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VIDEO...पैतीस सालों के बाद जैनाचार्य के मंगल प्रवेश के साथ हुई पंचकल्याणक महोत्सव की शुरुआत

Nagaur. आचार्य सुनील सागर के मंगल पर हुआ स्वागत, दिगंबर जैन के तीनों का किया दर्शन
-युवा पीढ़ी को धर्म का ज्ञान होना चाहिए-आचार्य सुनील सागर महाराज

नागौर

Updated: June 11, 2022 10:43:05 pm

नागौर. पंचकल्याणक महोत्सव शुरूआत के अवसर पर जैनाचार्य सुनील सागर महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। विजयबल्लभ चौराहे पर जैनाचार्य का सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया गया। जैनाचार्य के के साथ 40-45 जैन संत भी थे। इसके पश्चात जैनाचार्य की मंगल यात्रा गाजे-बाजे के साथ बीसपंथी दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। आचार्य सुनील सागर महाराज व साथ आए जैन संतों ने मंदिर में दर्शन किया। इसके साथ ही साढ़े सोहल पंथी व तेरह पंथी मंदिर का भी अर्चन किया। यहां से घट शोभायात्रा निकली। घट शोभायात्रा मच्छियों का चौक, काठडिय़ों का चौक, लंबी गली एवं माही दरवाजा होते हुए बाड़ला मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में महिलाएं चुनरी कलर एवं पुरुष सफेद परिधानों में थे। सडक़ों के दोनों ओर खड़े जैन समाज के श्रद्धालू जैनाचार्यों का नमन करते नजर आए। इस दौरान पूरे रास्ते भजन बजते रहे। यहां पर ससंघ पहुंचे जैनाचार्य सुनील सागर महाराज का स्वागत किया गया। घट यात्रा निकलने के दौरान कई जगहों पर जैन समाज की ओर से स्वागत किया गया। बाड़ला मंदिर में पादपकसालन का कार्यक्रम हुआ। इसका सौभाग्य सुरेशचंद्र चूड़ीवाल व शास्त्र भंट करने का सौभाग्य माणकचंद, मोतीलाल एवं किशोर बडज़ात्या को मिला। कार्यक्रम में सुनील सागरजी महाराज ने कहा कि वर्तमान युग भोग-विलास का युग है। हर कोई सुख-सुविधाओं को पाना चाहता है। उन्होंने ने कहा कि व्यक्ति के लिए सर्वप्रथम आवश्यक है आत्म शुद्धि। तप-जप करने, नियमित भगवन का पूजन करने, धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने से मन में पवित्रता आती है। मन की पवित्रता से व्यक्ति में संतोष, परहित एवं आत्म कल्याण की भावनाओं विकसित होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढऩे के लिए धर्म का त्याग करना अनुचित ही नहीं, बल्कि विनाशकारी भी सिद्ध होता है। नई पीढी को अपने धर्म को जानना चाहिए। माता-पिता धर्म का अनुकरण करेंगे तो बच्चे भी धार्मिक बनेंगे। यदि माता-पिता ही धार्मिक संस्कारों से दूर रहेंगे तो फिर संतान अध्यात्म-ज्ञान से युक्त कैसे हो सकती है। जैन धर्म के प्रत्येक सिद्धान्त में वैज्ञानिकता का समावेश है। इसे समझने के लिए धार्मिक ग्रंथों का जिनवाणी का स्वाध्याय करना जरूरी है।नई पीढी को अपने धर्म को जानना चाहिए। जैन धर्म के प्रत्येक सिद्धान्त में वैज्ञानिकता का समावेश है। इस दौरान भूमि शुद्धि ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, अखण्ड ज्योत, दीप प्रज्ज्वलन, मंगल कलश स्थापना, आचार्य निमंत्रण, दिव्य देशना, मंगल प्रवचन, सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, मंडल प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, जाप्यारम्भ, श्री जिनाभिषेक, याग मंडल पूजा आदि धार्मिक कार्यक्रम हुए। इस मौके पर सनत कानूगो, राकेश पाटनी खन्नू, पवन कानूगो, श्रीचंद कासलीवाल, जीवराज चूड़ीवाल, भागचन्द काला, विनोद बाकलीवाल, ललित पाटनी, जीवराज पाटनी, अशोक पाटनी, महेन्द्र पहाडिय़ा, मुकेश बडज़ात्या एवं त्रिशला मंच, विराग महिला मंडल, बालिका मंडल व उत्तम दल आदि से भी इसमें शामिल हुए।
रथों पर सवार पहुंचे इंद्र
गाजे-बाजे साथ साथ निकली घट यात्रा में सौधर्म इन्द्र निर्मल कुमार-किरण देवी पाटनी गजरथ पर सवार थे। भगवान के माता-पिता निर्मल कुमार -सुनीतादेवी बडज़ात्या, धनपति कुबेर इन्द्र, दिलीप कुमार-सुनीता देवी बडज़ात्या, सनत कुमार इन्द्र दलपत कुमार सरला देवी कानूगो, महायज्ञनायक सुरेश कुमार, यज्ञनायक संदीप-प्रियंका कासलीवाल, ईशान इन्द्र अमित कुमार- चेरी देवी पाटनी, महेन्द्र इन्द्र संतोष कुमार-रेखादेवी पाटनी, ब्रह्म इन्द्र राजेश-बबिता कासलीवाल, ब्रह्मोत्तर इन्द्र चन्द्रकुमार-अरूणा बडज़ात्या, लान्तव्य इन्द्र अशोक-सीमा पाटनी, कापिष्ट इन्द्र सुरेश-जयमाला चांदुवाड़, शुक्र इन्द्र रोशन कुमार-रिचा बाकलीवाल, महाशुक्र इन्द्र पन्नालाल-सरोज देवी बाकलीवाल, शतार इन्द्र संतोष कुमार-संगीता बडज़ात्या, सहस्त्रार इन्द्र पुखराज-मीनादेवी पहाडिय़ा, आनत इन्द्र विकेश-संगीता पाटनी, प्राणत इन्द्र मुकेश-पारूल बडज़ात्या, आरण इन्द्र अनिल कुमार-मनोरमा देवी जैन, अच्युत इन्द्र मुकेश-अंजलि पाटनी बनी। इसी तरह महोत्सव के ध्वजारोहण करने वाले दिनेश, सर्वेश, अखिलेश पाटनी परिवार कोलकाता, मंडप उद्घाटनकत्र्ता मिलापचंद, सुरेशचंद, देवेन्द्र सौरभ, गौरव, निलेश बडज़ात्या परिवार, मंगलकलश स्थापनाकत्र्ता नरेन्द्र कुमार, संदीप, मनीश कासलीवाल, अखण्ड ज्योतकत्र्ता माणकचंद, मोतीलाल, नवीन कुमार, किशोर बडज़ात्या को बग्गियों में कार्यक्रम स्थल तक लाया गया।
फोटो. नागौर. आचार्य सुनील सागर महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश पर स्वागत के साथ निकली शोभायात्रा

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