scriptAnimals could not get FMD vaccine | पशुओं को नहीं लग पाया एफएमडी टीका | Patrika News

पशुओं को नहीं लग पाया एफएमडी टीका

Nagaur. जिले में तीन से चार लाख के करीब पशु हुए प्रभावित, दुग्ध उत्पादन भी गिरा, पशुओं की स्थिति खराब हुई, प्रदेश में आंकड़ा करोड़ों में पहुंचा
टीके में मिली खामी तो प्रदेश में ही रोक दिया एफएमडी अभियान

नागौर

Published: January 05, 2022 10:10:54 pm

नागौर. जिले में इस साल भी दुधारु पशुओं को खुरपका-मुंहपका के टीके नहीं लग पाए। टीके नहीं लगने से करीब तीन से चार लाख पशुओं की हालत नारकीय स्थिति में पहुंच गई। इस टीके अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में पशु इस बीमारी से पीडि़त होकर कष्ट झेलते रहे, लेकिन इसके विकल्प में राहत देने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से किए प्रयासों की स्थिति भी शून्य रही। नतीजतन हालात बद से बदतर होते चले गए, और दुग्ध उत्पादन की स्थिति औसत होकर रह गई। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष एफएमडी अभियान चलने के दौरान बीच में ही इसके नमूने फोरेंसिक जांच में फेल हो गए थे। इसके बाद इसे रोक दिया गया था। इसके बाद से अब तक जिले में नहीं नहीं, प्रदेश के किसी भी जिले में एफएमडी अभियान के तहत टीके नहीं लग पाए।
प्रदेश में करीब एक साल से ज्यादा का अर्सा होने के बाद भी पशुओं को अब तक एफएमडी के तहत टीके लगने का इंतजार है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गत वर्ष एफएमडी अभियान चलने के दौरान शुरुआती चरण में अचानक इसे रोक दिए जाने के आदेश उच्च स्तर से आ गए थे। कारण पता करने पर विभागीय जानकारों के अनुसार सामने आया कि संबंधित कंपनी की ओर से आपूर्ति में आए टीकों में तकनीकी खामी है। इसके चलते अभियान को बीच में ही रोक दिया गया, और संबंधित कंपनी को भी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया। इसके बाद से अब तक करीब डेढ़ साल से ज्यादा का अर्सा होने के बाद भी पशुओं का यह टीका विभाग की ओर से नहीं लगाया जा सका है। हालांकि रुटीन के तहत अन्य टीके जरूर लगे, लेकिन इस टीके के बारे में पालक पता करने गए तो कहा गया कि अब खुरपका-मुंहपका का टीका नहीं लग पाएगा। ऐसे में पशुपालकों में काफी मायूसी की स्थिति रही।
हालात बद से बदतर होते चले गए
खुरपका-मुंहपका का टीका नहीं लगने के बाद पशुओं में इसका क्या असर पड़ा है। इस संबंध में पशुपालन विभाग के पास न तो कोई तथ्यात्मक आंकड़े हैं, और इसकी कोई जानकारी है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में की गई पड़ताल में चौंकानेवाले अफसोसजनक तथ्य सामने आए हैं। कुचामन, मकराना, परबतसर, डीडवाना, जायल, नागौर, रियाबड़ी आदि क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति कई जगहों पर टीके के अभाव में काफी खराब रही। हालांकि कुछ जगहों पर समक्ष पालकों ने तो अपने पशुओं को सभी आवश्यक टीके लगवा लिए, लेकिन ज्यादातर पालक महंगी फीस देकर महंगी दर पर टीके लगवाने में अक्षम रहे। फलस्वरूप पशुओं में उपजी इस बीमारी ने उनकी हालत बिगाडक़र रख दी। खुरपका-मुंहपका में कुछ स्थानों पर पशुओं की स्थिति इस कदर बेकार हो गई कि वह दुग्ध उत्पादन तक करने में नाकाम रहे।
दुग्ध उत्पादन गिरने से स्थिति गंभीर
टीकाकरण के अभाव में पशुओं का दुग्ध उत्पादन भी गिर गया। इसकी वजह से कई जगहों पर दूध देने वाले पशुओं का दुग्ध उत्पादन भी औसत हो गया। नतीजन जिले भर में प्रति किलो दुग्ध विक्रय की दर भी पंद्रह से बीस रुपए बढ़ा दी गई। पैतीस से चालीस रुपए की दर पर बिकने वाला दुग्ध ५० से ५५ रुपए हो गया। कारण पूछने पर पशुपालकों का कहना था कि टीकाकरण नहीं होने से कुछ पशुओं की हालत बेहद खराब हो गई, और सही हैं उनमें दूध की मात्रा भी काफी घट गई।
इनका कहना है...
खुरपका-मुंहपका का टीकाकरण इस साल नहीं चल पाया। इस साल टीके भी नहीं आए। टीके आने पर टीके लगाए जाएंगे।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर

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