बिहार डीजीपी का दावा शेल्टर होम देहशोषण मामले की जांच सीबीआई से करवाने की नहीं जरूरत

इस मामले में सूबे की पुलिस ने अपना पक्ष रखा है

By: Prateek

Published: 24 Jul 2018, 06:17 PM IST

(मुजफ्फपुर): मुजफ्फपुर शेल्टर होम देहशोषण मामला जिसने पुरे देश को सकते में ला दिया है। सड़क से लेकर संसद के सदन तक इस मामले को उठाया जा रहा है। इस मामले में सूबे की पुलिस ने अपना पक्ष रखा है। राज्य के डीजीपी के एक ताजा बयान के अनुसार राज्य पुलिस मामले की जांच सीबीआई से करवाने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है।

 

बता दें कि बिहार के विभिन्न शेल्टर होम्स से नाबालिग लड़कियों व महिलाओं के देहशोषण के मामले सामने आते रहे। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम देहशोषण मामला सामने आने के बाद इन अल्पावास गृहों में हो रहे महापाप का सबसे बड़ा खुलासा हुआ। इस मामले के उजागर होने के बाद से विपक्ष ने सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा व लोकसभा में विपक्षी नेता इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने को लेकर मांग उठा रहे है। ऐसे में बिहार पुलिस का पक्ष बहुत अहमियत रखता है।


बिहार पुलिस के डीजीपी ने मंगलवार को मीडिया से बात करते वक्त इस मामले में अपना पक्ष रखा। डीजीपी केएस द्विवेदी ने बताया कि मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में रहने वाली 44 लड़कियों में से 42 का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। बाकी बची दो लड़कियों की तबीयत खराब थी जिस वजह से उनका परीक्षण नहीं करवाया जा सका। 42 में से 29 लड़कियों के साथ देहशोषण की पुष्टि हुई। इस मामले के 11 आरोपियों में से 10 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

 

 

 

 

 

 

जांच के मुद्ये पर यह बोले डीजीपी

मीडिया की ओर से सीबीआई जांच की बात पूछने पर डीजीपी की ओर से जवाब दिया गया कि पुलिस पुरी तरह से आश्वस्त है कि इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की कोई आवश्यकता नहीं है और पुलिस अपनी ओर से की गई कार्रवाई से पुरी तरह से संतुष्ट है।


शेल्टर होम से गायब लड़कियों के बारे में जानकारी देते हुए डीजीपी ने बताया कि 15 दिसंबर 2013 को चार लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली थी। जांच करने पर पता चला कि तीन लड़कियों की मौत हो गई हैं,जिनमे से दो ने अस्पताल में दम तोड़ा। केवल एक ही लड़की लापता है।

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