scriptAEN said, 'Empty the MCH wing, there may be loss of life' | एईएन ने कहा, ‘खाली कर दो एमसीएच विंग, हो सकती है जनहानि’ | Patrika News

एईएन ने कहा, ‘खाली कर दो एमसीएच विंग, हो सकती है जनहानि’

चिकित्सा विभाग के सहायक अभियंता ने छह महीने पहले अपनी रिपोर्ट में चेताया, फिर भी नहीं हो रही मरम्मत
एमसीएच विंग के जर्जर भवन का मामला, मरम्मत के लिए तीन साल से मांग रहे बजट, नहीं हो रही सुनवाई

नागौर

Updated: March 29, 2022 12:10:33 pm

श्यामलाल चौधरी
नागौर. जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड (एमसीएच) विंग के भवन की जर्जर हालत को देखते हुए चिकित्सा विभाग के सहायक अभियंता ने करीब छह महीने पहले अपनी रिपोर्ट में भवन को खाली करने की सिफारिश कर दी थी। इसके बावजूद भवन की मरम्मत को लेकर विभागी के उच्च अधिकारी गंभीर नहीं हैं। एमसीएच विंग के भवन में आए दिन गिरने वाले प्लास्टर व जिन पिलर पर भवन को खड़ा किया गया है, उनमें क्रेक आने के कारण मरम्मत क लिए पिछले तीन साल बजट की मांग की जा रही है, लेकिन जयपुर में बैठे अधिकारी कागजों को इधर-उधर घूमाने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसे में एमसीएच विंग में कभी-भी बड़ा हादसा हो सकता है।
AEN said, 'Empty the MCH wing, there may be loss of life'
AEN said, 'Empty the MCH wing, there may be loss of life'
गौरतलब है कि एमसीएच विंग के भवन में निर्माण में बरती गई लापरवाही एवं किए गए भ्रष्टाचार के चलते आए दिन छत एवं दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है, जिससे कारण यहां भर्ती होने वाले मरीजों एवं उनके परिजन अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खास बात यह है कि भवन की मरम्मत को लेकर जेएलएन अस्पताल के पीएमओ एवं तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी द्वारा कई पत्र लिखने के बावजूद उच्चाधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यदि इसी प्रकार जयपुर में बैठे अधिकारी अनदेखी करते रहे तो एक दिन बड़ा हादसा होना निश्चित है।
एईएन ने साफ-साफ लिखा- फिर भी अधिकारियों के समझ क्यों नहीं आ रहा?
उपखंड नागौर के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता ने करीब छह महीने पहले 4 अक्टूबर 2021 को जिला कलक्टर के निर्देश के बाद एमसीएच विंग का निरीक्षण करने के बाद जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें उन्होंने बताया कि -
  • इस भवन को मरम्मत होने तक खाली रखना ही उचित होगा।
  • एईएन ने बताया कि भवन में छत का प्लास्टर जगह-जगह से गिर रहा है व काफी जगह छत में सिलन आ रही है। ऐसी स्थिति में छत का प्लास्टर कभी भी गिर सकता है।
  • कई पिलर भी क्रेक हैं। सिवर लाइन में गंदा पानी जगह-जगह रुका हुआ होने के कारण फर्श भी काफी जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है।
  • छत का प्लास्टर व कंक्रीट गिरने से जन हानि होने का अंदेशा हमेशा बना हुआ है।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को चार्जशीट देने के हुए थे आदेश
एईएन की रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर ने गंभीरता दिखाते हुए उसी दिन यानी 4 अक्टूबर 2021 को ही एनआरएचएम व पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को एमसीएच विंग की मरम्मत का तकमीना बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन पीडब्ल्यूडी एक्सईएन ने इसको लेकर रुचि नहीं दिखाई, जिस पर 16 अक्टूबर को कलक्टर ने नागौर पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को चार्जशीट देने के निर्देश जारी कर दिए। हालांकि अधीनस्थ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते चार्जशीट देने की कार्रवाई नहीं हुई।
बड़ा सवाल - मरम्मत के लिए कौन देगा बजट
एईएन की चेतावनी के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर के अधिशासी अभियंता एसडी गुप्ता ने नागौर पीएमओ को पत्र लिखकर बताया कि एमसीएच विंग के भवन की मरम्मत करने के लिए 1.51 करोड़ रुपए का बजट चाहिए। गौरतब है कि इससे डेढ़ साल पहले करीब 60 लाख का प्रस्ताव भिजवाया गया था। प्रस्ताव दो बार तैयार हो चुके हैं, लेकिन बजट नहीं दिया जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरम्मत के लिए बजट कौन देगा?
कलक्टर थे तब सोनी ने जताई थी दुर्घटना की आशंका, अब खुद एमडी
तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने गत वर्ष राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार की कटिंग एनआरएचएम के मिशन निदेशक को भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि भवन जर्जर अवस्था में होने के कारण कभी भी दुर्घटना/जनहानि हो सकती है। अब डॉ. सोनी खुद एनआरएचएम के मिशन निदेशक हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने एमसीएच विंग के भवन निर्माण में बरती गई लापरवाही व किए गए भ्रष्टाचार को लेकर शुरू से ही समाचार प्रकाशित कर अधिकारियों का ध्यान आकृषित किया। 17 जून 2021 को पत्रिका ने एमसीएच विंग में छत का प्लास्टर गिरने की खबर प्रकाशित की। इसके बाद 23 जुलाई को एमसीएच विंग की ग्राउण्ड रिपोर्ट प्रकाशित कर हकीकत बताई। पत्रिका द्वारा बार-बार समाचार प्रकाशित करने पर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने इसको गंभीरता से लेते हुए 26 जुलाई को एनआरएचएम के मिशन निदेशक को पत्र भवन की मरम्मत के लिए बजट की मांग की। कलक्टर ने पत्र में बताया कि उनके द्वारा एवं जेएलएन अस्पताल के पीएमओ द्वारा पूर्व में भी पत्र लिखे जा चुके हैं। कलक्टर ने पत्र में बताया कि 4 मई 20217 को जेएलएन अस्पताल के पीएमओ को हस्तांतरित किया गया एमसीएच भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इसके बावजूद आज तक एनआरएचएम कार्यालय से सहमति एवं बजट आवंटन संबंध में कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
एसीबी ने मुख्यालय भेजी जांच रिपोर्ट
एमसीएच यूनिट के भवन निर्माण में की गई गड़बड़ी की शिकायत पर तत्कालील जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम के पत्र पर एसीबी के अधिकारियों ने 6 सितम्बर 2018 को अस्पताल पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने लिए थे। नागौर एसीबी के अधिकारियों द्वारा जयपुर भेजी गई रिपोर्ट के बाद मुख्यालय से पीडब्ल्यूडी की तकनीकी कमेटी से जांच करवाकर भिजवाने के लिए कहा गया। करीब सात-आठ महीने बाद जिला कलक्टर डॉ. सोनी के हस्तक्षेप के बाद क्वालिटी कंट्रोल बोर्ड ने जांच कर एसीबी को दी, जो गत दिनों जयपुर मुख्यालय भेज दी गई है।

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