script10101 | कौन पी गया 4100 करोड़ का पानी | Patrika News

कौन पी गया 4100 करोड़ का पानी

भीषण गर्मी में कंठ तर करने में हो रही मशक्कत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। कभी खाली मटकियां लेकर प्रदर्शन तो कहीं घरों से दूर सार्वजनिक नलकूप पर एक घड़े मीठे पानी के लिए घंटों इंतजार जिले के लोगों का नसीब

नागौर

Updated: April 22, 2022 01:06:20 pm

नागौर . जिला मुख्यालय पर नागौर लिफ्ट परियोजना (इंदिरा गांधी नहर) का पानी पहुंचे करीब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन आए दिन पानी के लिए सडक़ पर आकर संघर्ष करना शहरवासियों की मजबूरी बन गया है।
परियोजना के पहले चरण में वर्ष २०१० में नहरी पानी नागौर शहर में पहुंच गया। इसके बावजूद शहरवासियों को आज भी पर्याप्त पेयजल नसीब नहीं हो रहा। शहर में आए दिन पानी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। एक ओर सरकार ‘हर घर नल’ योजना के जरिए गांव-ढाणियों में पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय के लोग टैंकर मंगवाकर या घरों में संग्रहित वर्षाजल से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
Water Crisis in Nagaur
नागौर के नकास दरवाजा इलाके में पानी की समस्‍या को लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं
एक भी कार्य समय पर पूरा नहीं किया
जिले के लोगों को हिमालय का मीठा पानी पिलाने के लिए नागौर जिले में दो चरणों में कार्य चला। प्रथम चरण २००६ में मंजूर हुआ। जिसमें कुल चार पैकेज बनाए गए। प्रथम पैकेज का कार्य जनवरी 2012 में पूर्ण हुआ, जबकि द्वितीय पैकेज का कार्य जून 2016 में पूरा हुआ, जिसमें नागौर व खींवसर तहसील के 167 गांवों व 2 कस्बों (नागौर व बासनी) को लाभान्वित किया गया, जबकि प्रथम पैकेज का काम जनवरी 2009 व द्वितीय पैकेज का कार्य जून 2014 में पूर्ण होना था।

तृतीय पैकेज में नागौर (मूण्डवा तहसील के गांव शामिल), डेगाना एवं मेड़ता तहसील के 151 ग्राम व 2 कस्बों (मूण्डवा व कुचेरा) को नागौर परियोजना से जोडऩा था। इस पैकेज का कार्य सवा 7 साल यानी जुलाई 2015 में पूरा होना था। अधिकारियों का कहना है कि इस पैकेज का 100 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि कई गांवों आज भी पानी नहीं पहुंच रहा है। यह कार्य मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य था, जो समय पर नहीं हो पाया।

चतुर्थ पैकेज में डेगाना एवं मेड़ता तहसील के 176 ग्राम व मेड़ता शहर को नहरी पानी से लाभान्वित करना था, जिसमें यहां भी अधिकारियों का दावा है कि 100 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। यह मई 2020 तक काम पूर्ण करने का लक्ष्य था, लेकिन हकीकत में यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया। हालांकि परियोजना के अधिकारियों का दावा है कि दोनों चरणों के तहत जिले के १२ कस्बों एवं १४८० गांवों को पानी दिया जा रहा है।
पहले चरण में ये शामिल
नहरी परियोजना के अनुसार पहले चरण में नागौर, खींवसर, मूंडवा, कुचेरा, मेड़ता, डेगाना समेत कुल ४९४ गांवों में पानी दिया जाना था।


दूसरे चरण में ये शामिल
नहरी पारियोजना के दूसरे चरण के तहत परबतसर, मकराना, डीडवाना, डेगाना, लाडनूं, कुचामन व नावां सहित ९८६ गांवों में पानी पहुंचाया जाना था।
केस - १
मूंडवा पंचायत समिति के खुडख़ुड़ा गांव में नहरी परियोजना के पहले चरण में पानी पहुंचाया जाना था। कागजों में यहां नहरी पानी पहुंच गया, लेकिन हकीकत में यह गांव आज भी पानी के लिए तरस रहा है।
केस - २
खींवसर पंचायत समिति के भावंडा गांव में प्रशासन नहरी पानी पहुंचाने का दावा करता है। लेकिन हकीकत में पानी के दर्शन तो दूर पाइप लाइन तक गांव में नहीं पहुंच पाई है। गांव में पेयजल के कोई इंतजाम नहीं है।
केस - ३
मकराना पंचातय समिति के भैया कल्ला ग्राम पंचायत में राजस्व ग्राम नरूका की ढाणी में आज तक नहरी पानी नहीं पहुंचा, जबकि यह 2008 में राजस्व ग्राम घोषित हुआ था।

जिम्मेदारों के जवाब
मेरे क्षेत्र के 177 गांवों को जोड़ दिया
मेरे अधिकार क्षेत्र में कुल 177 गांवों को नहरी परियोजना से जोडऩे का काम था। जिसमें डेगाना के 113, जायल के 48 तथा नागौर के 16 गांव थे। इनमें दिसम्बर 2021 में काम पूरा हो गया। हालांकि हमने ठेकेदार का फाइनल भुगतान नहीं किया है। एक साल तक डिफेक्ट लायबिलिटी में रहेगा। इसके बाद दस साल तक मेंटेनेंस व मॉनिटरिंग का काम इसी कम्पनी का रहेगा।
- कैलाश चंद मीना, अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी, पीआईयू प्रथम, नागौर
प्रथम चरण का काम पूरा
नहरी योजना के प्रथम चरण में 5 शहर - नागौर, मूण्डवा, बासनी, कुचेरा व मेड़ता तथा 494 गांव शामिल थे। इसमें नागौर तहसील के 135 गांव, खींवसर के 88, मेड़ता के 193 तथा डेगाना के 78 गांव शामिल थे। सभी गांवों में पानी पहुंचा दिया है, यदि कोई गांव वंचित है तो पता करवाएंगे।
- भगवान सहाय जाजू, अधीक्षण अभियंता, नहरी परियोजना, नागौर
मंत्री को पत्र लिखा
राज्य सरकार ने नागौर सहित प्रदेश की आठ पेयजल योजनाओं को स्वायत्त शासन विभाग से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को हस्तांतरित करने के आदेश कर दिए हैं, इसके बावजूद नागौर में पीएचईडी द्वारा शहरी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था टेक ओवर नहीं की जा रही और न ही पर्याप्त जलापूर्ति की जा रही है। इसके चलते नगर परिषद को जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ रहा है। इसको लेकर पीएचईडी मंत्री डॉ.महेश जोशी को पत्र लिखा है।
- मीतू बोथरा, सभापति, नगर परिषद, नागौर

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