अलाय बनेगा पशुपालन और औषधीय खेती का मॉडल ग्राम

जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने कृषि व पशुपालन विभाग के अधिकारियों को दिए निर्देश

By: shyam choudhary

Published: 20 Jul 2018, 12:27 PM IST

नागौर. ‘जिले के अलाय गांव को पशुपालन और औषधीय खेती के मॉडल गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करें। यहां के काश्तकारों को देसी गायों के संवर्धन के लिए प्रेरित करें तथा क्षेत्र में औषधीय खेती अधिकाधिक हो, इसके लिए यहां के काश्तकारों को औषधीय खेती के फायदों के बारे में बता कर उन्हें औषधीय खेती करने की सलाह दें।’ यह निर्देश जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय राष्ट्रीय बागवानी मिशन, आत्मा तथा कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण उद्देश्य एवं क्रियान्वन के लिए गठित जिला स्तरीय कमेटी की बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही विभाग के अधिकारी एक मेले का आयोजन करें, जिसमें जिले के विभिन्न काश्तकारों के साथ देश की प्रतिष्ठित औषधीय कंपनियों के प्रतिनिधि एवं काश्तकार के बीच विभिन्न औषधीय फसलों का एमओयू करवाया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में नागौर कृषि के क्षेत्र में अग्रणी जिला बन सके।

लाभकारी किसानों का रिकॉर्ड रखें
कलक्टर ने कहा कि सरकार द्वारा जिन काश्तकारों को खाद, बीज तथा अन्य सुविधाएं आधुनिक खेती के लिए प्रदान की जा रही हैं, उसके क्या परिणाम आते हैं और उसकी आय में कितनी वृद्धि होती है। यह सभी जानकारी संबंधित काश्तकार के खेत में जिले की अन्य पंचायतों के काश्तकारों को ले जाकर दिखाएं, ताकि आसपास के कृषक भी उसकी खेती में हुए परिवर्तन को देखकर सरकार द्वारा प्रदत्त योजनाओं से जुडकऱ लाभ उठाते हुए अपना आर्थिक स्तर ऊंचा कर सकें। उन्होंने कहा कि काश्तकारों को राज्य सरकार द्वारा उन्नत बीज और खाद का वितरण किया जा रहा है, जो कास्तकार अपने खेत में खाद व बीज का उपयोग करता है और उनके उत्पादन में इजाफा होता है तो उसकी जानकारी जिले के अन्य काश्तकारों के साथ भी शेयर की जाए, ताकि अधिकतर कृषक राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ ले सकें।

सॉयल हैल्थ कार्ड के बारे में बताएं

कलक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सॉयल हैल्थ कार्ड के बारे में काश्तकारों को समय-समय पर विस्तार से बताते रहें तथा उनके खेत की मिट्टी का परीक्षण कर उन्हें मिट्टी में उपलब्ध तत्वों के बारे में जानकारी दें। साथ ही यह भी बताएं कि उनकी मिट्टी में कौन-कौन से तत्व की कमी है, जिसकी पूर्ति होने से उन्हें फसल और अधिक मिलेगी। साथ ही वे अपनी खेती में और अधिक सुधार कर पाएंगे, जिससे सरकार की मंशा अनुसार उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो सके। साथ ही काश्तकारों को तुलनात्मक रूप से यह बताएं कि कितने हैक्टर में कितना पानी और कितने खाद व बीज का उपयोग करने से अधिक उत्पादन होता है। कृषि अधिकारी स्थानीय काश्तकारों के साथ सीधा संवाद रखें, जिससे उन्हें सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में समय-समय पर बताया जा सके।

युवाओं को दें कृषि प्रशिक्षण
कलक्टर ने कहा कि जिले की सभी पंचायत समिति क्षेत्र के कुछ चुनिंदा युवाओं को चयनित कर उन्हें कृषि कौशल प्रशिक्षण दिया जाए। यह प्रशिक्षण 25 वर्ष से 35 वर्ष आयु के युवाओं को दें। प्रशिक्षण के दौरान स्कूल व कॉलेज की तरह नियमित कक्षाएं लगाई जाए और उनकी परीक्षा ली जाए। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कृषि की नई तकनीक और कृषि उत्पादन के विपणन के बारे में विस्तार से बताया जाए। उन्होंने कृषि विभाग के उपनिदेशक हरजीराम चौधरी को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण के लिए संपूर्ण कार्य योजना बनाकर अगले 15 दिन में प्रस्तुत करें, ताकि आवश्यक संसाधनों से कौशल प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा सके। बैठक में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक छाजुराम मेहरड़ा के साथ उद्यानिकी विभाग, जलदाय विभाग, डिस्कॉम के अधिकारी उपस्थित थे।

shyam choudhary Reporting
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