एडीजे कोर्ट ने दिए नागौर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश

एडीजे कोर्ट ने दिए नागौर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
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Shyam Lal Choudhary | Updated: 14 Sep 2019, 11:06:21 AM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

ADJ court gave instructions for action against Nagaur Tehsildar शांतिभंग के एक ही मामले में गिरफ्तार लोगों की जमानत को लेकर अधिरोपित की अलग-अलग शर्तें, मामले को लेकर एडीजे कोर्ट में की गई अपील, कोर्ट ने तहसीलदार का निर्णय किया अपास्त

ADJ court gave instructions for action against Nagaur Tehsildar नागौर. श्रीबालाजी थाना पुलिस द्वारा शांतिभंग के एक मामले में गिरफ्तार दो पक्ष के लोगों के लिए अलग-अलग शर्तें अधिरोपित करने तथा थानाधिकारी का प्रमाण पत्र सरसरी तौर पर अस्वीकार करने पर नागौर तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट के खिलाफ एडीजे-1 कोर्ट कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एडीजे-1 प्रशांत शर्मा ने अपीलार्थी की अपील स्वीकार करते हुए तहसीलदार के आदेश को अपास्त करने आदेश जारी किए।

जानकारी के अनुसार श्रीबालाजी थानाधिकारी ने सुराणा निवासी लादूराम व कुनाराम ने अधिवक्ता अनिल गौड़ व राजेन्द्रसिंह राठौड़ के माध्यम से एडीजे संख्या एक में अपील पेश कर बताया कि 10 सितम्बर को सुराणा निवासी पाबूराम व हड़मानराम ने उनके खिलाफ थाने में लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर थानाधिकारी ने उनके तथा पाबूराम जाट व हड़मानराम के विरुद्ध परिवाद अंतर्गत धारा 151 के तहत तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत किया। जिस पर न्यायालय ने बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए एक ही मामले में उनके तथा विरोधी पक्ष के विरुद्ध पक्षपातपूर्ण व भेदभावपूर्ण कार्रवाई करते हुए उन्हें 10-10 हजार रुपए के व्यक्तिगत जमानत मुचलके व श्रीबालाजी थानाधिकारी द्वारा जारी चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत का आदेश पारित किया। अपीलार्थी ने यह भी बताया कि उनके द्वारा थानाधिकारी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर तहसीलदार ने स्वीकार नहीं किया। जिससे क्षुब्ध होकर अपीलार्थी ने यह अपील पेश कर बताया कि तहसीलदार ने यह आदेश विधि विरुद्ध, द्वेषतावश एवं पक्षपातपूर्ण रूख अपनाते हुए पारित किया है।

अपर लोक अभियोजक महावीर विश्नोई ने तर्क दिया कि तहसीलदार ने प्रश्नगत निर्णय, उनके समक्ष उपलब्ध प्राथमिक साक्ष्य के आधार पर पारित किया है, जिसमें तथ्यात्मक व कानूनी त्रुटि नहीं है। एडीजे-1 कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद यह माना कि प्रकरण एक प्रकृति, घटना एवं तथ्यों से सम्बन्धित होने के बावजूद तहसीलदार (कार्यपालक मजिस्ट्रेट) ने दोनों पक्षकारान पर बिना किसी युक्तियुक्त आधार के भिन्न-भिन्न जमानत सम्बन्धी शर्तें अधिरोपित की हैं, जिसका कोई कारण प्रकट नहीं होता है। वहीं अपीलार्थी की ओर से सम्बन्धित थाना प्रभारी से प्रमाण पत्र प्राप्त कर तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किए जाने व अपीलार्थी के विरुद्ध कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होने के बावजूद मात्र सरसरी तौर पर अस्वीकार कर दिया गया है। जिसके कारण अपीलार्थी को न्यायिक अभिरक्षा भी भुगतनी पड़ी है।

एडीजे-1 प्रशांत शर्मा ने अपीलार्थी की अपील स्वीकार कर तहसीलदार द्वारा जारी आदेश को अपास्त करते हुए पुनर्विचार करने के लिए निर्णय की प्रति प्रतिप्रेषित करने के आदेश दिए। साथ ही निर्णय की प्रति जिला कलक्टर नागौर को भेजकर अधीनस्थ न्यायालय के पीठासीन अधिकारी (तहसीलदार) के विरुद्ध इस सम्बन्ध में एक माह के भीतर उचित कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए।

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