हट गया वीदर का साया, लाभ पंचमी से खुले प्रतिष्ठानों के तालें

- लाभ पंचमी की पूजा के बाद बाजार में वापस लौटी रौनक, दीपावली के अगले ही दिन लागू हो गया था वीदर, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में शुभ समय देखकर की नए साल की बोहनी

By: Jitesh kumar Rawal

Published: 20 Nov 2020, 10:15 AM IST

नागौर. दीपावली के साथ ही नए वर्ष की शुरुआत हो चुकी है। व्यापारियों ने बही खातों का पूजन कर नए वर्ष का आगज किया। हालांकि अधिकतर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान दीपावली के अगले ही दिन से खोल दिए थे, लेकिन कुछ जगहों पर तालें नहीं खुले थे। नक्षत्र के हिसाब से वीदर का साया रहने से ये प्रतिष्ठान करीब तीन दिन बाद खुले। कई व्यापारियों ने अपना हिसाब-किताब लाभ पंचमी से शुरू किया।

क्या है वीदर
ज्योतिषी गणना के आधार पर वीदर के समय में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। जिस दिन चंद्र वृच्छिक का हो उस दिन वीदर या बिच्छुड़ा माना गया है। इस समय में शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। यह काल तीन दिन तक रहता है। ज्योतिषी भी इस कालावधि में शुभ कार्यों को यथासंभव टालते हुए मुहूत्र्त निकालते हैं।

वीदर में शुभ कार्य टालते हैं...
वृच्छिक का चंद्र होने पर वीदर का साया रहता है। इस कालावधि में शुभ कार्यों को टाला जाता है। मुहूत्र्त बताते समय इस तरह की चीजों को देखकर ही समय निर्धारित करते हैं। मुहूत्र्त में पंचक, भद्रा आदि का भी ध्यान रखा जाता है। दीपावली के बाद वीदर हटने के बाद ही व्यापारियों ने नए साल की बोहनी की। वैसे अधिकतर लोग इस बार दीपावली के अगले दिन वीदर से पहले ही दुकानें खोल चुके थे।
- पं.सुनील दाधीच, ज्योतिषी एवं आचार्य, नागौर

Jitesh kumar Rawal
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