कोविड-19 संक्रमण में भी कृषि मंडी का कारोबार पटरी से नहीं उतरा

Nagaur. सीजन अनुसार मूंग, मोठ, चवला, सरसों, तिल, ग्वार, ज्वार, बाजरा, जीरा, ईसबगोल, असालिया, मेथीदाना, सौंफ आदि की आवक ने महामारी के दौर में किसानों, व्यापारियों को नुकसान नहीं होने के साथ ही मंडी के राजस्व का संतुलन बनाए रखा
-अपना बाजार अभियान

By: Sharad Shukla

Published: 20 Sep 2021, 08:46 PM IST

नागौर. कोविड-19 के वायरस के चलते उपजी कठिन स्थितियों ने जहां आर्थिक जगत की पूरी व्यवस्था हिलाकर रख दी, वहीं कृषिमंडी के व्यवसाय पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। हालांकि गत वर्ष कोविड-19 शुरू होने के प्रारंभिक चरण में तकरीबन 20 दिनों के लिए कृषि मंडी जरूर बंद रही, लेकिन इसके बाद फिर खुली तो लगातार मंडी का कारोबार चलता रहा। बताते हैं कि मंडी में आने वाले जिंसों के आवश्यक खाद्य पदार्थों में शुमार होने के कारण यह प्रत्येक की जरूरत बन गई। इसकी वजह से यही एक क्षेत्र ऐसा रहा कि जहां पर व्यापार लगातार चलता रहा। मंडी में आई उपज को दूसरे क्षेत्रों में पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र कर्नाटक और गुजरात आदि प्रदेशों में भेजने का काम भी चलता रहा। वैसे कोविड-19 की स्थिति के कारण इसकी रफ्तार धीमी जरूर हुई, मगर आवागमन की सुविधा सुचारु होते ही कारोबार भी तेजी से पटरी पर दौडऩे लगा। विशेषकर मूंग की आवक यहां ज्यादा होती है। रीको एरिया में मंडी से आई मूंग को रिफ्रेश कर भेजने की प्रक्रिया भी पूरी तरह से कभी बंद नहीं हुई। इसका फायदा भी कारोबार को मिला।
इनकी आवक व व्यापार में कमी नहीं आई
्रकृषि मंडी में फसल चक्र के अनुसार सीजन में मूंग, मोठ, चवला, सरसों, तिल, ग्वार, ज्वार, बाजरा, ईसबगोल, जीरा, असालिया, मेथीदाना एवं सौंफ की आवक मंडी में कोविड-19 के दौरान भी होती रही। व्यापारियों की माने तो मंडी में आए जिंसों की आवक के चलते कृषि मंडी को भी लाखों का राजस्व मिला। अन्य व्यवसायों की अपेक्षा इस कारोबार ने मडी के राजस्व की गणित को कभी भी बिगडऩे नहीं दिया।
कोविड-19 का फर्क नहीं पड़ा
कृषि मंडी में कोविड-19 का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। पहली बार लॉकडाउन लगा तो जरूर 20 दिनों तक लगातार मंडी बंद रही। श्रमिक भी चले गए थे, लेकिन इसके बाद मंडी खुली तो फिर यह बंद नहीं हुई। इसके बाद से लगातार कारोबार चलता रहा। कोविड के दौर में तो पिछली बार भी मूंग का उत्पादन बेहतर रहा। इस बार मूंग का रकबा कम जरूर हुआ है, लेकिन उम्मीद है कि सीजन शुरू होते ही इसका कारोबार भी बेहतर होगा।
भोजराज सारस्वत, संरक्षक कृषिमंडी व्यापार मंडल नागौर
कोविड-19 के समय में भी कृषि मंडी ने लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने का काम किया है। मंडी में आए हुए जिंसों को बाहरी क्षेत्रों में भी भेजा गया। यहां पर चल रहे कारोबार ने कृषि मंडी के राजस्व का गणित भी नहीं बिगडऩे दिया। वर्तमान में भी सीजन के अनुसार जिंसों की आवक पर्याप्त होती रहती है। मंडी में वर्तमान में चल रहे व्यापारिक स्थिति के कारण कम से कम घाटे का मामला तो नहीं कह सकते हैं।
बनवारीलाल अग्रवाल, सचिव लघु उद्योग भारती नागौर
मंडी में इस बार भी मूंग की आवक बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि गत वर्ष की अपेक्षा इसका उत्पादन रकबा इस बार कम रहा है, लेकिन फिर भी जिले में स्थानीय किसानों के साथ ही आसपास सीमावर्ती जिलों के पास से भी किसान अपनी उपज लेकर आते हैं। कारण कि यहां पर उनको उपज के बेहतर दाम मिलते हैं। इस बार भी मंडी में मूंग सहित अन्य जिंसों के कारोबार में अच्छा व्यापार होने की पूरी उम्मीद है।
हरिराम धारणियां, व्यापारी कृषि मंडी नागौर

Sharad Shukla Reporting
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