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नागौर

सौ डॉलर की ऑनलाइन खरीद करने वाले डॉक्टर को लगी करीब दस हजार की चपत

डॉलर की ऑनलाइन खरीद करने वाले शहर के एक चिकित्सक भी साइबर ठगों की चपेट में आ गए। चिकित्सक को करीब दस हजार की चपत तो लगी पर उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई में जिस-जिस खाते में यह रकम ट्रांसफर हुई उन्हें फ्रीज कर दिया गया है।

नागौरJun 29, 2024 / 09:13 pm

Sandeep Pandey

साइबर ठगी का हुआ शिकार, अलवर समेत आसपास के तीस खाते फ्रीज

फाइनेंस ऐप के जरिए की थी खरीद

नागौर. डॉलर की ऑनलाइन खरीद करने वाले शहर के एक चिकित्सक भी साइबर ठगों की चपेट में आ गए। चिकित्सक को करीब दस हजार की चपत तो लगी पर उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई में जिस-जिस खाते में यह रकम ट्रांसफर हुई उन्हें फ्रीज कर दिया गया है। अधिकांश खाते अलवर/मेवात इलाके के हैं।सूत्रों के अनुसार जेएलएन अस्पताल के डॉ साजिद के साथ यह ठगी हुई है। हुआ यूं कि उन्हें ऑनलाइन फाइनेंस ऐप के जरिए सौ डॉलर खरीदने थे। गत 22 जून को इस ऐप के जरिए ऑनलाइन चेटिंग प्रक्रिया के तहत उन्होंने सौ डॉलर खरीदने की औपचारिकता पूरी की। साथ ही यूपीए के माध्यम से नौ हजार 350 रुपए भी ट्रांसफर कर दिए। वहां रकम तो मिल गई पर इसके बदले में डॉलर नहीं आए। वैसे तो पंद्रह मिनट में ही यह एक्सचेंज हो जाता है।
डॉ साजिद ने थोड़ा इंतजार किया, जब दो दिन बाद भी डॉलर नहीं मिले तो उन्होंने पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत डाली। कोतवाली थाने के साइबर एक्सपर्ट राकेश सांगवा से जब डॉक्टर ने बात की तो ट्रांजेक्शन के ग्यारह सौ रुपए तो होल्ड हो गए, जबकि यह राशि करीब तीस खातों में ट्रांसफर की गई, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया।
सूत्र बताते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आ रही है। कई शिकायतें ऐसी मिली कि रकम देने के बाद भी उपभोक्ता को सामान नहीं मिला, कहीं यह माल दूसरी कम्पनी का भेज दिया गया। और तो और कई बार तो पार्सल पहुंचने के बाद भी उपभोक्ता से अलग से रकम ऐंठ ली गई। कुछ समय पहले इसी तरह की शिकायत पर शॉपिंग ऐप/कम्पनी को पुलिस की ओर से चेताया भी गया था। यह भी सामने आया कि कुछ फर्जी वेबसाइट और ऐप भी बाजार में आ गए हैं जो अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं।
नहीं खुल रहे फ्रीज खाते

सूत्रों से पता चला है कि करे कोई और भरे कोई वाली कहावत यहां भी लागू हो रही है। अब ठगी की रकम जिस-जिस खाते में ट्रांजेक्शन होती है, समय पर शिकायत मिलने के बाद इन खातों को फ्रीज कर दिया जाता है। यानी ठगी की रकम भले ही किसी सब्जी/चाय वाले को मिले या फिर किसी अन्य को। अब खाते फ्रीज होने पर इन लोगों को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है। आलम यह है कि कई-कई महीनों से ये खाते बंद पड़े हैं। इस तरह की दर्जनों शिकायत साइबर थाने तक पहुंच रही है। करीब सौ से अधिक खाते तो नागौर जिले में फ्रीज पड़े हैं, ये उन लोगों के खाते हैं जिनमें अलग-अलग मद में रकम ट्रांसफर हो गई।
इस तरह की गड़बड़ी भी

सूत्र बताते हैं कि साइबर ठग वैसे भी किराए के खातों के जरिए ठगी करते हैं फिर यह रकम इधर-उधर लोगों से होते हुए दुकानदार/व्यापारी तक पहुंचती है। ऐसे में जब जांच होती है तो पेमेंट जिन-जिन खातों में ट्रांसफर हुआ वो फ्रीज हो जाते हैं। कई अनजान लोग दुकानदारों के पास पहुंचकर नकदी की डिमाण्ड कर ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने का खेल भी करते हैं।
इनका कहना

जाने-अनजाने में ठगी की रकम आने पर खाते फ्रीज होते हैं। जरूरी जानकारी बैंक को देकर आमजन यह खाते चालू करा सकते हैं। अनजान व्यक्ति के जरिए रकम ऑनलाइन लेने में सावधानी की जरूरत है।
-उम्मेद सिंह, सीओ साइबर थाना नागौर

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