नागौर शहर के पारम्परिक जल स्रोतों की आड व अंगोर भूमि पर 56 अतिक्रमण साबित पर प्रशासन नहीं जुटा पा रहा हटाने की हिम्मत

नागौर तहसीलदार ने 10 महीने पहले जांच कर दी अतिक्रमियों की रिपोर्ट
जांच करवाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की बजाए मारी कुंडली, शहर के जड़ा तालाब, बख्तासागर, प्रतापसागर, दुलाया, लाल सागर, समस तालाब, गांछोलाई नाडी, तेलीनाडा, मुंदोलाव नाडी, गिनाणी तालाब की आड व अंगोर में लोगों ने कर लिए कब्जे

By: shyam choudhary

Published: 26 Nov 2020, 10:55 AM IST

नागौर. नागौर शहर के 12 नाडी-तालाबों की आड भूमि, अंगोर भूमि व अंगोर भूमि पर रसूखदारों के 56 अतिक्रमण दस महीने पहले तहसीलदार की जांच में साबित हो चुके हैं, इसके बावजूद जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। प्रशासन की सुस्ती एवं जानबूझकर आंखें मूंदने से अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और आए दिन सरकारी जमीनों पर कब्जे कर रहे हैं।

गौरतलब है कि करीब दस माह पूर्व जनवरी, 2020 में नागौर एसडीएम ने नागौर तहसीलदार को निर्देश देकर उपखंड क्षेत्र के पारम्परिक जल स्रोतों, जल स्रोतों की आड भूमि, अंगोर भूमि यथा तालाब, नाडी, बावड़ी क्षेत्र आदि में किए गए अतिक्रमण की मौका रिपोर्ट मांगी थी, जिस पर तहसीलदार ने 20 जनवरी 2020 को शहर के 12 पारम्परिक जल स्रोतों की जांच कर रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कुल 56 अतिक्रमण प्रमाणित किए गए।

15 दिन में मांगी थी रिपोर्ट, 300 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
तहसीलदार की रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन एसडीएम दीपांशु सांगवान ने 21 जनवरी को जिला कलक्टर को पत्र लिखकर शहर के जड़ा, तालाब, बख्तासागर, प्रताप सागर, दुलाया, लाल सागर, समस तालाब, गांछोलाई, मुंदोलाव नाडी, गिनाणी तालाब, कृषि मंडी के पश्चिम दिशा में स्थित नाडी की आड व अंगोर भूमि पर किए गए विधि विरुद्ध अतिक्रमणों की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की थी। एसडीएम के पत्र पर तत्कालीन कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में नगर परिषद आयुक्त व तहसीलदार की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन 300 दिन बीतने के बावजूद धरातल पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आई है।

खुद पर ही उठे सवाल तो दबा दी रिपोर्ट
तत्कालीन जिला कलक्टर ने तीन सदस्यीय बनाकर जांच के आदेश तो दे दिए, लेकिन जांच आदेश में कुछ बिन्दु ऐसे लिख दिए, जिससे जांच करने वाले अधिकारियों एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर आंच आने लगी, जिस पर मामला दबा दिया गया।

  • कलक्टर ने आदेश में लिखा कि अतिक्रमणों की जानकारी होने के बावजूद एसडीएम, तहसीलदार व आयुक्त द्वारा अतिक्रमियों एवं दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?
  • आयुक्त, तहसीलदार, गिरदावर तथा पटवारी ने अतिक्रमियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
  • क्या नगर परिषद नागौर द्वारा किसी भूमि विशेष का विधि विरुद्ध नियमन किया गया है?
  • कलक्टर ने नागौर के खसरा नम्बर 53 पर भी किए जा रहे निर्माणों की मौका रिपोर्ट मांग ली। कलक्टर ने आदेश में लिखा कि उपखंड अधिकारी व आयुक्त को निर्माणों की जानकारी है।

पत्रिका व्यू... हर मामले में हाईकोर्ट आदेश दे, यह जरूरी तो नहीं
जिला प्रशासन ने गत वर्ष जोधपुर हाईकोर्ट के आदेश पर अगस्त में ताऊसर ग्राम पंचायत की अंगोर व चरागाह भूमि पर बंजारा समाज के अतिक्रमण तोड़े थे। हालांकि अतिक्रमण हटाने का काफी विरोध हुआ, लेकिन पुलिस एवं प्रशासन ने सख्ती से पेश आकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया था। शहर के पारम्परिक जल स्रोतों की अंगोर व आड भूमि पर किए गए अतिक्रमण का मामला ताऊसर से भी गंभीर है, लेकिन यहां अब तक हाईकोर्ट ने हटाने के आदेश नहीं दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या हर मामले में हाईकोर्ट के आदेश जरूरी हैं। क्या प्रशासन केवल हाईकोर्ट के आदेश पर ही कार्रवाई करेगा? प्रशासन को चाहिए कि अवैध रूप से सरकारी जमीनों पर कब्जे करने वाले अतिक्रमियों एवं उनसे मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, ताकि भविष्य में कोई अतिक्रमण की हिमाकत नहीं करे।

जानकारी नहीं, दिखवाता हूं
पारम्परिक जल स्रोतों की आड व अंगोर भूमि पर अतिक्रमण को लेकर पूर्व कलक्टर द्वारा जारी आदेश की जानकारी नहीं है। मैं पता करवाता हूं। अंगोर व आड भूमि पर किए गए अतिक्रमण हटवाए जाएंगे।
- डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर, नागौर

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