपए का कर्ज है, परंतु मिल प्रबंधन स्टॉक में रखी करोड़ों रुपए की चीनी को खराब करने पर तुला है। जिससे क्षेत्र के किसानों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। जिस तरह से मोरना मिल के गोदामों में करोड़ों रुपए की चीनी सड़ रही है और मिल के सातों गोदामों के बाहर बैंक में बंधक होने के नोटिस लगे हैं। इससे वह दिन दूर नहीं है, जब मोरना चीनी मिल बिकने की कगार पर खड़ी होगी।

प्राइवेट से करीब 100 रुपये ऊपर बिकती है चीनी

प्राइवेट चीनी मिलों में सरकारी चीनी मिल की चीनी 100 रुपये कुंतल अधिक रेट पर बिकती है। इसके चलते सरकारी मिलों को अधिक मुनाफा होना चाहिए, लेकिन सरकार सरकारी चीनी मिल को नुकसान होता है। मिल के गोदामों में जहां वर्ष 2017-18 में निर्मित की गई 376 कुंतल चीनी सड़ रही है। वहीं 2019-20 में निर्मित की गई 94 हजार कुंतल चीनी खराब होने की कगार पर है। पूछने पर मिल प्रबंधन ने बताया कि पुरानी चीनी को गलाकर नई चीनी तैयार करने में बहुत बड़ी लागत आती है। इस कारण इस चीनी को नीलाम किया जाएगा।

सरकार मचा रही भुगतान का शोर

एक ओर तो सरकार किसानों का भुगतान करने के लिए प्रयास करती दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी ओर मोरना मिल लगातार कर्ज में डूब रही है। मिल प्रबंधन ने बताया कि किसानों का भुगतान बैंकों से कर्ज लेकर किया जा रहा है। जब मिल प्रबंधन के पास इतने बड़े स्टॉक में चीनी मौजूद है तो बैंकों से कर्ज लेकर भुगतान किया जाना एक बड़ा सवाल पैदा कर रहा है। 20 अक्टूबर से चीनी मिल का शुभारंभ होने जा रहा है। इसमें किसानों का गन्ना तैयार खड़ा हुआ है, जिसके चलते मिल में चीनी रखने के लिए अभी गोदाम खाली भी नहीं हुए, अब सवाल यह उठता है कि मिल चलने के बाद चीनी का स्टॉक किस गोदाम में किया जाएगा।

क्या कहते हैं अधिकारी

मिल प्रबंधक कमल रस्तोगी ने बताया कि शुगर मिल में 17 -18 के करीब 376 बोरे रखे हुए हैं, जिसमें ज्यादातर चीनी खराब हो चुकी है। उस चीनी को गलाया जाएगा। वहीं 2018 व 2019 की करीब 94 हजार कुंतल चीनी रखी हुई है, जिसकी एक्सपायरी 24 माह की होती है। चीनी बेचने का कार्य किया जा रहा है। जल्द ही चीनी को बेचा जाएगा। एक्सपायर चीनी की नीलामी की जाएगी, बाकी चीनी बेचकर किसानों का भुगतान किया जाएगा।

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