सात दिनों में बालवाहिनियां की जानकारी नहीं देने पर कार्रवाई

Nagaur patrika.जिले के निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी अब नहीं चलेगी। बालवाहिनियों का संचालन नियमानुसार करना होगा, नहीं तो फिर अब उनको कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. Nagaur patrika

Sharad Shukla

Updated: 12 Feb 2020, 12:45:53 PM (IST)

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. जिले के निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी अब नहीं चलेगी। बालवाहिनियों का संचालन नियमानुसार करना होगा, नहीं तो फिर अब उनको कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में गुरुवार को जिला पुलिस अधीक्षक विकास पाठक की अध्यक्षता में बालवाहिनी योजना की हुई बैठक में यह स्पष्ट कर दिया कि सात दिन में सभी स्कूल संचालकों को स्कूली वाहनों का संपूर्ण ब्योरा उपलब्ध कराना पड़ेगा। इसमें यह भी कहा गया कि पूर्व में हुई बैठक में बालवाहिनी संचालन से जुड़े विषयों पर विस्तार से समझाने के साथ ही इसकी पालना आदि कर एक माह में पूरी सूचनाएं दिए जाने के लिए कहा गया था, लेकिन ज्यादातर ने यह जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई। जिला पुलिस अधीक्षक पाठक ने कहा कि बच्चों के साथ आए दिन होने वाली घटना के चलते अब ज्यादा सावधानियों को बरतना जरूरी है। इसके लिए यह बेहद आवश्यक है कि वह बालवाहिनियों के प्रावधानों का पूरी तरह से अनुपालन करें। बैठक में राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों में नागौर व कुचामन के स्कूल संचालक आदि भी मौजूद थे। जिला प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष माणक चौधरी ने बच्चों की परिवहन एवं स्कूली सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में अपनी सहमति जताते हुए कहा कि निजी स्कूल एसोसिएशन अपनी ओर से समस्त निजी शिक्षण संस्थानों को बैठक में शामिल हुए विषयों के संदर्भ में अवगत कराने के साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर देगा। इसके साथ ही इसकी पालना के लिए सभी स्कूली संचालकों से एसोसिएशन की ओर से आग्रह करने का काम भी कर दिया जाएगा।

प्रावधानों की आड़ में पैथालिाजिकल रिपोर्ट में रोगी से खिलवाड़
इनको भी देना पड़ेगा ध्यान
बैठक में राजकीय स्कूलों के संदर्भ में भी सुरक्षा व्यवस्था के तहत आवश्यक प्रबन्धन पर चर्चा हुई। इसमें शामिल हुए जिला शिक्षाधिकारी को स्पष्ट कर दिया गया कि वह जिले के सभी शिक्षण संस्थानों के संस्था प्रधानों को अवगत कराने के साथ ही सुरक्षा संबंधी अहर्ताओं को पूर्ण करने के लिए निर्देशित कर इसकी समीक्षा भी करेंगे। एसपी पाठक ने कहा कि स्कूली बस चालकों का वेरीफीकेशन भी होना चाहिए। बिना वेरीफिकेशन के स्कूली बस किसी भी चालक के हवाले नहीं करनी चाहिए। चालक को बस चालन का जिम्मा देने से पहले स्कूल संचालक उसकी जांच कराएं, तभी उसे बस चलाने का जिम्मा सौंपे।

जिला अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों के खाली पदों ने बिगाड़ी रोगियों की हालत
इसकी पालना करने के मिले निर्देश
बालवाहिनी में ड्राइवर को छोडकऱ नौ से अधिक सीट क्षमता वाली स्कूली बस के बाहरी भाग पर सुरहरी पीला रंग करना होगा। शिक्षण संस्था का नाम और पता बाहरी भाग पर उसके दोनो ओर खिडक़ी रेखा के नीचे पीले से भिन्न रंग में मोटे अछरों में पेंट किया जाना चाहिए। संबंधित पुलिस थाना के दूरभाष नंबर तथा चाईल्ड हेल्थ लाईन नंबर लिखाना होगा। शिक्षण संस्था यान के ड्राइवर के पास न्यूनतम पांच वर्ष पुराना व्यवसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। बस में विद्यार्थियों को उतारने व चढ़ाने में सहायता के कलिए एक परिचालक का होना भी जरूरी है। स्कूली बस का चालक खकी ड्रेस में होना चाहिए। प्रत्येक विद्यालय यातायात समन्वयक की नियुक्ति भी करेगा। इस संबंध में जिला परिवहन विभाग एवं पुलिस की ओर से संयुक्त रूप से अभियान चलाकर स्कूी बसों की जांच की जाएगी। इस दौरान नियमों की पालना नहीं होने पर वाहन को सीज करने का काम किया जाएगा। इसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, एनएच, स्टेट हाइवे आदि विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

केवल अपने स्वार्थ में 500 सौ साल पुराने दरख्त को काट डाला....!
इनका कहना है...
बालवाहिनी योजना की गुरुवार को हुई बैठक में सभी स्कूली संचालकों को सात दिन में इससे जुड़ी समस्त जानकारियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई तो फिर परिवहन विभाग ऐसे वाहनों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
ओमप्रकश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी नागौर

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned