'लहरों से डर के नौका पार नहीं होती, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती'

'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,' राजेश रंजन कुमार के सामने जब जिंदगी पहाड़ की तरह खड़ी थी, तब उसका हिम्मत का जज्बा ही काम आया। यह जज्बा अब पूरे गांव को प्रेरित कर रहा है। अपने हाथों से अपनी किस्मत बदलने वाले रंजन अब युवाओं की किस्मत उनकी मेहनत से लिख रहे हैं। इसी आत्मविश्वास की बदौलत रंजन ने कृषि क्षेत्र में अपना झंडा बुलंद कर दिया।

 

By: Yogendra Yogi

Published: 26 Aug 2020, 08:07 PM IST

मुजफ्फरपुर(बिहार): 'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,' राजेश रंजन कुमार के सामने जब जिंदगी पहाड़ की तरह खड़ी थी, तब उसका हिम्मत का जज्बा ही काम आया। यह जज्बा अब पूरे गांव को प्रेरित कर रहा है। अपने हाथों से अपनी किस्मत बदलने वाले रंजन अब युवाओं की किस्मत उनकी मेहनत से लिख रहे हैं। रंजन ने लगन और मेहनत से साबित कर दिय कि किस्मत के भरोसे बैठे रहने से कुछ हासिल नहीं होने वाला। किस्मत बदलनी है तो तब तक निरंतर कठोर मेहनत करते रहनी है, जब तक मंजिल नहीं मिल जाए। इसी आत्मविश्वास की बदौलत रंजन ने कृषि क्षेत्र में अपना झंडा बुलंद कर दिया।

जैविक घोषित हुआ गांव
(Bihar News ) मुजफ्फरपुर के मड़वन (Village of Muzaffarpur ) प्रखंड की गवसरा पंचायत के भागवतपुर गांव निवासी राजेश रंजन की बदौलत यह गांव अब जिले का एकमात्र जैविक ग्राम घोषित किया (Declear organic village ) जा चुका है। राजेश ने कभी चुनौतियों के सामने सिर नहीं झुकाया, बल्कि हर चुनौती का तब तक डटकर मुकाबला किया, जब तक उसे सफलता में नहीं बदल लिया। जैविक खेती के जरिए जीवन के सपने बुनना राजेश के लिए आसान नहीं रहा। इस चौबीस वर्षीय युवा के सिर से पिता का साया उठ गया। जीविकोपार्जन के लिए एकमात्र (Organic farming ) खेती ही आधार रह गया। खेती से परिवार चलाने मे आने वाली मुश्किलों ने नई राह सुझा दी, वह थी जैविक खेती की।

जैविक खेती से आमदनी
पारंपरिक धान और गेहूं की खेती करने के बजाय वे जैविक तरीके से सब्जी की खेती करना राजेश को मुनाफे का सौदा लगा। इसकी मांग बाजार में अधिक है। जैविक खेती के गुर इन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र सरैया में सीखे। पिता के द्वारा विरासत में मिली मात्र दो हेक्टेयर जमीन पर जैविक पद्धति से सब्जी की खेती कर ये साल में लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं।

लहसुन रोपने का यंत्र बनाया
हाल ही में इन्होंने खुद की तकनीक से लहसुन रोपने का यंत्र भी तैयार किया है। ये कहते हैं कि खेती से संबंधित विशेष जानकारी इन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र सरैया ,डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, आइसीएआर पूसा दिल्ली, नेशनल वर्कशॉप ऑन मार्केटिंग स्मार्ट बैकुंठ मेहता नेशनल इंस्टीट्यूट आफ को-ऑपरेटिव मैनेजमेंट पुणे महाराष्ट्र , वेलनेस एक्सपो 2017 व 2018 में बिहार की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए प्राप्त की।

बूंद-बूंद सिंचाई को बढ़ावा
इन्होंने गांव के अन्य किसानों को जागरूक करते हुए सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन तकनीक को बढ़ावा दिया है। इसे देखते हुए निकरा (नेशनल इनोवेश्न्स ऑन क्लाइमेट रेजिलिएन्ट एग्रीकल्चर) ने भागवत पुर को गोद लिया और सप्ताह में दो दिन यहां के लोगों को मौसम व कृषि से जुड़ी हुई जानकारी दी जाती है। वही इन्हेंं निकरा के एफआइएफ के रूप में चयन भी किया गया है। इसके अलावा क्लाइमेट रेजीलिएंट एग्रीकल्चर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य सलाहकार भी ये बनाए गए हैं। इसके साथ ही इन्हेंं कृषि विज्ञान केंद्र सरैया के वैज्ञानिक सलाहकार समिति का सदस्य भी बनाया गया है।

मिला जैविक किसान का सम्मान
राजेश ने आत्मा (Organic farmer award ) द्वारा रजिस्टर्ड कृषक हित समूह का भी गठन किया है। इसके माध्यम से गांव के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से जोड़कर मिट्टी जांच, वर्मी कंपोस्ट उत्पादन आदि का प्रशिक्षण दिलवाते हैं। गांव के 70 फीसद किसान खुद का उत्पादित कंपोस्ट का प्रयोग करते हुए जैविक खेती कर रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2018 में भागवत पुर को जैविक ग्राम घोषित किया था। वही इन्हेंं जैविक किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया था।

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