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नागौर

पुराने अस्पताल के बदले नाम पर शुरू हुआ बवाल

सर्वसमाज के लोगों ने जहां पुराने अस्पताल का नाम बदलने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया इस पर मंगलवार को अस्पताल का नाम वापस भामाशाह सेठ श्री वल्लभ रामदेव पित्ती राजकीय अस्पताल कर दिया गया।

नागौरJun 25, 2024 / 09:27 pm

Sandeep Pandey

सर्वसमाज की ओर से जिला कलक्टर को दिया गया ज्ञापन

अपने स्तर पर जेएलएन अस्पताल के नामकरण पर जताया आक्रोश

नागौर. जेएनएन अस्पताल की एमसीएच विंग पुराने अस्पताल में शिफ्ट होने में पता नहीं कितना समय लगेगा पर विवाद होना शुरू हो गया। सोमवार को सर्वसमाज के लोगों ने जहां पुराने अस्पताल का नाम बदलने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, वहीं शिवसेना ने जल्द से जल्द इसे शुरू करवाने की मांग पर आंदोलन का ऐलान किया।
अखिल भारतीय वैश्य सम्मेलन व अग्रवाल पंचायत ट्रस्ट समेत सर्वसमाज के प्रतिनिधि सोमवार को जिला कलक्ट्रेट पहुंचे। अग्रवाल पंचायत ट्रस्ट के अध्यक्ष मांगीलाल बंसल, समाजसेवी भोजराज सारस्वत, सुरेश पित्ती, महेंद्र पहाडिय़ा, दिलीप पित्ती आदि का कहना था कि भामाशाह सेठ श्रीवल्लभ रामदेव पित्ती ने करीब अस्सी साल पहले लाखों रुपए लगाकर इस अस्पताल का निर्माण करवाया था, कुछ समय पहले इसे बंद कर दिया गया। ऐसे में रोगियों की परेशानी बढ़ गई। इसे दोबारा शुरू करने की मांग हुई तो एमसीएच विंग को यहां शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू की जा रही पर पुराने अस्पताल से भामाशाह का नाम ही मिटा दिया गया, उसके स्थान पर जेएलएन अस्पताल का बोर्ड लगा दिया गया जो उचित नहीं है। इसको लेकर जनता में आक्रोश है। सरकारी स्तर पर यह निर्णय भामाशाह व उसके परिवार के साथ छलावा है। ऐसे में अस्पताल का नाम दोबारा सेठ श्रीवल्लभ रामदेव पित्ती राजकीय सिटी चिकित्सालय किया जाए। समाजसेवी भोजराज सारस्वत ने कहा कि इस तरह का श्रेष्ठ कार्य करने वालों की उपेक्षा जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष दिलीप पित्ती का कहना था कि अस्पताल का नाम बदलने के साथ अन्य बीमारियों का भी इलाज यहां मिले, ऐसी व्यवस्था हो। इस संदर्भ में जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की गई।
पांच दिन में शिफ्ट नहीं तो आंदोलन

शिवसेना की ओर से कलक्टर को ज्ञापन देकर आगाह किया कि पांच दिन के भीतर एमसीएच विंग पुराने अस्पताल में शिफ्ट नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। जिला प्रमुख नारायणराम बिडियासर, धीरज कोठारी, घनश्याम पिचकिया, नारायण गिरी, प्रेम धोलिया, हजारीराम आदि की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि एसीएच विंग को यहां जल्द से जल्द शिफ्ट कर जनता को राहत दी जाए।

क्या हुआ जो पीएमओ डॉ पंवार हो गए एपीओ

नागौर. जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ महेश पंवार को एपीओ कर दिया गया है। उनका मुख्यालय जयपुर रहेगा। पुराने अस्पताल में शिफ्टिंग के पीछे की लेटलतीफी कम राजनीति कहो या फिर उनके इस संबंध में जारी आदेश पर नाराजगी, इसका शिकार डॉ पंवार को ही होना पड़ा। उनके स्थान पर डॉ सुनीता सिंह कामकाज देखेंगी।
पुराने अस्पताल में एमसीएच विंग की शिफ्टिंग नहीं हो पा रही। गत 19 जून को शिफ्टिंग होनी थी। बताया जाता है कि बाद में बड़े स्तर के इशारे पर इसे स्थगित किया गया। खास बात यह कि अप्रेल में इसे शिफ्ट हो जाना चाहिए। कलक्टर बार-बार ऐसा करने को कहते रहे। असल में नागौर मेडिकल कॉलेज को शुरू करने के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल का निरीक्षण होना है, एमसीएच विंग के फरवरी-मार्च में पुराना अस्पताल में होने वाली शिफ्टिंग अटकी तो निरीक्षण कैसे होता?एमसीएच विंग का भवन जर्जर होने के कारण एनएचएम के एमडी ने दिसम्बर में ही इसे पुराना अस्पताल में शिफ्ट करने के निर्देश दे दिए थे। बात तो तब बढ़ गई जब पीएमओ ने 19 जून को एमसीएच विंग शिफ्ट करने को लेकर जारी आदेश से राजनीतिक स्तर पर नाराजगी हो गई। बताया जाता है कि शिफ्टिंग के लिए बड़े समारोह की योजना चल रही थी। भाजपा सरकार के इस सरकारी कार्यक्रम में एक-दो मंत्री समेत कुछ राजनीतिक लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते थे। वे नहीं चाहते थे कि गुपचुप में यह शिफ्टिंग हो जाए।
खबर का असर

आंदोलन का नतीजा, बदला अस्पताल का नाम

सर्वसमाज के लोगों ने सोमवार को पुराने अस्पताल का नाम जेएलएन करने के विरोध में प्रदर्शन कर कलक्टर को ज्ञापन दिया था। इस पर मंगलवार को अस्पताल का नाम वापस भामाशाह सेठ श्री वल्लभ रामदेव पित्ती राजकीय अस्पताल कर दिया गया।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय वैश्य सम्मेलन व अग्रवाल पंचायत ट्रस्ट समेत सर्वसमाज के प्रतिनिधि सोमवार को जिला कलक्ट्रेट पहुंचे थे। अग्रवाल पंचायत ट्रस्ट के अध्यक्ष मांगीलाल बंसल, समाजसेवी भोजराज सारस्वत, सुरेश पित्ती, महेंद्र पहाडिय़ा, दिलीप पित्ती आदि ने ज्ञापन देकर अस्पताल का नाम पूर्ववत करने की मांग की थी। राजस्थान पत्रिका ने मंगलवार को Òपुराने अस्पताल के बदले नाम पर हुआ बवाल Ó शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।

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