बिहार बाढ़ इफेक्टः एक ऐसी बीमारी दे जाती है बाढ़, जो जानकारी में तो है, पर है लाइलाज

बिहार बाढ़ इफेक्टः एक ऐसी बीमारी दे जाती है बाढ़, जो जानकारी में तो है, पर है लाइलाज

Brijesh Singh | Publish: Jul, 26 2019 05:46:45 PM (IST) Muzaffarpur, Muzaffarpur, Bihar, India

Bihar Flood 2019: बिहार की बाढ़ हर साल हजारों घर-बार लीलती है, साथ ही प्रभावितों ( Flood victim ) को एक ऐसी बीमारी दे जाती है, जिसका कोई इलाज नहीं होता।

( पटना, प्रियरंजन भारती )। बिहार में बाढ़ ( flood In Bihar ) से हर साल बड़ी आबादी प्रभावित होती है। हजारों की संख्या में घर-बार, जान-माल के नुकसान का तो आंकड़ा फिर भी सरकार के पास मिल जाता है, लेकिन इस बाढ़ के प्रभावितों में एक ऐसा बड़ा वर्ग भी होता है, जो हर-दिन मरता है, उस पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता। दरअसल, यह वर्ग घर-बार, धन-संपदा खोकर आगे के जीवन की चिंता में गहरे तक अवसाद में जा चुके उन पीड़ितों का होता है, जो एक खास तरह की बीमारी ( Disorder ) से पीड़ित हो जाते हैं, जिसकी यूं तो बिहार सरकार को भी जानकारी है, लेकिन उनके इलाज की न तो कोई व्यवस्था सरकार के पास है और न ही कोई योजना ही अब तक बन पाई है। नतीजा यह होता है कि यह पीड़ित सालों-साल अवसाद की इसी अवस्था में जीने को मजबूर हो जाते हैं।

इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं बाढ़ पीड़ित

बाढ़ से तबाह लोगों के घर-बार सब तबाह हो जाते हैं। बर्बादी के बाद इन्हें सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ जाती है। तात्कालिक राहत तो इन्हें मिल जाती है, पर संपत्ति के नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, परिवार की परवरिश की साधनहीनता, बेटी की शादी और खेती को फिर से शुरू कर मुनाफे तक लाने की चिंता में रहवासी डूब जाते हैं।प्रभावितों की नींद गायब हो जाती है और नियमित व्यवहार में बड़ा परिवर्तन होने लग जाता है। मनोचिकित्सक डॉक्टर विनय कुमार बताते हैं कि इस तरह की बीमारी को ( Post Tromatic Stress Disorder ) या (pts) के नाम से जाना जाता है। ऐसे मामले बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, पर सरकार ऐसे मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर नहीं है। मुजफ्फरपुर अस्पताल के डॉ रवि कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों में ऐसी शिकायतें खूब देखी जाती हैं। हम लोग इसकी गंभीरता को समझते हुए मरीजों को शांत कर समझाने-बुझाने का भरसक प्रयास करते हैं।

2017 की सर्वे रिपोर्ट में पहली बार सामने आया था यह तथ्य
2017 में आई बाढ़ के बाद कटिहार के सरकारी अस्पताल में इस बीमारी के लक्षणों वाले करीब 180 मरीज पाए गए थे। इनमें ऐसे भयंकर लक्षणों के मौजूद रहने से अस्पताल के डॉक्टर भी चकित थे। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ( Bihar Health Department ) अलग ही दलील देता है। विभाग का तर्क है कि बीमारियों के इलाज के लिए सभी अस्पताल तैयार हैं। मरीजों को दवा भी दी जा रही है। अभी इस बार बाढ़ का सिलसिला शुरू हुआ है। यह अक्टूबर-नवंबर तक जारी रहेगा। ऐसे में बीमारों की तादाद बढ़ेगी ही । पर ये लाचार लोग आखिर करें तो क्या। इन्हें तो पता भी नहीं कि यह कोई बीमारी है या बदकिस्मती?

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