लॉक डाउन के डर से फिर ठेकेदार रहे नीलामी से दूर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नागौर. शराब की शेष 38 दुकानों पर भी लॉक डाउन की छाया भारी रही। शनिवार को हुई नीलामी में सिर्फ आठ दुकानें ही बिक पाईं। तीस दुकानें फिर भी बाकी रह गईं। नीलामी के छठे चरण के बाद भी जिले की पूरी 273 दुकानें फिर भी नहीं उठ पाई हैं। इन आठ दुकानों के लिए भी आबकारी विभाग की टीम को अपने स्तर पर प्रयास करने पड़े थे।

By: Ravindra Mishra

Published: 17 Apr 2021, 11:02 PM IST

-सिर्फ आठ दुकानें बिकी, छठी बार नीलामी के बाद भी 30 दुकानें बाकी
सूत्रों के अनुसार ये आठों दुकानें रिजर्व प्राइस से मात्र पांच-दस हजार ज्यादा पर उठीं। शेष तीस दुकानों के लिए तो बोली लगाने वाले तक नहीं मिले। जबकि सरकार ने नीलामी के तीन चरण में भी दुकानों के नहीं उठते देख काफी रियायत की थी। एक अप्रेल की नीलामी में बोलीदाता को विशेष राहत देते हुए बोली छूटने के बाद खरीदार के किसी कारण हटने पर दूसरे नंबर के ठेकेदार को उसकी रेट पर दुकान देना तक तय तक हो चुका था। दस अप्रेल को इन 72 दुकानों की नीलामी के दौरान 67 दुकानों की रिजर्व प्राइस और कम्पॉजिट फीस में बीस फीसदी की कमी तक कर दी गई। इसके बाद भी 30 दुकान के लिए तो कोई खरीदार तक नहीं पहुंच पाया।
सूत्रों के अनुसार नीलामी आधा दर्जन बार हो चुकी। ई-ऑक्शन से पहली बार हो रही नीलामी में खरीदारों के मोहभंग ने संभवतया सरकार को रेट कम करने पर मजबूर किया है। जिले में 273 दुकानें हैं। नीलामी के छह चरण भी हुए पर 30 दुकानें फिर भी बाकी रह गईं। यानी बारह फीसदी से अधिक दुकानें दो महीने चले मैराथन प्रयास के बाद भी बिक नहीं पाईं। असमंजस के साथ कोरोना काल का घाटा और नए सिस्टम में नुकसान की आशंका ने भी कई ठेकेदारों को लगता है शराब के कारोबार से अलग कर दिया है। बताया जाता है दुकानों का एमाउण्ट बढ़ाना, कोरोना में बिक्री कम से घाटा ज्यादा लगने के साथ नए सिस्टम में पेनल्टी समेत अन्य ज्यादा की आशंका भी ठेकेदार को इससे दूर रख रही है।

बमुश्किल मिले एक-एक खरीदार
सूत्रों के अनुसार 38 में से 8 दुकानों के एक-एक खरीदार ही आए। ये रिजर्व प्राइस से पांच-दस हजार रुपए अधिक में बिक गईं, जबकि शेष दुकानों के लिए तो एक भी खरीदार नहीं पहुंचा। हालांकि सभी दुकानों की नीलामी का टारगेट कब का पूरा हो चुका है।

बढ़ता कोरोना और लॉक डाउन
सूत्र बताते हैं कि नीलामी के दौरान कोरोना संक्रमण एक बार फिर बढ़ गया। उदयपुर, जयपुर समेत कुछ जिलों में तो पहले ही शाम छह बजे से लॉक डाउन होने लगा था। इधर, शुक्रवार से ढाई दिन का वीकेण्ड पूरे प्रदेश में लग गया। बताते हैं कि इससे भी शराब के ठेकेदार विचलित हो गए। उनको शंका है कि पिछले बरस के लॉक डाउन व अन्य स्थितियों में घाटा लगा, अब भी कहीं वैसे ही हालात नहीं हो जाएं। उनका मानना है कि शराब की दुकानों की बिक्री शाम पांच से आठ बजे के बीच ही होती है, उसमें भी दुकानें बंद करनी पड़ेगी तो फिर फायदा कैसे होगा।

इनका कहना है

शनिवार को छठे चरण में 38 दुकानों की नीलामी होनी थी, सिर्फ आठ दुकानें ही निकल पाईं। इसके लिए आबकारी टीम ने भी अपने स्तर पर प्रयास किए थे। लॉक डाउन लगने और शाम को पांच-छह बजे दुकान बंद होने की आशंका या डर, ठेकेदारों को सता रहा है। वे घाटे की आशंका के चलते बोली लगाने नहीं आ रहे।

मोहनराम पूनिया, जिला आबकारी अधिकारी नागौर

Ravindra Mishra
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